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Sirsa News: बारिश से मिली राहत, मरगोजा रोग और पाले ने बढ़ाई चिंता
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डिंग मंडी। सरसों की फसल दिखाते हुए किसान। किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
डिंग मंडी। डिंग क्षेत्र में शुक्रवार को हुई बारिश किसानों के लिए एक ओर बड़ी राहत लेकर आई है, तो दूसरी ओर कुछ नई परेशानियों का कारण भी बन गई है। लंबे समय से चले आ रहे सूखे मौसम के बाद हुई इस वर्षा से चना, गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों को पर्याप्त नमी मिली है। शनिवार सुबह पड़े पाले ने भी किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
पाले के कारण सरसों की फसल के फूल और फलियों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में ठंड और नमी इसी तरह बनी रही तो मरगोजा रोग का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है, जिससे सरसों की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
कृषि अधिकारियों के अनुसार बरसात के साथ ही सरसों की फसल में मरगोजा रोग के फैलने का खतरा बना रहता है। यह रोग भूमि में अधिक नमी होने पर सरसों की जड़ों के पास उगता है और धीरे-धीरे पौधों को कमजोर कर देता है। इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और समय के साथ पैदावार पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
किसान हनुमान बुगालिया ने बताया कि मरगोजा रोग मुख्य रूप से बारानी यानी रेतीले इलाकों में अधिक देखने को मिलता है, जबकि चिकनी मिट्टी वाले क्षेत्रों में इसकी समस्या अपेक्षाकृत कम रहती है। उन्होंने कहा कि कई खेतों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे हैं, जिससे किसान सतर्क हो गए हैं।
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डिंग मंडी। डिंग क्षेत्र में शुक्रवार को हुई बारिश किसानों के लिए एक ओर बड़ी राहत लेकर आई है, तो दूसरी ओर कुछ नई परेशानियों का कारण भी बन गई है। लंबे समय से चले आ रहे सूखे मौसम के बाद हुई इस वर्षा से चना, गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों को पर्याप्त नमी मिली है। शनिवार सुबह पड़े पाले ने भी किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
पाले के कारण सरसों की फसल के फूल और फलियों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में ठंड और नमी इसी तरह बनी रही तो मरगोजा रोग का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है, जिससे सरसों की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
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कृषि अधिकारियों के अनुसार बरसात के साथ ही सरसों की फसल में मरगोजा रोग के फैलने का खतरा बना रहता है। यह रोग भूमि में अधिक नमी होने पर सरसों की जड़ों के पास उगता है और धीरे-धीरे पौधों को कमजोर कर देता है। इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और समय के साथ पैदावार पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
किसान हनुमान बुगालिया ने बताया कि मरगोजा रोग मुख्य रूप से बारानी यानी रेतीले इलाकों में अधिक देखने को मिलता है, जबकि चिकनी मिट्टी वाले क्षेत्रों में इसकी समस्या अपेक्षाकृत कम रहती है। उन्होंने कहा कि कई खेतों में इसके शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे हैं, जिससे किसान सतर्क हो गए हैं।