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बडागुढ़ा सहकारी बैंक मामला : एसआईटी ने सौंपी रिपोर्ट, महाप्रबंधक ने किए दोषियों को नोटिस जारी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 09 Apr 2026 12:19 AM IST
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दी केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखा में हुआ था गबन, एक सप्ताह में रिकवरी नहीं हुई तो दर्ज होगी प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
ओढ़ां। गांव बड़ागुढ़ा स्थित दी केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखा में एक कैशियर द्वारा एक वृद्ध उपभोक्ता के खाते से की गई लाखों की ठगी के मामले की जांच एसआईटी ने पूरी कर रिपोर्ट महाप्रबंधक को सौंप दी है। इसके बाद महाप्रबंधक ने जांच में दोषी पाए गए आरोपी कैशियर व कुछ अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में रिकवरी करने के निर्देश दिए हैं। इस अवधि में अगर दोषी रिकवरी नहीं करवाते हैं तो उनके खिलाफ थाना में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।
इस मामले में एसआईटी को जांच के लिए 15 दिन का समय दिया गया था लेकिन एसआईटी ने अपनी जांच में 40 दिन का समय लगा दिया। आरोपी कैशियर सुभाष चाहर एक बार भी जांच में शामिल नहीं हुआ। एसआईटी द्वारा बार-बार उसे नोटिस भेजे गए लेकिन उसने कोई परवाह नहीं की। मामला उठने के बाद से ही उसका नंबर लगातार बंद है।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की जांच में 18 से 20 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई है। मामले में कैशियर सुभाष चाहर के साथ-साथ शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, पूर्व शाखा प्रबंधक ओमप्रकाश चाहर व कैशियर धर्मपाल सहित 4 लोगों को दोषी ठहराया गया है। आरोपी कैशियर ने गबन में शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, ओमप्रकाश व बलवंत की आईडी इस्तेमाल कर जहां उपभोक्ताओं को मोटा चूना लगाया तो वहीं बैंक की शाख को धूमिल किया।
नियमानुसार, शाखा में लेनदेन के पहले क्लर्क अपनी आईडी से वाउचर पास करेगा उसके बाद शाखा प्रबंधक अपनी आईडी से वाउचर को पास करेगा और फिर उसके बाद कैशियर उपभोक्ता को नकदी देगा। हर अधिकारी की आईडी गोपनीय होती है जोकि वह स्वयं ही इस्तेमाल करता है। शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, ओमप्रकाश व बलवंत ने अपनी-अपनी आईडी कैशियर सुभाष के साथ शेयर किए थे। इसके जरिए सुभाष लाखों का गबन करता रहा।
शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, ओमप्रकाश व बलवंत ने कैशियर सुभाष चाहर को अपनी आईडी इस्तेमाल करने के लिए छूट दे रखी थी। यानी ये भी इस गबन में साथ शामिल रहे। इसके चलते एसआईटी ने इन तीनों को भी आरोपी बनाया है। सामने आया है कि जब इन्द्रपाल अवकाश पर थे तो उनकी जगह अस्थायी रूप से ओमप्रकाश व बलवंत की ड्यूटी लगाई गई थी।
इन दोनों अधिकारियों ने भी कैशियर सुभाष के साथ अपनी गोपनीय आईडी शेयर किए रखी। इसका फायदा सुभाष ने खूब उठाया। एसआईटी की नजर में ये चारों गबन में बराबर भागीदार हैं। वहीं, गांव बिज्जुवाली में भी कैशियर सुभाष की ड्यूटी रही। वहां भी अब तक जांच बाकी है।
वर्जन
हमने अपनी रिपोर्ट महाप्रबंधक को सौंप दी है। एसआईटी के कर्मचारियों के छुट्टी पर जाने व कुछ और कारणों के चलते जांच में थोड़ा समय लग गया। अब इस मामले में आगामी कार्रवाई महाप्रबंधक करेंगे।
- असिस्टेंट मैनेजर अभय जिंदल, एसआईटी इंचार्ज
एसआईटी की रिपोर्ट हमारे पास आ चुकी है। हमने सभी दोषियों को रिकवरी नोटिस जारी किए हैं। अगर एक सप्ताह में वे रिकवरी नहीं करवाते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए थाना में शिकायत दी जाएगी। कैशियर सुभाष जांच में शामिल नहीं हुआ। वह फरार है। शाखा में इसके अतिरिक्त कई और गबन भी सामने आए हैं। इन मामलों में भी कार्रवाई की जाएगी।
- ऋषिपाल, महाप्रबंधक (सीबी सिरसा)
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ओढ़ां। गांव बड़ागुढ़ा स्थित दी केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखा में एक कैशियर द्वारा एक वृद्ध उपभोक्ता के खाते से की गई लाखों की ठगी के मामले की जांच एसआईटी ने पूरी कर रिपोर्ट महाप्रबंधक को सौंप दी है। इसके बाद महाप्रबंधक ने जांच में दोषी पाए गए आरोपी कैशियर व कुछ अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में रिकवरी करने के निर्देश दिए हैं। इस अवधि में अगर दोषी रिकवरी नहीं करवाते हैं तो उनके खिलाफ थाना में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा।
इस मामले में एसआईटी को जांच के लिए 15 दिन का समय दिया गया था लेकिन एसआईटी ने अपनी जांच में 40 दिन का समय लगा दिया। आरोपी कैशियर सुभाष चाहर एक बार भी जांच में शामिल नहीं हुआ। एसआईटी द्वारा बार-बार उसे नोटिस भेजे गए लेकिन उसने कोई परवाह नहीं की। मामला उठने के बाद से ही उसका नंबर लगातार बंद है।
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सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की जांच में 18 से 20 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई है। मामले में कैशियर सुभाष चाहर के साथ-साथ शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, पूर्व शाखा प्रबंधक ओमप्रकाश चाहर व कैशियर धर्मपाल सहित 4 लोगों को दोषी ठहराया गया है। आरोपी कैशियर ने गबन में शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, ओमप्रकाश व बलवंत की आईडी इस्तेमाल कर जहां उपभोक्ताओं को मोटा चूना लगाया तो वहीं बैंक की शाख को धूमिल किया।
नियमानुसार, शाखा में लेनदेन के पहले क्लर्क अपनी आईडी से वाउचर पास करेगा उसके बाद शाखा प्रबंधक अपनी आईडी से वाउचर को पास करेगा और फिर उसके बाद कैशियर उपभोक्ता को नकदी देगा। हर अधिकारी की आईडी गोपनीय होती है जोकि वह स्वयं ही इस्तेमाल करता है। शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, ओमप्रकाश व बलवंत ने अपनी-अपनी आईडी कैशियर सुभाष के साथ शेयर किए थे। इसके जरिए सुभाष लाखों का गबन करता रहा।
शाखा प्रबंधक इन्द्रपाल, ओमप्रकाश व बलवंत ने कैशियर सुभाष चाहर को अपनी आईडी इस्तेमाल करने के लिए छूट दे रखी थी। यानी ये भी इस गबन में साथ शामिल रहे। इसके चलते एसआईटी ने इन तीनों को भी आरोपी बनाया है। सामने आया है कि जब इन्द्रपाल अवकाश पर थे तो उनकी जगह अस्थायी रूप से ओमप्रकाश व बलवंत की ड्यूटी लगाई गई थी।
इन दोनों अधिकारियों ने भी कैशियर सुभाष के साथ अपनी गोपनीय आईडी शेयर किए रखी। इसका फायदा सुभाष ने खूब उठाया। एसआईटी की नजर में ये चारों गबन में बराबर भागीदार हैं। वहीं, गांव बिज्जुवाली में भी कैशियर सुभाष की ड्यूटी रही। वहां भी अब तक जांच बाकी है।
वर्जन
हमने अपनी रिपोर्ट महाप्रबंधक को सौंप दी है। एसआईटी के कर्मचारियों के छुट्टी पर जाने व कुछ और कारणों के चलते जांच में थोड़ा समय लग गया। अब इस मामले में आगामी कार्रवाई महाप्रबंधक करेंगे।
- असिस्टेंट मैनेजर अभय जिंदल, एसआईटी इंचार्ज
एसआईटी की रिपोर्ट हमारे पास आ चुकी है। हमने सभी दोषियों को रिकवरी नोटिस जारी किए हैं। अगर एक सप्ताह में वे रिकवरी नहीं करवाते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए थाना में शिकायत दी जाएगी। कैशियर सुभाष जांच में शामिल नहीं हुआ। वह फरार है। शाखा में इसके अतिरिक्त कई और गबन भी सामने आए हैं। इन मामलों में भी कार्रवाई की जाएगी।
- ऋषिपाल, महाप्रबंधक (सीबी सिरसा)