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Sonipat News: दमकल केंद्र का टैंक ही प्यासा तो कैसे बुझेगी आग
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 12 Apr 2026 05:04 AM IST
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फोटो :: सोनीपत के खरखौदा स्थित दमकल केंद्र में खड़ी तीन गाड़ियां। संवाद
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लोगो :: पड़ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। आग लगने की घटना होने पर दमकल केंद्र ही उसे बुझाने का सहारा है मगर यह केंद्र खुद बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। यह केंद्र न केवल 3200 एकड़ में फैली औद्योगिक क्षेत्र आईएमटी व फिरोजपुर बांगर की सुरक्षा करता है बल्कि 70 हजार हेक्टेयर में फैले कृषि क्षेत्र में लगने वाली आग को भी नियंत्रित करने का काम करता है।
दमकल केंद्र वर्ष 2019 में शुरू हुआ था मगर आज तक पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है। केंद्र में मौजूद टैंक वर्षों से खाली पड़ा है। जब किसी जगह आग लगती है और दमकल गाड़ियों का पानी खत्म हो जाता है तो उन्हें वापस लौटकर नहर से पानी भरकर ले जाना पड़ता है।
खरखौदा के मटिंडू चौक बाईपास स्थित दमकल केंद्र में मात्र तीन दमकल गाड़ियां हैं। इनके भरोसे आईएमटी, फिरोजपुर बांगर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के साथ खेतों में लगने वाली आग को नियंत्रित किया जाता है। गर्मी में जब गेहूं की फसल के समय आग लगने की घटना होती है तब दमकल विभाग पर दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
22 स्वीकृत पद में आधे से अधिक खाली
दमकल केंद्र के लिए 22 पद स्वीकृत किए गए हैं लेकिन इनमें से आधे से अधिक खाली पड़े हैं। स्टाफ की भारी कमी के चलते एक साथ कई स्थानों पर आग लगने की स्थिति में त्वरित कार्य नहीं हो पाता है। कई बार दमकलकर्मी बिना विश्राम के दिन-रात ड्यूटी देने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इससे न केवल उनकी कार्य क्षमता प्रभावित होती है बल्कि जोखिम भी बढ़ता है।
22 किमी दूर फरमाणा तक यहीं से जाती हैं गाड़ियां
खरखौदा से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित फरमाणा जैसे गांवों में आग लगने की घटना पर भी यहीं से गाड़ियां भेजनी पड़ती हैं। क्षेत्रफल बड़ा है लेकिन न तो उपकेंद्र है और न ही अतिरिक्त संसाधन। इस कारण आग लगने पर कई बार देरी होती है जिससे किसानों और आमजन को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
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फिरोजपुर बांगर में टैंक बनाए जाने की जरूरत
दिल्ली मार्ग पर फिरोजपुर बांगर औद्योगिक क्षेत्र व आसपास के दस गांवों की 3,200 एकड़ जमीन में आईएमटी है। यहां पर पानी का एक टैंक बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि आग लगने के दौरान पानी के लिए खरखौदा न भागना पड़े। दमकल की गाड़ियों को स्थानीय स्तर पर ही पानी उपलब्ध हो सके।
वर्जन
खरखौदा दमकल केंद्र में पानी की स्थायी व्यवस्था करने के लिए मुख्यालय पत्र लिखा गया है। वहीं, आईएमटी में एक दमकल केंद्र प्रस्तावित है। वहां केंद्र का निर्माण एचएसआईआईडीसी की ओर से किया जाना है। -रामेश्वर सिंह, जिला दमकल अधिकारी।
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खरखौदा। आग लगने की घटना होने पर दमकल केंद्र ही उसे बुझाने का सहारा है मगर यह केंद्र खुद बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। यह केंद्र न केवल 3200 एकड़ में फैली औद्योगिक क्षेत्र आईएमटी व फिरोजपुर बांगर की सुरक्षा करता है बल्कि 70 हजार हेक्टेयर में फैले कृषि क्षेत्र में लगने वाली आग को भी नियंत्रित करने का काम करता है।
दमकल केंद्र वर्ष 2019 में शुरू हुआ था मगर आज तक पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है। केंद्र में मौजूद टैंक वर्षों से खाली पड़ा है। जब किसी जगह आग लगती है और दमकल गाड़ियों का पानी खत्म हो जाता है तो उन्हें वापस लौटकर नहर से पानी भरकर ले जाना पड़ता है।
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खरखौदा के मटिंडू चौक बाईपास स्थित दमकल केंद्र में मात्र तीन दमकल गाड़ियां हैं। इनके भरोसे आईएमटी, फिरोजपुर बांगर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के साथ खेतों में लगने वाली आग को नियंत्रित किया जाता है। गर्मी में जब गेहूं की फसल के समय आग लगने की घटना होती है तब दमकल विभाग पर दबाव और अधिक बढ़ जाता है।
22 स्वीकृत पद में आधे से अधिक खाली
दमकल केंद्र के लिए 22 पद स्वीकृत किए गए हैं लेकिन इनमें से आधे से अधिक खाली पड़े हैं। स्टाफ की भारी कमी के चलते एक साथ कई स्थानों पर आग लगने की स्थिति में त्वरित कार्य नहीं हो पाता है। कई बार दमकलकर्मी बिना विश्राम के दिन-रात ड्यूटी देने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इससे न केवल उनकी कार्य क्षमता प्रभावित होती है बल्कि जोखिम भी बढ़ता है।
22 किमी दूर फरमाणा तक यहीं से जाती हैं गाड़ियां
खरखौदा से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित फरमाणा जैसे गांवों में आग लगने की घटना पर भी यहीं से गाड़ियां भेजनी पड़ती हैं। क्षेत्रफल बड़ा है लेकिन न तो उपकेंद्र है और न ही अतिरिक्त संसाधन। इस कारण आग लगने पर कई बार देरी होती है जिससे किसानों और आमजन को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
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फिरोजपुर बांगर में टैंक बनाए जाने की जरूरत
दिल्ली मार्ग पर फिरोजपुर बांगर औद्योगिक क्षेत्र व आसपास के दस गांवों की 3,200 एकड़ जमीन में आईएमटी है। यहां पर पानी का एक टैंक बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि आग लगने के दौरान पानी के लिए खरखौदा न भागना पड़े। दमकल की गाड़ियों को स्थानीय स्तर पर ही पानी उपलब्ध हो सके।
वर्जन
खरखौदा दमकल केंद्र में पानी की स्थायी व्यवस्था करने के लिए मुख्यालय पत्र लिखा गया है। वहीं, आईएमटी में एक दमकल केंद्र प्रस्तावित है। वहां केंद्र का निर्माण एचएसआईआईडीसी की ओर से किया जाना है। -रामेश्वर सिंह, जिला दमकल अधिकारी।