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कृष्ण की बाल अदाएं सबका मन मोह लेती थीं : महाराज

संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Tue, 10 Mar 2026 07:39 PM IST
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Krishna's childhood antics captivated everyone: Maharaj
फोटो : सोनीपत के गुड़ मंडी स्थित अग्रवाल धर्मशाला परिसर में श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा सुन
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोनीपत। गुड़ मंडी स्थित अग्रवाल धर्मशाला में श्री चैतन्य महाप्रभु संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा की जा रही है। मंगलवार को पांचवें दिन श्रील भक्ति प्रसाद विष्णु गोस्वामी महाराज ने माखन चोर लीला, दामोदर लीला, कालिया नाग व गोवर्धन पर्वत का प्रसंग सुनाया।
इसमें कृष्ण की नटखटता, माता यशोदा के प्रति प्रेम, दुष्टों का दमन और प्रकृति पूजा का संदेश दिया गया। यह लीलाएं ब्रज की भक्ति भावना को दर्शाती हैं जो भगवान कृष्ण के प्रति समर्पण और उनकी दिव्य शक्ति का प्रतीक हैं।
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महाराज ने श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला का वर्णन करते हुए बताया कि बालकृष्ण का नटखट स्वभाव ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। मां यशोदा के पास प्रतिदिन उनकी शिकायत पहुंचती थी कि वे माखन चुरा लेते हैं। इस पर कान्हा मुस्कुराते हुए अपना मुख खोलकर कहते मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो।
उनकी बाल सुलभ अदाएं सभी का मन मोह लेती थीं। गांव के लोग भले ही शिकायत करते थे लेकिन उनके हृदय में कृष्ण के प्रति अपार स्नेह भरा रहता था। कालिया मर्दन प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि जब यमुना नदी में विषैले कालिया नाग का आतंक था तब बालकृष्ण ने कदंब वृक्ष से यमुना में छलांग लगाकर कालिया नाग का दमन किया।
यह लीला साहस और धर्म विजय की प्रतीक है। गोवर्धन पूजा प्रसंग में बताया गया कि जब ब्रजवासी इंद्र देव की पूजा की तैयारी कर रहे थे तब श्रीकृष्ण ने उन्हें प्रकृति के प्रतीक गोवर्धन पर्वत की पूजा का संदेश दिया। इंद्र के क्रोधित होकर बारिश करने पर कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर पूरे ब्रज की रक्षा की।
सात दिन बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने बारिश रोक दी। इसके बाद ब्रज में जयकारों की गूंज फैल गई। कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को विचार, वैराग्य और ज्ञान का मार्ग दिखाती है। कलयुग में केवल हरि नाम का स्मरण ही मोक्ष का सरल साधन है।
सच्चे हृदय से भगवान का नाम लेने मात्र से जीवन सफल हो सकता है। गोपियों के प्रेम पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान योग से अधिक सरल और सुखद प्रेम योग है। जिस कृष्ण को बड़े-बड़े ज्ञानी नहीं पा सके उन्हें सरल हृदय गोपियों ने प्रेम के बल पर प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को लोभ, लालच और कामनाओं से दूर रहकर परमार्थ के मार्ग पर चलना चाहिए। ऐसा करने से समाज में सकारात्मक परिवर्तन और आनंद का संचार होता है।
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