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फिजियोलॉजी का ज्ञान रखकर खिलाड़ी सुधार सकते हैं प्रदर्शन : कुलपति
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 08 Apr 2026 05:13 PM IST
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फोटो : सोनीपत के हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई में कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को जानकार
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई में ‘उच्च प्रदर्शन में अनुप्रयुक्त खेल शरीर क्रिया विज्ञान : प्रयोगशाला अवधारणाओं से लेकर क्षेत्र अनुप्रयोग तक’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार के लिए खेल विज्ञान के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप में समझाना और उन्हें मैदान स्तर पर लागू करने की जानकारी देना रहा।
भारतीय खेल प्राधिकरण के उत्तरी क्षेत्रीय केंद्र में बतौर हाई परफॉर्मेंस एनालिस्ट (फिजियोलॉजी) डॉ. नेहा कक्कड़ ने खेल प्रदर्शन में प्रयोगशाला अवधारणाओं से लेकर क्षेत्र अनुप्रयोग तक, खेल प्रदर्शन में फिजियोलॉजिकल मॉनीटरिंग के महत्व व सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच अंतर को पाटने के विस्तार पर प्रकाश डाला।
कुलपति अशोक कुमार ने कहा कि फिजियोलॉजी का मूलभूत ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। इसके आधार पर खिलाड़ी भविष्य में अपने प्रदर्शन का आकलन एवं सुधार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लैक्टिक एसिड, वीओ 2 मैक्स जैसे सिद्धांत खिलाड़ियों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं।
कुलपति ने कहा कि खेल गतिविधियों में अलग-अलग कारक जिम्मेदार होते हैं इसलिए इन सभी कारकों की जानकारी खिलाड़ी व कोच दोनों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एआई की सहायता से इन पहलुओं का स्व मूल्यांकन भी संभव है।
कार्यशाला में डीन, शारीरिक शिक्षा एवं खेल प्रो. योगेश चंद्र, डीन, स्पोर्ट्स साइंस डॉ. विवेक कुमार सिंह, सीनियर कंसल्टेंट (स्पोर्ट्स) प्रो. आरपी गर्ग व डॉ. गोपाल भी मौजूद रहे।
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सोनीपत। हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई में ‘उच्च प्रदर्शन में अनुप्रयुक्त खेल शरीर क्रिया विज्ञान : प्रयोगशाला अवधारणाओं से लेकर क्षेत्र अनुप्रयोग तक’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार के लिए खेल विज्ञान के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप में समझाना और उन्हें मैदान स्तर पर लागू करने की जानकारी देना रहा।
भारतीय खेल प्राधिकरण के उत्तरी क्षेत्रीय केंद्र में बतौर हाई परफॉर्मेंस एनालिस्ट (फिजियोलॉजी) डॉ. नेहा कक्कड़ ने खेल प्रदर्शन में प्रयोगशाला अवधारणाओं से लेकर क्षेत्र अनुप्रयोग तक, खेल प्रदर्शन में फिजियोलॉजिकल मॉनीटरिंग के महत्व व सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच अंतर को पाटने के विस्तार पर प्रकाश डाला।
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कुलपति अशोक कुमार ने कहा कि फिजियोलॉजी का मूलभूत ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। इसके आधार पर खिलाड़ी भविष्य में अपने प्रदर्शन का आकलन एवं सुधार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लैक्टिक एसिड, वीओ 2 मैक्स जैसे सिद्धांत खिलाड़ियों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं।
कुलपति ने कहा कि खेल गतिविधियों में अलग-अलग कारक जिम्मेदार होते हैं इसलिए इन सभी कारकों की जानकारी खिलाड़ी व कोच दोनों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में एआई की सहायता से इन पहलुओं का स्व मूल्यांकन भी संभव है।
कार्यशाला में डीन, शारीरिक शिक्षा एवं खेल प्रो. योगेश चंद्र, डीन, स्पोर्ट्स साइंस डॉ. विवेक कुमार सिंह, सीनियर कंसल्टेंट (स्पोर्ट्स) प्रो. आरपी गर्ग व डॉ. गोपाल भी मौजूद रहे।