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Sonipat News: सुबह सिसाना में रणदीप को माना प्रधान, शाम को गढ़ी सिसाना की पंचायत ने किया खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 08 Jun 2026 04:54 AM IST
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सोनीपत के गांव गढ़ी सिसाना में पंचायत करता दूसरा पक्ष।
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खरखौदा। गांव सिसाना स्थित धर्मार्थ गोशाला में प्रधान पद को लेकर चल रहे विवाद को लेकर रविवार सुबह आयोजित पंचायत में मामले को सुलझाने का दावा किया गया, लेकिन शाम को गढ़ी सिसाना पंचायत ने इसे इंकार कर दिया।
सुबह गोशाला परिसर में आयोजित पंचायत में पूर्व प्रधान रणदीप को दोबारा प्रधान चुने जाने की बात कही गई थी लेकिन फैसले को गढ़ी सिसाना गांव की पंचायत ने सिरे से खारिज कर दिया। पंचायत ने स्पष्ट किया कि 5 जून को आयोजित 61 गांवों की पंचायत में रामकुमार को प्रधान चुना गया था और वही उनके लिए धर्मार्थ गोशाला के वैध प्रधान हैं।
5 जून को हुई पंचायत में एक नाम पर सहमति न बनने के कारण दो प्रधान चुन लिए गए थे जिससे स्थिति विवादित हो गई थी। बाद में कार्यकारी प्रधान के भी स्वयं को प्रधान घोषित करने के कारण मामला और उलझ गया था। इसी विवाद के समाधान के लिए रविवार को पुन: पंचायत बुलाई गई।
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पंचायत में मौजूद धर्मबीर एक्सईएन ने बताया कि पंचायती परंपरा के अनुसार 11 सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी जिसे विचार-विमर्श कर निष्पक्ष निर्णय लेने की जिम्मेदारी दी गई थी। कमेटी की तरफ से प्रस्तुत प्रस्ताव को पंचायत ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।
निर्णय के अनुसार गोशाला के संचालन, वित्तीय प्रबंधन, दान राशि के उपयोग और अन्य प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी अब अध्यक्ष रणदीप और उनकी टीम को सौंपी गई है। इस मौके पर दहिया खाप प्रधान सुरेंद्र दहिया, पूर्व जिला पार्षद चांद पहलवान, राजसिंह, जितेंद्र, देवेंद्र, रामेश्वर, अशोक, राजबीर, अजय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
शाम को विवाद फिर बढ़ा
गढ़ी सिसाना के मंदिर में रविवार देर शाम पूर्व सरपंच प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने गोशाला में हुई पंचायत के निर्णय पर आपत्ति जताई। ग्रामीण आनंद दहिया ने कहा कि गोशाला में लिया गया फैसला एकतरफा है तथा उसमें गठित 11 सदस्यीय कमेटी में ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया जिनका गोशाला से प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गढ़ी सिसाना के लोगों को पंचायत में बुलाया तक नहीं गया।
पंचायत ने निर्णय लिया कि गांव की ओर से सात सदस्यीय कमेटी गठित कर धर्मार्थ गोशाला से जुड़े विभिन्न गांवों में जाकर अपना पक्ष रखा जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि रामकुमार पिछले दो दिनों से गोशाला की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और आगे भी वही कार्यभार संभालते रहेंगे।
रामकुमार दहिया ने कहा कि उन्हें 61 गांवों की पंचायत द्वारा प्रधान चुना गया था। उन्होंने बताया कि रविवार को वह एक हवन के निमंत्रण के सिलसिले में खरखौदा गए हुए थे और उनकी अनुपस्थिति में दूसरी पंचायत कर किसी अन्य को प्रधान घोषित कर दिया गया जिसे वह कुछ लोगों का निजी निर्णय मानते हैं।
पंचायत में कृष्ण, अजमेर ठेकेदार, राजेंद्र, बलराज, रामफल, बिजेंद्र तथा प्रधान नरेश सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे। धर्मार्थ गोशाला के प्रधान पद को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच विवाद और गहराता दिखाई दे रहा है।
सुबह गोशाला परिसर में आयोजित पंचायत में पूर्व प्रधान रणदीप को दोबारा प्रधान चुने जाने की बात कही गई थी लेकिन फैसले को गढ़ी सिसाना गांव की पंचायत ने सिरे से खारिज कर दिया। पंचायत ने स्पष्ट किया कि 5 जून को आयोजित 61 गांवों की पंचायत में रामकुमार को प्रधान चुना गया था और वही उनके लिए धर्मार्थ गोशाला के वैध प्रधान हैं।
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5 जून को हुई पंचायत में एक नाम पर सहमति न बनने के कारण दो प्रधान चुन लिए गए थे जिससे स्थिति विवादित हो गई थी। बाद में कार्यकारी प्रधान के भी स्वयं को प्रधान घोषित करने के कारण मामला और उलझ गया था। इसी विवाद के समाधान के लिए रविवार को पुन: पंचायत बुलाई गई।
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पंचायत में मौजूद धर्मबीर एक्सईएन ने बताया कि पंचायती परंपरा के अनुसार 11 सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी जिसे विचार-विमर्श कर निष्पक्ष निर्णय लेने की जिम्मेदारी दी गई थी। कमेटी की तरफ से प्रस्तुत प्रस्ताव को पंचायत ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।
निर्णय के अनुसार गोशाला के संचालन, वित्तीय प्रबंधन, दान राशि के उपयोग और अन्य प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी अब अध्यक्ष रणदीप और उनकी टीम को सौंपी गई है। इस मौके पर दहिया खाप प्रधान सुरेंद्र दहिया, पूर्व जिला पार्षद चांद पहलवान, राजसिंह, जितेंद्र, देवेंद्र, रामेश्वर, अशोक, राजबीर, अजय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
शाम को विवाद फिर बढ़ा
गढ़ी सिसाना के मंदिर में रविवार देर शाम पूर्व सरपंच प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित पंचायत में ग्रामीणों ने गोशाला में हुई पंचायत के निर्णय पर आपत्ति जताई। ग्रामीण आनंद दहिया ने कहा कि गोशाला में लिया गया फैसला एकतरफा है तथा उसमें गठित 11 सदस्यीय कमेटी में ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया जिनका गोशाला से प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गढ़ी सिसाना के लोगों को पंचायत में बुलाया तक नहीं गया।
पंचायत ने निर्णय लिया कि गांव की ओर से सात सदस्यीय कमेटी गठित कर धर्मार्थ गोशाला से जुड़े विभिन्न गांवों में जाकर अपना पक्ष रखा जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि रामकुमार पिछले दो दिनों से गोशाला की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और आगे भी वही कार्यभार संभालते रहेंगे।
रामकुमार दहिया ने कहा कि उन्हें 61 गांवों की पंचायत द्वारा प्रधान चुना गया था। उन्होंने बताया कि रविवार को वह एक हवन के निमंत्रण के सिलसिले में खरखौदा गए हुए थे और उनकी अनुपस्थिति में दूसरी पंचायत कर किसी अन्य को प्रधान घोषित कर दिया गया जिसे वह कुछ लोगों का निजी निर्णय मानते हैं।
पंचायत में कृष्ण, अजमेर ठेकेदार, राजेंद्र, बलराज, रामफल, बिजेंद्र तथा प्रधान नरेश सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे। धर्मार्थ गोशाला के प्रधान पद को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच विवाद और गहराता दिखाई दे रहा है।