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Sonipat News: विश्व किडनी दिवस आज...जिला अस्पताल में 95 मरीज करा रहे डायलिसिस
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 13 Mar 2026 05:49 AM IST
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फोटो : सोनीपत के नागरिक अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित केंद्र में डायलिसिस कराते गुर्दे के
- फोटो : बंदी के कगार पर साइंस और ग्लासवेयर उद्योग, गैस का सिर्फ दो दिन का स्टॉक
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सोनीपत। जिला अस्पताल में सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) मोड पर संचालित किए जा रहे डायलिसिस केंद्र में 95 गुर्दा मरीज डायलिसिस करवार हे हैं। पहले यहां 12 मशीनों से डायलिसिस होता था मगर मई 2025 से मशीन की संख्या 15 हो गई है। रोजाना करीब 30 मरीज की निशुल्क डायलिसिस की जा रही है।
खानपुर कलां स्थित भगत फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज में सात बिस्तरों के इस केंद्र में हर महीने 150 मरीज डायलिसिस कराने पहुंच रहे हैं।अक्तूबर 2024 में मुख्यमंत्री नायब सैनी की घोषणा के बाद किडनी के मरीजों की निशुल्क डायलिसिस की जा रही है।
दोनों केंद्रों पर सामान्य गुर्दा रोगी, हेपेटाइटिस-सी और बी से संबंधित मरीजों की डायलिसिस की जाती है। पहले सरकार की तरफ से बीपीएल, एससी-एसटी वर्ग, हरियाणा सरकार के कर्मियों, दिव्यांगों का निशुल्क डायलिसिस किया जाता था।
इसके अलावा आयुष्मान योजना के तहत भी डायलिसिस मुफ्त में की जा रही थी। सरकार ने करीब डेढ़ साल पहले आरक्षित वर्ग की औपचारिकता को खत्म कर दिया है।
डायलिसिस सत्र में कम से कम 130 लीटर आरओ पानी की आवश्यकता
एक मरीज के डायलिसिस में कम से कम 130 लीटर आरओ पानी की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। डायलिसिस के लिए पहले मरीजों को पंजीकरण कर नंबर लेना पड़ता है क्योंकि बेड की संख्या सीमित है। जिन मरीजों की दोनों किडनी खराब हो गई हैं उनको क्रिएटिनिन स्तर के आधार पर सप्ताह में दो या तीन बार डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में आवश्यक दवाएं भी निशुल्क दी जाती हैं। प्रशिक्षित स्टाफ मरीजों की देखभाल में तैनात रहता है। जिला अस्पताल में वर्ष 2024-25 के दौरान 11586 डायलिसिस सत्र हुए थे। वहीं वर्ष 2025 से 10 फरवरी 2026 तक 9519 डायलिसिस सत्र हुए हैं।
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शुगर नियंत्रण में नहीं तो किडनी खराब होने का खतरा
जिला नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि लंबे समय तक अगर शुगर कंट्रोल नहीं रहती है तो मरीजों को किडनी खराब होने का खतरा रहता है। युवाओं में कामकाज की बढ़ती टेंशन, नींद का अभाव, खानपान में जागरूकता की कमी से मोटापा की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इससे कम उम्र में ही हाइपरटेंशन और मधुमेह की बीमारी देखने के लिए में आ रही है। इन बीमारियों के कारण किडनी पर बुरा असर पड़ता है। डायबिटीज किडनी के खराब होने का सबसे बड़ा कारण माना गया है।
शुरुआती लक्षणों की पहचान
- आंखों के नीचे चेहरे पर सूजन आना, अत्यधिक थकान महसूस होना, भूख न लगना, बार-बार उल्टी आने की आशंका रहना, ज्यादा शुगर होने पर शरीर में खून की कमी होना, हाथ व पैरों में भी सूजन आना
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यह है जरूरी
फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि हर व्यक्ति को शुगर लेवल अवश्य जांचना चाहिए। साथ ही हर तीन माह में एचबीएवनसी जांच करानी चाहिए। एचबीएवनसी टेस्ट के जरिए पिछले तीन महीने का औसत ब्लड ग्लूकोज लेवल पता चल जाता है।
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डायलिसिस केंद्र में रोजाना गुर्दे के मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। जिला अस्पताल में 95 मरीज डायलिसिस कराने पहुंच रहे हैं। हरियाणा के रहने वाले सभी मरीजों की मुफ्त डायलिसिस की जा रही है। -डाॅ. ज्योत्सना, सिविल सर्जन
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खानपुर कलां स्थित भगत फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज में सात बिस्तरों के इस केंद्र में हर महीने 150 मरीज डायलिसिस कराने पहुंच रहे हैं।अक्तूबर 2024 में मुख्यमंत्री नायब सैनी की घोषणा के बाद किडनी के मरीजों की निशुल्क डायलिसिस की जा रही है।
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दोनों केंद्रों पर सामान्य गुर्दा रोगी, हेपेटाइटिस-सी और बी से संबंधित मरीजों की डायलिसिस की जाती है। पहले सरकार की तरफ से बीपीएल, एससी-एसटी वर्ग, हरियाणा सरकार के कर्मियों, दिव्यांगों का निशुल्क डायलिसिस किया जाता था।
इसके अलावा आयुष्मान योजना के तहत भी डायलिसिस मुफ्त में की जा रही थी। सरकार ने करीब डेढ़ साल पहले आरक्षित वर्ग की औपचारिकता को खत्म कर दिया है।
डायलिसिस सत्र में कम से कम 130 लीटर आरओ पानी की आवश्यकता
एक मरीज के डायलिसिस में कम से कम 130 लीटर आरओ पानी की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। डायलिसिस के लिए पहले मरीजों को पंजीकरण कर नंबर लेना पड़ता है क्योंकि बेड की संख्या सीमित है। जिन मरीजों की दोनों किडनी खराब हो गई हैं उनको क्रिएटिनिन स्तर के आधार पर सप्ताह में दो या तीन बार डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में आवश्यक दवाएं भी निशुल्क दी जाती हैं। प्रशिक्षित स्टाफ मरीजों की देखभाल में तैनात रहता है। जिला अस्पताल में वर्ष 2024-25 के दौरान 11586 डायलिसिस सत्र हुए थे। वहीं वर्ष 2025 से 10 फरवरी 2026 तक 9519 डायलिसिस सत्र हुए हैं।
शुगर नियंत्रण में नहीं तो किडनी खराब होने का खतरा
जिला नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि लंबे समय तक अगर शुगर कंट्रोल नहीं रहती है तो मरीजों को किडनी खराब होने का खतरा रहता है। युवाओं में कामकाज की बढ़ती टेंशन, नींद का अभाव, खानपान में जागरूकता की कमी से मोटापा की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इससे कम उम्र में ही हाइपरटेंशन और मधुमेह की बीमारी देखने के लिए में आ रही है। इन बीमारियों के कारण किडनी पर बुरा असर पड़ता है। डायबिटीज किडनी के खराब होने का सबसे बड़ा कारण माना गया है।
शुरुआती लक्षणों की पहचान
- आंखों के नीचे चेहरे पर सूजन आना, अत्यधिक थकान महसूस होना, भूख न लगना, बार-बार उल्टी आने की आशंका रहना, ज्यादा शुगर होने पर शरीर में खून की कमी होना, हाथ व पैरों में भी सूजन आना
यह है जरूरी
फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि हर व्यक्ति को शुगर लेवल अवश्य जांचना चाहिए। साथ ही हर तीन माह में एचबीएवनसी जांच करानी चाहिए। एचबीएवनसी टेस्ट के जरिए पिछले तीन महीने का औसत ब्लड ग्लूकोज लेवल पता चल जाता है।
डायलिसिस केंद्र में रोजाना गुर्दे के मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। जिला अस्पताल में 95 मरीज डायलिसिस कराने पहुंच रहे हैं। हरियाणा के रहने वाले सभी मरीजों की मुफ्त डायलिसिस की जा रही है। -डाॅ. ज्योत्सना, सिविल सर्जन