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Yamuna Nagar News: पार्षदों की एनओसी के बाद होगा एजेंसियों को भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 24 Jun 2026 01:08 AM IST
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यमुनानगर शहर में नाले की सफाई करती जेसीबी। संवाद
- फोटो : samvad
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम क्षेत्र में नालों की सफाई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। अब शहर में नालों की सफाई करने वाली एजेंसी का भुगातन संबंधित वार्ड के पार्षद की संतुष्टि और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के बिना नहीं हो सकेगी। इस व्यवस्था के लागू होने से सफाई कार्यों में होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लग सकेगी।
वहीं इस व्यवस्था से पार्षद की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। जलभराव होने पर कोई पार्षद यह नहीं कह पाएगा की नालों की सफाई ठीक से नहीं की गई। क्योंकि एनओसी उन्होंने ही दी थी। नगर निगम क्षेत्र में छोटे और बड़े नालों की सफाई का कार्य अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से कराया जाता है।
लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई स्थानों पर एजेंसियां केवल औपचारिकता निभाकर सफाई कार्य पूरा दिखा देती हैं। इसके चलते नालों में गाद और कचरा जमा रह जाता है, जिससे बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। एजेंसियों को भुगतान तो मिल जाता है और शहरवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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नई व्यवस्था के तहत अब जिस भी वार्ड में एजेंसी नाले की सफाई का कार्य करेगी, उसकी पूर्व सूचना संबंधित पार्षद को देनी होगी। इससे पार्षद कार्य की निगरानी कर सकेंगे और यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि सफाई कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
सफाई कार्य पूरा होने के बाद एजेंसी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट संबंधित पार्षद को सौंपनी होगी। रिपोर्ट में किए गए कार्य का विवरण, साफ किए गए नालों की जानकारी और अन्य आवश्यक तथ्य शामिल होंगे। पार्षद मौके का निरीक्षण कर कार्य की गुणवत्ता का आकलन करेंगे और संतुष्ट होने पर अपनी रिपोर्ट नगर निगम को भेजेंगे।
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब एजेंसियों के बिल केवल कागजी कार्रवाई के आधार पर पास नहीं होंगे। संबंधित पार्षद की रिपोर्ट और एनओसी भुगतान प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। यदि किसी वार्ड में सफाई कार्य अधूरा पाया गया या गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं हुआ तो एजेंसी की पेमेंट रोकी जा सकती है। इस निर्णय से एक ओर जहां पार्षदों की जिम्मेदारी बढ़ेगी, वहीं एजेंसियों पर भी बेहतर कार्य करने का दबाव रहेगा। इससे नालों की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा और बरसात के मौसम में जलभराव जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।
पार्षद अपने वार्ड की समस्याओं और जरूरतों से भलीभांति परिचित होते हैं। इस पर उनकी निगरानी और सहमति को प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है, ताकि सफाई कार्यों में पारदर्शिता बढ़े और जनता को वास्तविक लाभ मिल सके। - सुमन बहमनी, मेयर, नगर निगम यमुनागर-जगाधरी।
यमुनानगर। नगर निगम क्षेत्र में नालों की सफाई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। अब शहर में नालों की सफाई करने वाली एजेंसी का भुगातन संबंधित वार्ड के पार्षद की संतुष्टि और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के बिना नहीं हो सकेगी। इस व्यवस्था के लागू होने से सफाई कार्यों में होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लग सकेगी।
वहीं इस व्यवस्था से पार्षद की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। जलभराव होने पर कोई पार्षद यह नहीं कह पाएगा की नालों की सफाई ठीक से नहीं की गई। क्योंकि एनओसी उन्होंने ही दी थी। नगर निगम क्षेत्र में छोटे और बड़े नालों की सफाई का कार्य अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से कराया जाता है।
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लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई स्थानों पर एजेंसियां केवल औपचारिकता निभाकर सफाई कार्य पूरा दिखा देती हैं। इसके चलते नालों में गाद और कचरा जमा रह जाता है, जिससे बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। एजेंसियों को भुगतान तो मिल जाता है और शहरवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नई व्यवस्था के तहत अब जिस भी वार्ड में एजेंसी नाले की सफाई का कार्य करेगी, उसकी पूर्व सूचना संबंधित पार्षद को देनी होगी। इससे पार्षद कार्य की निगरानी कर सकेंगे और यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि सफाई कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं।
सफाई कार्य पूरा होने के बाद एजेंसी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट संबंधित पार्षद को सौंपनी होगी। रिपोर्ट में किए गए कार्य का विवरण, साफ किए गए नालों की जानकारी और अन्य आवश्यक तथ्य शामिल होंगे। पार्षद मौके का निरीक्षण कर कार्य की गुणवत्ता का आकलन करेंगे और संतुष्ट होने पर अपनी रिपोर्ट नगर निगम को भेजेंगे।
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब एजेंसियों के बिल केवल कागजी कार्रवाई के आधार पर पास नहीं होंगे। संबंधित पार्षद की रिपोर्ट और एनओसी भुगतान प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। यदि किसी वार्ड में सफाई कार्य अधूरा पाया गया या गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं हुआ तो एजेंसी की पेमेंट रोकी जा सकती है। इस निर्णय से एक ओर जहां पार्षदों की जिम्मेदारी बढ़ेगी, वहीं एजेंसियों पर भी बेहतर कार्य करने का दबाव रहेगा। इससे नालों की सफाई व्यवस्था में सुधार होगा और बरसात के मौसम में जलभराव जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।
पार्षद अपने वार्ड की समस्याओं और जरूरतों से भलीभांति परिचित होते हैं। इस पर उनकी निगरानी और सहमति को प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है, ताकि सफाई कार्यों में पारदर्शिता बढ़े और जनता को वास्तविक लाभ मिल सके। - सुमन बहमनी, मेयर, नगर निगम यमुनागर-जगाधरी।