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Yamuna Nagar News: रूपनगर कॉलोनी में नौ मकानों पर चला बुलडोजर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 29 Apr 2026 01:26 AM IST
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कार्रवाई के दौरान मौजूद महिला पुलिस कर्मचारी। संवाद
- फोटो : संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। शहर के बाडी माजरा क्षेत्र के रूपनगर कॉलोनी में मंगलवार को प्रशासन की देखरेख में नौ मकानों पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद हुई, जिसमें लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में वादी पक्ष के हक में फैसला सुनाया गया था। मौके पर तहसीलदार, पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों की टीम मौजूद रही।
अधिवक्ता शिवम सोंधी ओर प्रदीप गर्ग ने बताया कि यह मामला वर्ष 1975 से जुड़ा हुआ है, जब वादी पक्ष ने उक्त जमीन खरीदी थी। इसके बाद 1977 से लगातार इस संपत्ति को लेकर अदालत में कानूनी लड़ाई जारी रही।
करीब 49 वर्षों तक चले इस विवाद में अंतत: अदालत ने वादी रविंद्र के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए संपत्ति को वैध रूप से उनके नाम माना। अधिवक्ता सोंधी ने बताया कि अदालत की ओर से 17 अप्रैल 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रियांक गोयल यमुनानगर की अदालत की ओर से जारी किया गया था।
उन्होंने बताया कि कब्जाधारियों को मकान खाली करने के लिए करीब दो महीने का समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी कब्जा नहीं छोड़ा गया, जिसके चलते प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। मंगलवार को सुबह से ही प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। बुलडोजर की मदद से अवैध रूप से बने मकानों को हटाया गया।
इस दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सदर थाना पुलिस बल भी तैनात रहा। स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे न्याय की जीत बताया।
वहीं प्रभावित परिवारों में मायूसी का माहौल नजर आया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अदालत के आदेशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कानून के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
ट्रायल कोर्ट मेें हार के बाद सुप्रीमकोर्ट में मिली जीत
बाड़ी माजरा के जमीन विवाद का मामला वर्ष 1977 में अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद यह लंबी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना रहा। अधिवक्ता सोंधी ने बताया कि शुरुआती दौर में वर्ष 1983 में वादी पक्ष को ट्रायल कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 1987 में सेशन कोर्ट ने मामले में वादी पक्ष के हक में फैसला सुनाया, जिससे केस ने नया मोड़ लिया। आगे चलकर वर्ष 2014 में हाईकोर्ट ने भी वादी पक्ष के पक्ष में निर्णय दिया। इसके बाद विपक्षी पक्ष ने फैसले को चुनौती देते हुए उसी वर्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। करीब छह वर्षों तक चली सुनवाई के बाद वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी वादी रविन्द्र के हक में अंतिम निर्णय सुनाया। इस तरह करीब 49 वर्षों बाद वादी पक्ष को न्याय मिला।
अब बच्चों को कहां ले जाएं
कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों का दर्द भी सामने आया। यहां रह रहे लोगों की आंखें बुलडोजर चलते ही नम हो गईं और उन्होंने विरोध जताया। लोगों ने कहा कि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। अचानक मकान टूटने से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भावुक होकर कहा, हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं, अब उन्हें लेकर कहां जाएं। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने प्रशासन से मोहलत की मांग की। लेकिन अदालत के आदेश के चलते कार्रवाई जारी रही। घटना के बाद प्रभावित परिवारों में मायूसी और चिंता का माहौल है।
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यमुनानगर। शहर के बाडी माजरा क्षेत्र के रूपनगर कॉलोनी में मंगलवार को प्रशासन की देखरेख में नौ मकानों पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद हुई, जिसमें लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में वादी पक्ष के हक में फैसला सुनाया गया था। मौके पर तहसीलदार, पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों की टीम मौजूद रही।
अधिवक्ता शिवम सोंधी ओर प्रदीप गर्ग ने बताया कि यह मामला वर्ष 1975 से जुड़ा हुआ है, जब वादी पक्ष ने उक्त जमीन खरीदी थी। इसके बाद 1977 से लगातार इस संपत्ति को लेकर अदालत में कानूनी लड़ाई जारी रही।
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करीब 49 वर्षों तक चले इस विवाद में अंतत: अदालत ने वादी रविंद्र के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए संपत्ति को वैध रूप से उनके नाम माना। अधिवक्ता सोंधी ने बताया कि अदालत की ओर से 17 अप्रैल 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में यह कार्रवाई की गई। यह आदेश सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रियांक गोयल यमुनानगर की अदालत की ओर से जारी किया गया था।
उन्होंने बताया कि कब्जाधारियों को मकान खाली करने के लिए करीब दो महीने का समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी कब्जा नहीं छोड़ा गया, जिसके चलते प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। मंगलवार को सुबह से ही प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की। बुलडोजर की मदद से अवैध रूप से बने मकानों को हटाया गया।
इस दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सदर थाना पुलिस बल भी तैनात रहा। स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे न्याय की जीत बताया।
वहीं प्रभावित परिवारों में मायूसी का माहौल नजर आया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अदालत के आदेशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कानून के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
ट्रायल कोर्ट मेें हार के बाद सुप्रीमकोर्ट में मिली जीत
बाड़ी माजरा के जमीन विवाद का मामला वर्ष 1977 में अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद यह लंबी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना रहा। अधिवक्ता सोंधी ने बताया कि शुरुआती दौर में वर्ष 1983 में वादी पक्ष को ट्रायल कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 1987 में सेशन कोर्ट ने मामले में वादी पक्ष के हक में फैसला सुनाया, जिससे केस ने नया मोड़ लिया। आगे चलकर वर्ष 2014 में हाईकोर्ट ने भी वादी पक्ष के पक्ष में निर्णय दिया। इसके बाद विपक्षी पक्ष ने फैसले को चुनौती देते हुए उसी वर्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। करीब छह वर्षों तक चली सुनवाई के बाद वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी वादी रविन्द्र के हक में अंतिम निर्णय सुनाया। इस तरह करीब 49 वर्षों बाद वादी पक्ष को न्याय मिला।
अब बच्चों को कहां ले जाएं
कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों का दर्द भी सामने आया। यहां रह रहे लोगों की आंखें बुलडोजर चलते ही नम हो गईं और उन्होंने विरोध जताया। लोगों ने कहा कि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। अचानक मकान टूटने से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भावुक होकर कहा, हमारे छोटे-छोटे बच्चे हैं, अब उन्हें लेकर कहां जाएं। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने प्रशासन से मोहलत की मांग की। लेकिन अदालत के आदेश के चलते कार्रवाई जारी रही। घटना के बाद प्रभावित परिवारों में मायूसी और चिंता का माहौल है।

कार्रवाई के दौरान मौजूद महिला पुलिस कर्मचारी। संवाद- फोटो : संवाद

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