{"_id":"69f10e8be77255a010050acf","slug":"ngt-bans-desilting-of-river-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-155137-2026-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: नदी से गाद निकालने पर एनजीटी की रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: नदी से गाद निकालने पर एनजीटी की रोक
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 29 Apr 2026 01:16 AM IST
विज्ञापन
सोम नदी में उफान आने से मलिकपुर बांगर गांव में पानी में डूबे खेत। आर्काइव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
राजेश कुमार
यमुनानगर। मानसून के दौरान सोम नदी का पानी आसपास के गांवों और खेतों में तबाही न मचाए, इसके लिए सिंचाई विभाग की ओर से पहली बार गाद निकालने (डीसिल्टिंग) की योजना तैयार की थी। इस योजना पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फिलहाल रोक लगा दी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित की गई है।
जिले में सोम नदी की कुल लंबाई करीब 42 किलोमीटर है, जो रणजीतपुर से शुरू होकर कनालसी तक बहती है। नदी के किनारे रणजीतपुर, रामपुर गेंदा, काठगढ़, उत्तमवाला, गार्डवाली, रानीपुर, शेरपुर, बहादरपुर, रामपुर कांबोयान, रामपुर, काट्टरवाली, बनकट, स्वाबड़ी, मालिकपुर बांगर, पिरथीपुर, मुजाफत, बनकट, मानकपुर, चिंतपुर, खानूवाला, भमनौली, लेदी, बसातियांवाला, रूकाली, छौली, तिहमो, छछरौली समेत 50 से अधिक गांव नदी के दोनों तरफ बसे हैं।
इस गांवों में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की बन जाती है। नदी का पानी कई बार किनारों को तोड़कर गांवों और खेतों में घुस जाता है, जिससे लोगों के घरों में रखा सामान खराब हो जाता है। वहीं किसानों की धान, गन्ना और पशु चारे की फसल का नुकसान उठाना पड़ता है।
साल 2012 से सोम नदी के पानी ने मुजाफत, रणजीतपुर, कठगढ़, रामगढ़ सवाई, रामपुर गेंदा, भमनौली, चिंतपुर, खानूवाला, रुकाली, तिहानो, खानूवाला, रुकाली, तिहानो, लोप्यो, मलिकपुर बांगर, बसातियांवाला, छौली समेत अन्य गांवों में नुकसान पहुंचा रहा है। लगातार बाढ़ आने के कारण सोम नदी के बीच में रेत की परत जम चुकी है। कई स्थानों पर तो यह रेत नदी के किनारों के बराबर स्तर तक पहुंच गई है। ऐसे में जैसे ही बारिश के दौरान पानी का स्तर बढ़ता है, नदी किनारों को तोड़ते हुए आसपास के क्षेत्रों में फैल जाती है।
इस पर सिंचाई विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए डीसिल्टिंग की योजना बनाई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि नदी से अतिरिक्त रेत हटा दी जाती है तो आसपास के गांवों को बाढ़ से काफी हद तक राहत मिल सकती थी। साथ ही किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आती।
निविदा में करीब 9.94 करोड़ रुपये रिजर्व प्राइस रखा था। निविदा प्रक्रिया हो चुकी थी, केवल इसे खोलना बाकी थी। परंतु एक एनजीओ की ओर से से एनजीटी में याचिका दायर करते हुए कहा कि इसके लिए सिंचाई विभाग ने पर्यावरण मंजूरी नहीं ली गई। इस पर गाद निकालने की योजना पर आगामी निर्णय तक रोक लगा दी गई है। संवाद
सिंचाई विभाग पूरी तैयारी के साथ अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखेगा। रेत निकालने से न तो पर्यावरण को कोई नुकसान होगा और न ही नदी के प्राकृतिक बहाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इससे बाढ़ पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। मामला एनजीटी में होने के कारण फिलहाल निविदा को खोला नहीं गया है। - राहिल सैनी, एक्सईएन सिंचाई विभाग, डिवीजन जगाधरी डिवीजन
Trending Videos
यमुनानगर। मानसून के दौरान सोम नदी का पानी आसपास के गांवों और खेतों में तबाही न मचाए, इसके लिए सिंचाई विभाग की ओर से पहली बार गाद निकालने (डीसिल्टिंग) की योजना तैयार की थी। इस योजना पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फिलहाल रोक लगा दी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित की गई है।
जिले में सोम नदी की कुल लंबाई करीब 42 किलोमीटर है, जो रणजीतपुर से शुरू होकर कनालसी तक बहती है। नदी के किनारे रणजीतपुर, रामपुर गेंदा, काठगढ़, उत्तमवाला, गार्डवाली, रानीपुर, शेरपुर, बहादरपुर, रामपुर कांबोयान, रामपुर, काट्टरवाली, बनकट, स्वाबड़ी, मालिकपुर बांगर, पिरथीपुर, मुजाफत, बनकट, मानकपुर, चिंतपुर, खानूवाला, भमनौली, लेदी, बसातियांवाला, रूकाली, छौली, तिहमो, छछरौली समेत 50 से अधिक गांव नदी के दोनों तरफ बसे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस गांवों में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की बन जाती है। नदी का पानी कई बार किनारों को तोड़कर गांवों और खेतों में घुस जाता है, जिससे लोगों के घरों में रखा सामान खराब हो जाता है। वहीं किसानों की धान, गन्ना और पशु चारे की फसल का नुकसान उठाना पड़ता है।
साल 2012 से सोम नदी के पानी ने मुजाफत, रणजीतपुर, कठगढ़, रामगढ़ सवाई, रामपुर गेंदा, भमनौली, चिंतपुर, खानूवाला, रुकाली, तिहानो, खानूवाला, रुकाली, तिहानो, लोप्यो, मलिकपुर बांगर, बसातियांवाला, छौली समेत अन्य गांवों में नुकसान पहुंचा रहा है। लगातार बाढ़ आने के कारण सोम नदी के बीच में रेत की परत जम चुकी है। कई स्थानों पर तो यह रेत नदी के किनारों के बराबर स्तर तक पहुंच गई है। ऐसे में जैसे ही बारिश के दौरान पानी का स्तर बढ़ता है, नदी किनारों को तोड़ते हुए आसपास के क्षेत्रों में फैल जाती है।
इस पर सिंचाई विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए डीसिल्टिंग की योजना बनाई थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि नदी से अतिरिक्त रेत हटा दी जाती है तो आसपास के गांवों को बाढ़ से काफी हद तक राहत मिल सकती थी। साथ ही किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आती।
निविदा में करीब 9.94 करोड़ रुपये रिजर्व प्राइस रखा था। निविदा प्रक्रिया हो चुकी थी, केवल इसे खोलना बाकी थी। परंतु एक एनजीओ की ओर से से एनजीटी में याचिका दायर करते हुए कहा कि इसके लिए सिंचाई विभाग ने पर्यावरण मंजूरी नहीं ली गई। इस पर गाद निकालने की योजना पर आगामी निर्णय तक रोक लगा दी गई है। संवाद
सिंचाई विभाग पूरी तैयारी के साथ अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखेगा। रेत निकालने से न तो पर्यावरण को कोई नुकसान होगा और न ही नदी के प्राकृतिक बहाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इससे बाढ़ पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। मामला एनजीटी में होने के कारण फिलहाल निविदा को खोला नहीं गया है। - राहिल सैनी, एक्सईएन सिंचाई विभाग, डिवीजन जगाधरी डिवीजन

सोम नदी में उफान आने से मलिकपुर बांगर गांव में पानी में डूबे खेत। आर्काइव

कमेंट
कमेंट X