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Yamuna Nagar News: मां कात्यायनी की पूजा के लिए मंदिरों में उमड़ी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:40 AM IST
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देवी भवन मंदिर में दीपदान करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : 1
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। नवरात्र की षष्ठी तिथि पर मंगलवार को मां कात्यायनी की पूजा की गई। मां कात्यायनी की पूजा के लिए तड़के ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। कपाट खुलते ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगने लगा। भक्तों में मां की प्रतिमा के सम्मुख शीश नवाया और धूप, दीप, फूल, फल व अन्य सामग्री अर्पित कर विधिवत आराधना की।
इस दौरान मंदिरों से दिनभर माता रानी के जयघोष सुनाई दिए। वहीं सप्तमी तिथि मां सप्तम एवं रौद्र रूप महाकाली की आराधना का दिन है। नवरात्र को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है। मंदिरों को दिनभर भक्तों का तांता लग रहा है। नवरात्र को लेकर मंदिरों को रोज फूलों से सजाया जा रहा है। सुबह-शाम विशेष पूजन व आरती की जा रही है।
मंदिरों में मंगलवार को भी भक्तों की भारी भीड़ रही। इस दौरान भक्तों ने मां कात्यायनी की पूजा की। मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माता टेका और धूप, दीप, पुष्प, फल, नवैद्य, मिष्ठान इत्यादि अर्पित कर पूजा की। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ माता रानी के मंदिर के अलावा प्राचीन, ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिरों में देखने को मिली।
मंदिरों के अलावा घरों, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों पर भी भक्तों ने मां की स्तुति की। जगाधरी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मठ मंदिर, भंभौली स्थित स्वयं-भू महादेव मंदिर, आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर में भारी भीड़ रही।
पंडित रमन वत्स ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सातवां रूप महाकाली है और उन्हें कालरात्रि भी कहा जाता है। स्याह रात्रि के समान माता का स्वरूप काला है। कालरात्रि माता के बाल खुले हुए हैं और गर्दभ की सवारी करती हैं। यह रूप काफी विकराल और भयानक है, लेकिन भक्तों पर करुणा व ममता बरसाने वाला है।
मां काली को शुभकारी भी कहते हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत इनके स्मरण मात्र से ही भाग जाते हैं। यह ग्रह बाधाओं को भी दूर करने वाली देवी हैं। मां कालरात्रि के पूजा से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती हैं। परिवार पर पड़ने वाली विपत्तियां माता रानी दूर करती हैं।
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि सबसे पहले मां काली को हल्दी, चंदन, रोली अक्षत आदि से अर्पित करें। फिर उन्हें गुड़हल या फिर लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। माता रानी को धूप, दीप अर्पित करें। फिर फल, मिठाई, खीर आदि का भोग लगाएं। इसके बाद आरती करें।
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जगाधरी। नवरात्र की षष्ठी तिथि पर मंगलवार को मां कात्यायनी की पूजा की गई। मां कात्यायनी की पूजा के लिए तड़के ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। कपाट खुलते ही मंदिरों में भक्तों का तांता लगने लगा। भक्तों में मां की प्रतिमा के सम्मुख शीश नवाया और धूप, दीप, फूल, फल व अन्य सामग्री अर्पित कर विधिवत आराधना की।
इस दौरान मंदिरों से दिनभर माता रानी के जयघोष सुनाई दिए। वहीं सप्तमी तिथि मां सप्तम एवं रौद्र रूप महाकाली की आराधना का दिन है। नवरात्र को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है। मंदिरों को दिनभर भक्तों का तांता लग रहा है। नवरात्र को लेकर मंदिरों को रोज फूलों से सजाया जा रहा है। सुबह-शाम विशेष पूजन व आरती की जा रही है।
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मंदिरों में मंगलवार को भी भक्तों की भारी भीड़ रही। इस दौरान भक्तों ने मां कात्यायनी की पूजा की। मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां की प्रतिमा के सम्मुख माता टेका और धूप, दीप, पुष्प, फल, नवैद्य, मिष्ठान इत्यादि अर्पित कर पूजा की। इस दौरान सबसे ज्यादा भीड़ माता रानी के मंदिर के अलावा प्राचीन, ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिरों में देखने को मिली।
मंदिरों के अलावा घरों, दुकानों, कार्यालयों व प्रतिष्ठानों पर भी भक्तों ने मां की स्तुति की। जगाधरी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवन मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित श्रीमूर्ति देवी मंदिर, पातालेश्वर महादेव मंदिर, कालेश्वर महादेव मठ मंदिर, भंभौली स्थित स्वयं-भू महादेव मंदिर, आदिबद्री केदारनाथ मंदिर, अमादलपुर स्थित सूर्यकुंड मंदिर में भारी भीड़ रही।
पंडित रमन वत्स ने बताया कि नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सातवां रूप महाकाली है और उन्हें कालरात्रि भी कहा जाता है। स्याह रात्रि के समान माता का स्वरूप काला है। कालरात्रि माता के बाल खुले हुए हैं और गर्दभ की सवारी करती हैं। यह रूप काफी विकराल और भयानक है, लेकिन भक्तों पर करुणा व ममता बरसाने वाला है।
मां काली को शुभकारी भी कहते हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत इनके स्मरण मात्र से ही भाग जाते हैं। यह ग्रह बाधाओं को भी दूर करने वाली देवी हैं। मां कालरात्रि के पूजा से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती हैं। परिवार पर पड़ने वाली विपत्तियां माता रानी दूर करती हैं।
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि सबसे पहले मां काली को हल्दी, चंदन, रोली अक्षत आदि से अर्पित करें। फिर उन्हें गुड़हल या फिर लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। माता रानी को धूप, दीप अर्पित करें। फिर फल, मिठाई, खीर आदि का भोग लगाएं। इसके बाद आरती करें।

देवी भवन मंदिर में दीपदान करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1

देवी भवन मंदिर में दीपदान करते श्रद्धालु। संवाद- फोटो : 1