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Yamuna Nagar News: नाला सफाई करने वाली एजेंसी को गाद के वजन के हिसाब से होगा भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 07 Apr 2026 03:59 AM IST
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यमुनानगर। जगाधरी व यमुनानगर शहर में नाला सफाई के नाम पर अब खानापूर्ति करने वाली एजेंसियों की खैर नहीं है। नगर निगम अधिकारियों ने इस बार हर साल मानसून से पहले औपचारिक सफाई दिखाकर भुगतान लेने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। नई व्यवस्था के तहत एजेंसी को नालों से निकाली गई गाद और गंदगी के वास्तविक वजन के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा। इससे न केवल काम में पारदर्शिता आएगी, बल्कि लापरवाही बरतने वालों पर सीधा असर पड़ेगा।
अब तक देखने में आता था कि नाला सफाई के नाम पर एजेंसियां सीमित काम करके पूरा भुगतान ले लेती थीं। कई जगहों पर नालों की ऊपरी सतह से कचरा हटाकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती थी, जबकि अंदर जमा गाद जस की तस बनी रहती थी। यही वजह रही कि बारिश के दौरान नाले ओवरफ्लो होकर सड़कों और घरों में गंदा पानी भर देते थे। वहीं कॉलोनियों में भी जलभराव हो जाता था।
इस बार निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना वास्तविक सफाई के भुगतान संभव नहीं होगा। नई योजना के तहत नालों की सफाई छह चरणों में कराई जाएगी। यानि नालों की सफाई सालभर होगी। पहले यह काम केवल तीन चरणों में सीमित था, जिससे मानसून के बाद नालों में फिर से गंदगी जमा हो जाती थी। अब सालभर नियमित अंतराल पर सफाई होगी, ताकि जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त बनी रहे।
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159 किलोमीटर है नाले-नालियों की कुल लंबाई:
शहर में तीन बड़े और 340 छोटे नालों की सफाई कराई जानी है। बड़े नालों की लंबाई करीब 25 किलोमीटर और छोटी नालियों की 134 किलोमीटर है। इनकी सफाई पर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसके लिए नगर निगम ने टेंडर लगा रखा है। जो भी एजेंसी टेंडर हासिल करेगी उसे निगम कई नई शर्तों की पालना करनी होगी। इतना ही नहीं सख्ती करते हुए जीआईएस मैपिंग भी शुरू की जाएगी। सभी नालों की मैपिंग कराई गई है, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस स्थान पर कितनी सफाई हुई है। इससे अधिकारियों के लिए निगरानी करना आसान होगा और एजेंसी के दावों की भी जांच की जा सकेगी।
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कई जगह नालों पर अवैध कब्जे:
शहर के बड़े नालों पर कई जगह नालों के ऊपर पक्के निर्माण हो चुके हैं, जिससे मशीनों के जरिए सफाई करना मुश्किल होता है। इसके अलावा अतिक्रमण भी बड़ी बाधा है। पूर्व में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू तो हुई, लेकिन वह कागजों तक ही सीमित रह गई। जगाधरी के गौरी शंकर कॉलोनी, देवी भवन बाजार, सिविल लाइन गांधीधाम, यमुनानगर के प्रोफेसर कॉलोनी, बस स्टैंड के आसपास के इलाके बारिश के दिनों में प्रभावित होते हैं। नगर निगम हाउस की बैठकों में भी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। पार्षद विक्रम राणा, प्रियांक शर्मा व जयंत स्वामी समेत अन्य कई बार अपने-अपने वार्डों में नालों की अधूरी सफाई की शिकायत कर चुके हैं। संवाद
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वर्जन:
नालों की सफाई का जो भी एजेंसी कार्य करेगी उन्हें लापरवाही बरतने का मौका नहीं दिया जाएगा। गाद के वजन के आधार पर भुगतान, जीआईएस निगरानी और छह चरणों में सफाई जैसे कदम उठाए गए हैं। काम केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई देगा। इससे मानसून में जलभराव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- सुमन बहमनी, मेयर, नगर निगम।
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अब तक देखने में आता था कि नाला सफाई के नाम पर एजेंसियां सीमित काम करके पूरा भुगतान ले लेती थीं। कई जगहों पर नालों की ऊपरी सतह से कचरा हटाकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती थी, जबकि अंदर जमा गाद जस की तस बनी रहती थी। यही वजह रही कि बारिश के दौरान नाले ओवरफ्लो होकर सड़कों और घरों में गंदा पानी भर देते थे। वहीं कॉलोनियों में भी जलभराव हो जाता था।
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इस बार निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना वास्तविक सफाई के भुगतान संभव नहीं होगा। नई योजना के तहत नालों की सफाई छह चरणों में कराई जाएगी। यानि नालों की सफाई सालभर होगी। पहले यह काम केवल तीन चरणों में सीमित था, जिससे मानसून के बाद नालों में फिर से गंदगी जमा हो जाती थी। अब सालभर नियमित अंतराल पर सफाई होगी, ताकि जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त बनी रहे।
159 किलोमीटर है नाले-नालियों की कुल लंबाई:
शहर में तीन बड़े और 340 छोटे नालों की सफाई कराई जानी है। बड़े नालों की लंबाई करीब 25 किलोमीटर और छोटी नालियों की 134 किलोमीटर है। इनकी सफाई पर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसके लिए नगर निगम ने टेंडर लगा रखा है। जो भी एजेंसी टेंडर हासिल करेगी उसे निगम कई नई शर्तों की पालना करनी होगी। इतना ही नहीं सख्ती करते हुए जीआईएस मैपिंग भी शुरू की जाएगी। सभी नालों की मैपिंग कराई गई है, जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस स्थान पर कितनी सफाई हुई है। इससे अधिकारियों के लिए निगरानी करना आसान होगा और एजेंसी के दावों की भी जांच की जा सकेगी।
कई जगह नालों पर अवैध कब्जे:
शहर के बड़े नालों पर कई जगह नालों के ऊपर पक्के निर्माण हो चुके हैं, जिससे मशीनों के जरिए सफाई करना मुश्किल होता है। इसके अलावा अतिक्रमण भी बड़ी बाधा है। पूर्व में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू तो हुई, लेकिन वह कागजों तक ही सीमित रह गई। जगाधरी के गौरी शंकर कॉलोनी, देवी भवन बाजार, सिविल लाइन गांधीधाम, यमुनानगर के प्रोफेसर कॉलोनी, बस स्टैंड के आसपास के इलाके बारिश के दिनों में प्रभावित होते हैं। नगर निगम हाउस की बैठकों में भी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। पार्षद विक्रम राणा, प्रियांक शर्मा व जयंत स्वामी समेत अन्य कई बार अपने-अपने वार्डों में नालों की अधूरी सफाई की शिकायत कर चुके हैं। संवाद
वर्जन:
नालों की सफाई का जो भी एजेंसी कार्य करेगी उन्हें लापरवाही बरतने का मौका नहीं दिया जाएगा। गाद के वजन के आधार पर भुगतान, जीआईएस निगरानी और छह चरणों में सफाई जैसे कदम उठाए गए हैं। काम केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई देगा। इससे मानसून में जलभराव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
- सुमन बहमनी, मेयर, नगर निगम।