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Yamuna Nagar News: जीवन शैली में बदलाव से बढ़ रहीं बीमारियां
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 07 Apr 2026 03:52 AM IST
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जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में पर्ची बनवाने के लिए लगी भीड़। संवाद
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यमुनानगर। समय के साथ जीवनशैली में हो रहे बदलाव और खान-पान से बीमारियां बढ़ रही हैं। बीमार लोगों को स्वस्थ रखने का जिम्मा डॉक्टरों पर है। वहीं जिले में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैंं। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। जिले में डॉक्टरों के करीब 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा और उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में डॉक्टरों के कुल 192 स्वीकृत पद हैं इनमें से केवल 99 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 93 पद अब भी खाली हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि जिले में सिविल सर्जन का पद भी लंबे समय से रिक्त है। फिलहाल जिला अस्पताल के पीएमओ के पास ही सिविल सर्जन का अतिरिक्त कार्यभार है।
इसके अलावा डिप्टी सिविल सर्जन के आठ पदों में से पांच भरे हैं, जबकि डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट के चार पदों में से केवल एक ही पद पर नियुक्ति है। एसएमओ के 17 पदों में से नौ पद खाली पड़े हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ सीमित डॉक्टरों पर आ गया है, जिससे काम का दबाव बढ़ रहा है। डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में लंबी कतारें लग रही हैं और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार डॉक्टरों को डेपुटेशन पर एक स्थान से दूसरे स्थान भेजा जाता है, जिससे सेवाएं और प्रभावित होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुंच बेहद सीमित है।
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लोगों को जकड़ रही हैं बीमारियां:
वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिसंबर 2022 से चार अप्रैल 2026 तक की गई जांच में सामने आया है कि जिले में बीमारियों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। कुल 37,765 लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मिले। इनमें 7,651 लोग खून की कमी (एनीमिया) से ग्रस्त पाए गए। 609 बच्चे कुपोषित और 56 बच्चे कम वजन के मिले। इसके अलावा 3,244 लोग मधुमेह (शुगर) और 4,285 लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित पाए गए। गंभीर बीमारियों के मामलों में 15 टीबी, 10 कैंसर और 47 हार्ट अटैक के मरीज सामने आए हैं। वहीं 21,848 लोग अन्य बीमारियों से ग्रस्त मिले। गंभीर स्थिति को देखते हुए 12 मरीजों को उच्च संस्थानों में रेफर भी किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि एक ओर जहां स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हैं, वहीं दूसरी ओर लोग भी अपने स्वास्थ्य के लिए सजग नहीं हैं।
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बीमारियां खराब जीवनशैली का परिणाम : रिमा बेरी
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की आहार विशेषज्ञ डॉ. रिमा बेरी का कहना है कि कई बीमारियां खराब जीवनशैली का परिणाम हैं। यदि लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करें तो बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना बेहद जरूरी है। इसके अलावा जंक फूड से दूरी बनाना, ताजा फल-सब्जियों का सेवन करना और मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग व ध्यान अपनाना भी लाभकारी है। बच्चों में कुपोषण रोकने के लिए अभिभावकों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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वर्जन:
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जहां डॉक्टरों की नियुक्ति जरूरी है, वहीं आम लोगों को भी अपनी सेहत के प्रति जिम्मेदार बनना होगा। तभी एक स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार हो सकेगी। सरकार डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
- डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।
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इसके अलावा डिप्टी सिविल सर्जन के आठ पदों में से पांच भरे हैं, जबकि डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट के चार पदों में से केवल एक ही पद पर नियुक्ति है। एसएमओ के 17 पदों में से नौ पद खाली पड़े हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ सीमित डॉक्टरों पर आ गया है, जिससे काम का दबाव बढ़ रहा है। डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। अस्पतालों में लंबी कतारें लग रही हैं और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार डॉक्टरों को डेपुटेशन पर एक स्थान से दूसरे स्थान भेजा जाता है, जिससे सेवाएं और प्रभावित होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुंच बेहद सीमित है।
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लोगों को जकड़ रही हैं बीमारियां:
वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिसंबर 2022 से चार अप्रैल 2026 तक की गई जांच में सामने आया है कि जिले में बीमारियों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। कुल 37,765 लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मिले। इनमें 7,651 लोग खून की कमी (एनीमिया) से ग्रस्त पाए गए। 609 बच्चे कुपोषित और 56 बच्चे कम वजन के मिले। इसके अलावा 3,244 लोग मधुमेह (शुगर) और 4,285 लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित पाए गए। गंभीर बीमारियों के मामलों में 15 टीबी, 10 कैंसर और 47 हार्ट अटैक के मरीज सामने आए हैं। वहीं 21,848 लोग अन्य बीमारियों से ग्रस्त मिले। गंभीर स्थिति को देखते हुए 12 मरीजों को उच्च संस्थानों में रेफर भी किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि एक ओर जहां स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर हैं, वहीं दूसरी ओर लोग भी अपने स्वास्थ्य के लिए सजग नहीं हैं।
बीमारियां खराब जीवनशैली का परिणाम : रिमा बेरी
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की आहार विशेषज्ञ डॉ. रिमा बेरी का कहना है कि कई बीमारियां खराब जीवनशैली का परिणाम हैं। यदि लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करें तो बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना बेहद जरूरी है। इसके अलावा जंक फूड से दूरी बनाना, ताजा फल-सब्जियों का सेवन करना और मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग व ध्यान अपनाना भी लाभकारी है। बच्चों में कुपोषण रोकने के लिए अभिभावकों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
वर्जन:
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जहां डॉक्टरों की नियुक्ति जरूरी है, वहीं आम लोगों को भी अपनी सेहत के प्रति जिम्मेदार बनना होगा। तभी एक स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार हो सकेगी। सरकार डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
- डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।