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सिलिंडर का संकट : स्कूल में चूल्हे पर बनाया जा रहा मिड-डे मील
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:25 AM IST
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स्कूल में मिड-डे-मील तैयार करतीं कर्मचारी। आर्काइव
- फोटो : 1
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। गैस सिलिंडर न होने पर भी विद्यालयों में मिड-डे-मील नहीं रोका जाएगा। निदेशालय ने आदेश दिए हैं कि यदि एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है तो लकड़ी से खाना पकाया जाएगा। इसके लिए कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया है। वहीं इसे लेकर स्कूल मुखियाओं को भी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं जारी किए गए हैं।
निदेशालय का यह आदेश मिड-डे-मील ने वर्कर्स के लिए मुसीबत बना गया। लकड़ी खरीदने के लिए कोई बजट नहीं है। कुकिंग कोस्ट में सिलिंडर का बजट है। इसके अलावा राशन व अन्य सामग्री का बजट है। यदि इसमें से लकड़ी पर खर्च किया जाता है तो दूसरी वस्तुओं के लिए पैसे कम हो जाएंगे और बजट बिगड़ जाएगा। गैस किल्लत के बाद लकड़ी के दाम में इजाफा हुआ है।
मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन प्रधान शरबती देवी ने बताया कि इन दिनों बाजार में लकड़ी की कीमत 25 से 30 रुपये प्रति किलो है। इस दौरान 50 बच्चों का खाना बनाने में दस किलोग्राम से ज्यादा लकड़ी लगेगी।
उन्होंने बताया कि इसे लेकर सोमवार को निदेशक से यूनियन के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी, जिसमें मील तैयार करने को लेकर चर्चा की गई थी। परंतु इस दौरान लकड़ी के लिए बजट को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया है। इससे उनके सामने बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है।
वहीं जिले में कुल 805 प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें कुल 592 और 213 माध्यमिक विद्यालय हैं। इन्हीं में शिक्षा विभाग की ओर से बाल वाटिका भी चलाई जा रही है। इन विद्यालयों के करीब 68,000 विद्यार्थियों को मिड-डे-मील दिया जाता है। जिले की बाल वाटिकाओं में करीब 3,500 बच्चे हैं। वहीं, प्राथमिक पाठशाला में करीब 41,800 बच्चे पढ़ रहे हैं और छठी से आठवीं में करीब 21,200 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
निदेशालय ने गैस न होने पर लकड़ी से खाना बनाने के आदेश जारी किए हैं। यदि कहीं बजट की कमी होगी तो उसे स्कूल के फंड से बैलेंस किया जाएगा। इसके लिए एसएमसी प्रस्ताव दे सकती है। स्कूलों को इसका अधिकार दिया जाएगा। - अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। गैस सिलिंडर न होने पर भी विद्यालयों में मिड-डे-मील नहीं रोका जाएगा। निदेशालय ने आदेश दिए हैं कि यदि एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है तो लकड़ी से खाना पकाया जाएगा। इसके लिए कोई अतिरिक्त बजट नहीं दिया है। वहीं इसे लेकर स्कूल मुखियाओं को भी कोई स्पष्ट निर्देश नहीं जारी किए गए हैं।
निदेशालय का यह आदेश मिड-डे-मील ने वर्कर्स के लिए मुसीबत बना गया। लकड़ी खरीदने के लिए कोई बजट नहीं है। कुकिंग कोस्ट में सिलिंडर का बजट है। इसके अलावा राशन व अन्य सामग्री का बजट है। यदि इसमें से लकड़ी पर खर्च किया जाता है तो दूसरी वस्तुओं के लिए पैसे कम हो जाएंगे और बजट बिगड़ जाएगा। गैस किल्लत के बाद लकड़ी के दाम में इजाफा हुआ है।
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मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन प्रधान शरबती देवी ने बताया कि इन दिनों बाजार में लकड़ी की कीमत 25 से 30 रुपये प्रति किलो है। इस दौरान 50 बच्चों का खाना बनाने में दस किलोग्राम से ज्यादा लकड़ी लगेगी।
उन्होंने बताया कि इसे लेकर सोमवार को निदेशक से यूनियन के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी, जिसमें मील तैयार करने को लेकर चर्चा की गई थी। परंतु इस दौरान लकड़ी के लिए बजट को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया है। इससे उनके सामने बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है।
वहीं जिले में कुल 805 प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें कुल 592 और 213 माध्यमिक विद्यालय हैं। इन्हीं में शिक्षा विभाग की ओर से बाल वाटिका भी चलाई जा रही है। इन विद्यालयों के करीब 68,000 विद्यार्थियों को मिड-डे-मील दिया जाता है। जिले की बाल वाटिकाओं में करीब 3,500 बच्चे हैं। वहीं, प्राथमिक पाठशाला में करीब 41,800 बच्चे पढ़ रहे हैं और छठी से आठवीं में करीब 21,200 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।
निदेशालय ने गैस न होने पर लकड़ी से खाना बनाने के आदेश जारी किए हैं। यदि कहीं बजट की कमी होगी तो उसे स्कूल के फंड से बैलेंस किया जाएगा। इसके लिए एसएमसी प्रस्ताव दे सकती है। स्कूलों को इसका अधिकार दिया जाएगा। - अशोक राणा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।

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