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Yamuna Nagar News: पहले वेंडिंग जोन पर खर्च किए करोड़ों, अब ढूंढ रहे एजेंसी
Thu, 02 Jul 2026 04:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 02 Jul 2026 04:00 AM IST
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सैक्टर-17 में खाली पड़ा वेंडिंग जोन। संवाद
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यमुनानगर। स्ट्रीट वेंडरों को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से नगर निगम की ओर से शुरू की गई वेंडिंग जोन योजना अब निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। वेंडिंग जोन योजना बिना ठोस प्लानिंग के शुरू किया गया प्रोजेक्ट बनकर रह गया है। पहले करीब सवा करोड़ रुपये खर्च कर शहर में वेंडिंग जोन तैयार कर दिए गए, लेकिन इन्हें संचालित करने की व्यवस्था और स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास की योजना बाद में बनाई गई। अब तीन साल बाद अधिकारियों को एजेंसी नियुक्त करने की जरूरत महसूस हो रही है, लेकिन यह प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप वेंडिंग जोन खाली पड़े हैं और रेहड़ियां पहले की तरह सड़कों पर लग रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वेंडिंग जोन बनाए जा रहे थे, तब उनकी संचालन व्यवस्था, सर्वे और स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास की ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई। यदि शुरुआत में ही एजेंसी नियुक्त कर जमीनी स्थिति का आकलन कराया जाता तो लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना के विफल होने की नौबत नहीं आती। अब वेंडिंग जोन तैयार होने के वर्षों बाद एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है, लेकिन यह भी फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाई है। रखरखाव के अभाव में अधिकांश वेंडिंग जोन बदहाल हो चुके हैं। इनमें लगाए गए शेड क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पीने के पानी के लिए लगाए गए नल या तो चोरी हो चुके हैं या फिर तोड़ दिए गए हैं। कई स्थानों पर नलों से दिनभर पानी व्यर्थ बहता रहता है, जिससे निगम की लापरवाही के साथ-साथ सरकारी संसाधनों की बर्बादी भी साफ दिखाई देती है। समय पर रखरखाव नहीं होने से ये वेंडिंग जोन धीरे-धीरे जर्जर होते जा रहे हैं। शहर के बीच मॉडल टाउन स्थित वेयरहाउस गोदाम के पास बनाया गया वेंडिंग जोन भी आज तक आबाद नहीं हो सका।
वेंडिंग जोन बनने के बाद निगम अधिकारियों ने गुरुग्राम और पंचकूला मॉडल की तर्ज पर नए सिरे से योजना तैयार की। इसके तहत एक एजेंसी को पूरे शहर का सर्वे कर यह तय करना था कि किन-किन स्थानों पर रेहड़ियां लगती हैं और किस क्षेत्र में वेंडिंग जोन विकसित किया जाए। एजेंसी को रेहड़ियों का डिजाइन तय करने, वेंडिंग जोन में सुविधाएं विकसित करने और पूरे संचालन की जिम्मेदारी भी दी जानी थी। हालांकि एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। नगर निगम ने बीच-बीच में रेहड़ियों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के प्रयास भी किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। जो रेहड़ी संचालक वेंडिंग जोन में गए, वे दो-तीन दिन बाद फिर सड़कों पर लौट आए।
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2021 में बनने शुरू हुए थे वेंडिंग जोन:
नगर निगम ने जगाधरी के गणेश मार्केट सेक्टर-17 में करीब 80 लाख रुपये की लागत से 196 बूथ बनाए। इसके अलावा प्रकाश चौक में 44 बूथ और मॉडल टाउन क्षेत्र में करीब 30 लाख रुपये खर्च कर 96 बूथों का निर्माण किया गया। लेकिन योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। अभी भी रेहड़ियां शहर की सड़कों पर खड़ी रहती हैं। जिनसे सारा दिन जाम लगा रहता है। प्रारंभिक सर्वे में नगर निगम क्षेत्र में 15,613 स्ट्रीट वेंडरों की पहचान की थी। इनमें 3,895 फल-सब्जी विक्रेता हैं और 1,700 से अधिक फास्ट फूड व अन्य सामान बेचते हैं। पीएम स्वनिधि योजना के तहत 10,690 वेंडर लोन भी ले चुके हैं।
वर्जन:
वेंडिंग जोन को गुरुग्राम की तर्ज पर बसाने के लिए एजेंसी हायर की जानी है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सभी रेहड़ियों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
-महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वेंडिंग जोन बनाए जा रहे थे, तब उनकी संचालन व्यवस्था, सर्वे और स्ट्रीट वेंडरों के पुनर्वास की ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई। यदि शुरुआत में ही एजेंसी नियुक्त कर जमीनी स्थिति का आकलन कराया जाता तो लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना के विफल होने की नौबत नहीं आती। अब वेंडिंग जोन तैयार होने के वर्षों बाद एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है, लेकिन यह भी फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाई है। रखरखाव के अभाव में अधिकांश वेंडिंग जोन बदहाल हो चुके हैं। इनमें लगाए गए शेड क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पीने के पानी के लिए लगाए गए नल या तो चोरी हो चुके हैं या फिर तोड़ दिए गए हैं। कई स्थानों पर नलों से दिनभर पानी व्यर्थ बहता रहता है, जिससे निगम की लापरवाही के साथ-साथ सरकारी संसाधनों की बर्बादी भी साफ दिखाई देती है। समय पर रखरखाव नहीं होने से ये वेंडिंग जोन धीरे-धीरे जर्जर होते जा रहे हैं। शहर के बीच मॉडल टाउन स्थित वेयरहाउस गोदाम के पास बनाया गया वेंडिंग जोन भी आज तक आबाद नहीं हो सका।
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वेंडिंग जोन बनने के बाद निगम अधिकारियों ने गुरुग्राम और पंचकूला मॉडल की तर्ज पर नए सिरे से योजना तैयार की। इसके तहत एक एजेंसी को पूरे शहर का सर्वे कर यह तय करना था कि किन-किन स्थानों पर रेहड़ियां लगती हैं और किस क्षेत्र में वेंडिंग जोन विकसित किया जाए। एजेंसी को रेहड़ियों का डिजाइन तय करने, वेंडिंग जोन में सुविधाएं विकसित करने और पूरे संचालन की जिम्मेदारी भी दी जानी थी। हालांकि एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। नगर निगम ने बीच-बीच में रेहड़ियों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के प्रयास भी किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। जो रेहड़ी संचालक वेंडिंग जोन में गए, वे दो-तीन दिन बाद फिर सड़कों पर लौट आए।
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2021 में बनने शुरू हुए थे वेंडिंग जोन:
नगर निगम ने जगाधरी के गणेश मार्केट सेक्टर-17 में करीब 80 लाख रुपये की लागत से 196 बूथ बनाए। इसके अलावा प्रकाश चौक में 44 बूथ और मॉडल टाउन क्षेत्र में करीब 30 लाख रुपये खर्च कर 96 बूथों का निर्माण किया गया। लेकिन योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। अभी भी रेहड़ियां शहर की सड़कों पर खड़ी रहती हैं। जिनसे सारा दिन जाम लगा रहता है। प्रारंभिक सर्वे में नगर निगम क्षेत्र में 15,613 स्ट्रीट वेंडरों की पहचान की थी। इनमें 3,895 फल-सब्जी विक्रेता हैं और 1,700 से अधिक फास्ट फूड व अन्य सामान बेचते हैं। पीएम स्वनिधि योजना के तहत 10,690 वेंडर लोन भी ले चुके हैं।
वर्जन:
वेंडिंग जोन को गुरुग्राम की तर्ज पर बसाने के लिए एजेंसी हायर की जानी है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सभी रेहड़ियों को वेंडिंग जोन में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
-महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।

सैक्टर-17 में खाली पड़ा वेंडिंग जोन। संवाद