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Yamuna Nagar News: मुख्यालय से मिलरों को समय नहीं मिला तो शुरू होगी कानूनी कार्रवाई

Thu, 02 Jul 2026 03:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 02 Jul 2026 03:55 AM IST
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If the millers do not get time from the headquarters, legal action will be initiated.
जगाधरी। धान कुटाई का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी मिलरों ने सरकार का चावल वापस नहीं किया है। वहीं, अभी तक विभाग की ओर से मिलरों को अतिरिक्त समय देने को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। यदि मिलरों को समय नहीं मिलता है तो विभाग की ओर से जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। फिलहाल अधिकारियों व मिलरों की नजर निदेशालय के आदेशों पर है। वहीं, मिलरों ने चावल लौटने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की है।
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विभाग की ओर से मिलरों को 30 जून तक चावल लौटने का समय दिया था। अभी तक मिलरों को दिए कुल धान का 80 प्रतिशत चावल ही बचा है, जबकि 20 प्रतिशत मिलरों के पास पड़ा है। इसी का पता लगाने के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय की ओर से टीम भेजकर मिलरों की भौतिकी जांच करवाई गई थी। यह जांच इसलिए करवाई गई है कि मिलरों के पास पड़े स्टॉक की जानकारी मिल सके, ताकि मुख्यालय कितना समय देना है इसकी नीति बना सके। फिलहाल मुख्यालय की ओर से समय बढ़ाने को लेकर कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की है। वहीं, समय न मिलने से मिलर परेशान हैं। यदि मिलरों को समय नहीं मिलता है तो उनकी परेशानियां काफी बढ़ सकती हैं।बता दें कि सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) योजना के तहत राइस मिलरों को 30 जून तक धान की कुटाई के बाद पूरा चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को लौटाना था, लेकिन जिले के अधिकांश राइस मिलर निर्धारित समय सीमा तक लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए। अब तक करीब 80 प्रतिशत चावल ही एफसीआई को लौटाया गया है। ऐसे में सरकार ने जिले की राइस मिलों में धान और चावल के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करवाया है। राइस मिलरों का तर्क है कि एफसीआई के गोदामों में पर्याप्त जगह न होने के कारण वे पूरा चावल जमा नहीं करवा सके हैं। इसी आधार पर मिलर सरकार से समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, पिछले वर्ष सामने आए चावल घोटाले के बाद सरकार इस बार कोई जोखिम लेना नहीं चाहती है।यही कारण है कि चावल वापसी की समय सीमा बढ़ाने से पहले मिलों में उपलब्ध धान और चावल का वास्तविक सत्यापन किया गया है। जिले में करीब 185 राइस मिल हैं, जिन्हें सरकार की ओर से धान कुटाई के लिए आवंटित किया गया था। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मिलों में कितना धान और चावल शेष है तथा समय सीमा बढ़ाने की मांग कितनी उचित है।
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खाद्यापूर्ति एवं नियंत्रक नीतिश सिंगला ने कहा कि टीम की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अभी 20 प्रतिशत चावल आना बाकी है। मुख्यालय के आदेशों पर इस पर कार्रवाई होगी। संवाद
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