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Yamuna Nagar News: बारिश, ओलावृष्टि से बढ़ी किसानों की चिंता, गेहूं की कटाई में आई तेजी
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 07 Apr 2026 03:45 AM IST
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जगाधरी अनाज मंडी में कांटे पर तौलाई के लिए खड़ी ट्राली। संवाद
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यमुनानगर। जिले में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश और रविवार शाम छछरौली क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में बदलाव के कारण किसान अपनी गेहूं की फसल को सुरक्षित रखने के लिए तेजी से कटाई में जुट गए हैं।
स्थिति यह है कि कई किसान अधपकी और अधिक नमी वाली फसल तक काटने को मजबूर हो गए हैं, ताकि संभावित नुकसान से बचा जा सके। अभी तक अनाज मंडियों में 7814 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है जिसमें से 1872 एमटी गेहूं खरीदा गया है।
मंडियों की सड़कों और खुले स्थानों पर चारों ओर गेहूं ही फैला हुआ है। मौसम खराब होने की आशंका के चलते किसान बिना पूरी तरह सुखाए गेहूं मंडियों में लेकर पहुंच रहे हैं। जल्दबाजी में काटी गई फसल में नमी की मात्रा 13 से 17 प्रतिशत तक पाई जा रही है, जो निर्धारित 12 प्रतिशत मानक से अधिक है। वहीं अनाज मंडी जगाधरी में सोमवार को आढ़ती एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मुनीष कांबोज की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में आढ़तियों ने किसानों से अपील की कि वे गेहूं की कटाई में जल्दबाजी न करें और फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडियों में लाएं। इसके लिए किसानों के मोबाइल फोन पर संदेश भी भेजे गए हैं, ताकि उन्हें जागरूक किया जा सके।
आढ़तियों का कहना है कि अधिक नमी वाली गेहूं लाने से किसानों को न केवल कम कीमत मिलती है, बल्कि उन्हें अतिरिक्त लेबर चार्ज भी देना पड़ता है। ऐसे में यदि किसान थोड़ी सावधानी बरतें और सूखी फसल लेकर आएं, तो उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।
दूसरी ओर, मंडियों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की धीमी गति भी किसानों और आढ़तियों की परेशानी का कारण बन रही है। आढ़तियों ने कहा कि बायोमीट्रिक प्रणाली के तहत किसानों के फिंगरप्रिंट स्कैन में दिक्कतें आ रही हैं, जिससे गेट पास और खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है।
कई मामलों में किसानों के फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो पा रहे, जिसके चलते उन्हें बार-बार आढ़तियों के पास भेजा जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को अपने तीन नॉमिनी पोर्टल पर दर्ज कराने होते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में समय अधिक लग रहा है। खरीद का सीजन होने के कारण आढ़तियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और उन्हें बार-बार पोर्टल पर जानकारी अपडेट करनी पड़ रही है।
इससे किसानों को भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उठान शुरू न होने से मंडियों में गेहूं का स्टॉक बढ़ता जा रहा है, जिससे जगह की कमी महसूस होने लगी है। संवाद
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स्थिति यह है कि कई किसान अधपकी और अधिक नमी वाली फसल तक काटने को मजबूर हो गए हैं, ताकि संभावित नुकसान से बचा जा सके। अभी तक अनाज मंडियों में 7814 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है जिसमें से 1872 एमटी गेहूं खरीदा गया है।
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मंडियों की सड़कों और खुले स्थानों पर चारों ओर गेहूं ही फैला हुआ है। मौसम खराब होने की आशंका के चलते किसान बिना पूरी तरह सुखाए गेहूं मंडियों में लेकर पहुंच रहे हैं। जल्दबाजी में काटी गई फसल में नमी की मात्रा 13 से 17 प्रतिशत तक पाई जा रही है, जो निर्धारित 12 प्रतिशत मानक से अधिक है। वहीं अनाज मंडी जगाधरी में सोमवार को आढ़ती एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मुनीष कांबोज की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में आढ़तियों ने किसानों से अपील की कि वे गेहूं की कटाई में जल्दबाजी न करें और फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही मंडियों में लाएं। इसके लिए किसानों के मोबाइल फोन पर संदेश भी भेजे गए हैं, ताकि उन्हें जागरूक किया जा सके।
आढ़तियों का कहना है कि अधिक नमी वाली गेहूं लाने से किसानों को न केवल कम कीमत मिलती है, बल्कि उन्हें अतिरिक्त लेबर चार्ज भी देना पड़ता है। ऐसे में यदि किसान थोड़ी सावधानी बरतें और सूखी फसल लेकर आएं, तो उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।
दूसरी ओर, मंडियों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की धीमी गति भी किसानों और आढ़तियों की परेशानी का कारण बन रही है। आढ़तियों ने कहा कि बायोमीट्रिक प्रणाली के तहत किसानों के फिंगरप्रिंट स्कैन में दिक्कतें आ रही हैं, जिससे गेट पास और खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है।
कई मामलों में किसानों के फिंगर प्रिंट मैच नहीं हो पा रहे, जिसके चलते उन्हें बार-बार आढ़तियों के पास भेजा जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को अपने तीन नॉमिनी पोर्टल पर दर्ज कराने होते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में समय अधिक लग रहा है। खरीद का सीजन होने के कारण आढ़तियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और उन्हें बार-बार पोर्टल पर जानकारी अपडेट करनी पड़ रही है।
इससे किसानों को भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उठान शुरू न होने से मंडियों में गेहूं का स्टॉक बढ़ता जा रहा है, जिससे जगह की कमी महसूस होने लगी है। संवाद

जगाधरी अनाज मंडी में कांटे पर तौलाई के लिए खड़ी ट्राली। संवाद