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Yamuna Nagar News: निजी प्रशासकों की किताबों की जांच के लिए नहीं बनी विभाग की कमेटी
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 01 Apr 2026 12:12 AM IST
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मॉडल टाउन में दुकान पर किताबें लेने के लिए लगी लोगों की भीड़। संवाद
- फोटो : टूंडला के माता वैष्णोदेवी मंदिर परिसर में रखे नेजाओं में आग लगने पर उठता धुंआ संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। नया सत्र शुरू होने से पहले ही निजी विद्यालयों में दाखिले कर लिए गए हैं। नई कक्षाओं में आए विद्यार्थियों के अभिभावक उनके लिए किताबें खरीदने में व्यस्त हैं। तमाम निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई जा रही हैं। कार्रवाई करने वाला शिक्षा विभाग सुस्त है। विभाग की सुस्ती के कारण अभिभावकों को अपनी जेबें कटवानी पड़ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से किताबों की जांच के लिए टीम तक नहीं बनाई गई है।
अधिवक्ता वरयाम सिंह का कहना है कि निजी प्रकाशकों की किताबें लगने पर कार्रवाई के लिए भले ही शिक्षा विभाग टीम न बना पाया हो, लेकिन निजी स्कूलों में इसके लिए विशेष टीम बनी हुई है। टीम के हर सदस्य की अलग ड्यूटी है। स्कूल में दाखिला करवाने आने वाले अभिभावकों से इसी टीम के सदस्य व्यवहार करते हैं।
टीम के सदस्य अभिभावकों को किताबों सहित अन्य सामग्री की पूरी सूची देते हैं और दुकान का पता बताते हैं। यही नहीं अभिभावकों को कहा जाता है कि यदि दुकान पर उसका नाम लिया जाएगा तो विशेष छूट से सामान सस्ता मिलेगा। विभाग की इसी सुस्ती का फायदा निजी स्कूल प्रबंधक खूब उठा रहे हैं।
शहर में खुली तमाम किताबों की दुकानों पर लोगों की भीड़ जुटी हुई है व मनमाने दामों पर निजी प्रकाशकों की किताबें बेची जा रही हैं। परंतु विभाग की ओर से अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्कूलों से ही अभिभावकों को किताबों की सूची के साथ दुकान का पता बताया जा रहा है। विभाग केवल अभिभावकों की शिकायत के भरोसे कार्रवाई की बाट जोह रहा है।
इस बारे में अधिवक्ता सिंह ने कहा कि विभाग इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकता है। यह अधिकारी की इच्छा शक्तियों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि विभाग के पास इस पर कार्रवाई करने के अधिकार हैं और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों ताला लगाने की सिफारिश भी विभाग कर सकता है।
स्कूलाें में केवल एनसीआरटी किताबें ही लगाई जा सकती है। निजी प्रकाशकों की किताबें लगाना नियमों के विरुद्ध है। यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच करवाई जाएंगी। अभिभावक शिकायत दे सकते हैं। - केएस संधावा, उप जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। नया सत्र शुरू होने से पहले ही निजी विद्यालयों में दाखिले कर लिए गए हैं। नई कक्षाओं में आए विद्यार्थियों के अभिभावक उनके लिए किताबें खरीदने में व्यस्त हैं। तमाम निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई जा रही हैं। कार्रवाई करने वाला शिक्षा विभाग सुस्त है। विभाग की सुस्ती के कारण अभिभावकों को अपनी जेबें कटवानी पड़ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से किताबों की जांच के लिए टीम तक नहीं बनाई गई है।
अधिवक्ता वरयाम सिंह का कहना है कि निजी प्रकाशकों की किताबें लगने पर कार्रवाई के लिए भले ही शिक्षा विभाग टीम न बना पाया हो, लेकिन निजी स्कूलों में इसके लिए विशेष टीम बनी हुई है। टीम के हर सदस्य की अलग ड्यूटी है। स्कूल में दाखिला करवाने आने वाले अभिभावकों से इसी टीम के सदस्य व्यवहार करते हैं।
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टीम के सदस्य अभिभावकों को किताबों सहित अन्य सामग्री की पूरी सूची देते हैं और दुकान का पता बताते हैं। यही नहीं अभिभावकों को कहा जाता है कि यदि दुकान पर उसका नाम लिया जाएगा तो विशेष छूट से सामान सस्ता मिलेगा। विभाग की इसी सुस्ती का फायदा निजी स्कूल प्रबंधक खूब उठा रहे हैं।
शहर में खुली तमाम किताबों की दुकानों पर लोगों की भीड़ जुटी हुई है व मनमाने दामों पर निजी प्रकाशकों की किताबें बेची जा रही हैं। परंतु विभाग की ओर से अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। स्कूलों से ही अभिभावकों को किताबों की सूची के साथ दुकान का पता बताया जा रहा है। विभाग केवल अभिभावकों की शिकायत के भरोसे कार्रवाई की बाट जोह रहा है।
इस बारे में अधिवक्ता सिंह ने कहा कि विभाग इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकता है। यह अधिकारी की इच्छा शक्तियों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि विभाग के पास इस पर कार्रवाई करने के अधिकार हैं और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों ताला लगाने की सिफारिश भी विभाग कर सकता है।
स्कूलाें में केवल एनसीआरटी किताबें ही लगाई जा सकती है। निजी प्रकाशकों की किताबें लगाना नियमों के विरुद्ध है। यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच करवाई जाएंगी। अभिभावक शिकायत दे सकते हैं। - केएस संधावा, उप जिला शिक्षा अधिकारी।