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Yamuna Nagar News: हर साल बढ़ते जा रहे टीबी के मरीज, रोग बन रहा जानलेवा
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:18 AM IST
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जिला अस्पताल में जांच शिविर में बोलते विधायक घनश्याम दास। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। देशभर में टीबी (क्षय) उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। वहीं जिले के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। टीबी मुक्त भारत अभियान को उस समय झटका लग रहा है, जब हर साल नए मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिले में औसतन हर साल करीब 3000 नए टीबी मरीज सामने आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक जिले में कुल 9771 टीबी मरीजों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से 504 मरीजों की मौत हो चुकी है। हर साल 150 से अधिक लोगों की जान इस बीमारी से जा रही है, जो इस बात का संकेत है कि बीमारी पर नियंत्रण अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के मरीजों की ओर से दवा का पूरा कोर्स न करना और शरीर को पर्याप्त पोषण न मिलना, बीमारी का गंभीर होना मौत का मुख्य कारण बन रहा है। कई मरीज शुरुआती सुधार के बाद दवा छोड़ देते हैं, जिससे संक्रमण दोबारा उभर आता है और अधिक घातक रूप ले लेता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मरीजों की पहचान और उपचार के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
मोबाइल वैन के माध्यम से गांव-गांव जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके अलावा एक्सट्रा पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस (ईपीटीबी) क्लीनिक भी शुरू किए गए हैं, जहां सप्ताह में एक दिन हड्डी और छाती रोग विशेषज्ञ मरीजों की विशेष जांच करते हैं। जिले में इस समय 1379 मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं 413 निक्षय मित्र पंजीकृत हैं, जिनके माध्यम से अब तक 11482 पोषण किट मरीजों को वितरित की जा चुकी हैं।
पूरा इलाज व पोषण जरूरी : डॉ. चारु
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. चारु कालरा का कहना है कि टीबी से लड़ाई तभी जीती जा सकती है, जब मरीज पूरा इलाज लें और पोषण पर विशेष ध्यान दें। जागरूकता और नियमित उपचार ही इस जानलेवा बीमारी पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपाय है। टीबी के जिन मरीजों की पहचान की जाती है उन्हें स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ठीक होने तक मुफ्त दवाई दी जाती है। मरीज नियमित दवा ले रहा है या नहीं इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी जाती है। यदि एक समय की दवा भी छूट जाए तो सुरक्षा चक्र टूटने का खतरा रहता है।
जिले में मिले टीबी के मरीज
साल टीबी मरीज कोर्स पूरा मौत उपचाराधीन
2023 2934 2629 154 07
2024 3381 3036 145 19
2025 3074 1800 129 981
2026 382-- 05 372
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यमुनानगर। देशभर में टीबी (क्षय) उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। वहीं जिले के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। टीबी मुक्त भारत अभियान को उस समय झटका लग रहा है, जब हर साल नए मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिले में औसतन हर साल करीब 3000 नए टीबी मरीज सामने आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक जिले में कुल 9771 टीबी मरीजों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से 504 मरीजों की मौत हो चुकी है। हर साल 150 से अधिक लोगों की जान इस बीमारी से जा रही है, जो इस बात का संकेत है कि बीमारी पर नियंत्रण अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के मरीजों की ओर से दवा का पूरा कोर्स न करना और शरीर को पर्याप्त पोषण न मिलना, बीमारी का गंभीर होना मौत का मुख्य कारण बन रहा है। कई मरीज शुरुआती सुधार के बाद दवा छोड़ देते हैं, जिससे संक्रमण दोबारा उभर आता है और अधिक घातक रूप ले लेता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मरीजों की पहचान और उपचार के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
मोबाइल वैन के माध्यम से गांव-गांव जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके अलावा एक्सट्रा पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस (ईपीटीबी) क्लीनिक भी शुरू किए गए हैं, जहां सप्ताह में एक दिन हड्डी और छाती रोग विशेषज्ञ मरीजों की विशेष जांच करते हैं। जिले में इस समय 1379 मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं 413 निक्षय मित्र पंजीकृत हैं, जिनके माध्यम से अब तक 11482 पोषण किट मरीजों को वितरित की जा चुकी हैं।
पूरा इलाज व पोषण जरूरी : डॉ. चारु
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. चारु कालरा का कहना है कि टीबी से लड़ाई तभी जीती जा सकती है, जब मरीज पूरा इलाज लें और पोषण पर विशेष ध्यान दें। जागरूकता और नियमित उपचार ही इस जानलेवा बीमारी पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी उपाय है। टीबी के जिन मरीजों की पहचान की जाती है उन्हें स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ठीक होने तक मुफ्त दवाई दी जाती है। मरीज नियमित दवा ले रहा है या नहीं इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी जाती है। यदि एक समय की दवा भी छूट जाए तो सुरक्षा चक्र टूटने का खतरा रहता है।
जिले में मिले टीबी के मरीज
साल टीबी मरीज कोर्स पूरा मौत उपचाराधीन
2023 2934 2629 154 07
2024 3381 3036 145 19
2025 3074 1800 129 981
2026 382