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Yamuna Nagar News: पोर्टल पर फसल शून्य या अधूरी दिखने से मंडी गेट पर अटकीं ट्रालियां
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 03 Apr 2026 03:54 AM IST
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यमुनानगर। जगाधरी व रादौर अनाज मंडियों में 28 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है लेकिन पोर्टल पर फसल शून्य या अधूरी दिखने से किसानों की ट्रालियां मंडी गेट पर अटकी हैं और वह आढ़तियों के पास नहीं पहुंच पा रहे हैं।
बिना सत्यापन और गेट पास के किसान मंडी में फसल नहीं बेच पा रहे। ऐसे में किसानों को कभी आढ़ती तो कभी पटवारी के पास चक्कर काटना पड़ रहा हैं। जब तक पटवारी द्वारा फसल का सत्यापन नहीं किया जाता, तब तक सरसों की बिक्री संभव नहीं है।
कई मामलों में किसानों की पूरी फसल की बजाय केवल आंशिक सत्यापन ही किया गया है, जिससे समस्या और बढ़ गई है। जगाधरी अनाज मंडी में सरसों बेचने पहुंचे गूगलो गांव के किसान धर्मपाल ने बताया कि उन्होंने करीब सवा तीन एकड़ में सरसों की बिजाई कर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया था।
वह ट्राली में लगभग 28 क्विंटल सरसों लेकर आए थे, लेकिन गेट पास बनवाने के दौरान पोर्टल पर केवल 17 क्विंटल का ही सत्यापन दिखाया गया। ऐसे में उन्हें मजबूरन केवल 17 क्विंटल सरसों ही बिकेगी, जबकि बाकी 11 क्विंटल के लिए दोबारा सत्यापन कराकर फिर से मंडी आना होगा। इस प्रक्रिया से किसानों का समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। एक ही फसल को बेचने के लिए उन्हें बार-बार मंडी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं वीरवार को ऐसे भी किसान आए जिनकी फसल पोर्टल पर शून्य दिखाई दे रही है। उनकी स्थिति और भी खराब है, क्योंकि उन्हें मंडी से वापस अपने गांव के पटवारी के पास जाना पड़ रहा है। संवाद
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बिना सत्यापन और गेट पास के किसान मंडी में फसल नहीं बेच पा रहे। ऐसे में किसानों को कभी आढ़ती तो कभी पटवारी के पास चक्कर काटना पड़ रहा हैं। जब तक पटवारी द्वारा फसल का सत्यापन नहीं किया जाता, तब तक सरसों की बिक्री संभव नहीं है।
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कई मामलों में किसानों की पूरी फसल की बजाय केवल आंशिक सत्यापन ही किया गया है, जिससे समस्या और बढ़ गई है। जगाधरी अनाज मंडी में सरसों बेचने पहुंचे गूगलो गांव के किसान धर्मपाल ने बताया कि उन्होंने करीब सवा तीन एकड़ में सरसों की बिजाई कर पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया था।
वह ट्राली में लगभग 28 क्विंटल सरसों लेकर आए थे, लेकिन गेट पास बनवाने के दौरान पोर्टल पर केवल 17 क्विंटल का ही सत्यापन दिखाया गया। ऐसे में उन्हें मजबूरन केवल 17 क्विंटल सरसों ही बिकेगी, जबकि बाकी 11 क्विंटल के लिए दोबारा सत्यापन कराकर फिर से मंडी आना होगा। इस प्रक्रिया से किसानों का समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। एक ही फसल को बेचने के लिए उन्हें बार-बार मंडी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं वीरवार को ऐसे भी किसान आए जिनकी फसल पोर्टल पर शून्य दिखाई दे रही है। उनकी स्थिति और भी खराब है, क्योंकि उन्हें मंडी से वापस अपने गांव के पटवारी के पास जाना पड़ रहा है। संवाद