{"_id":"69b9b15958502f24e40ddf06","slug":"war-in-west-asia-halts-plywood-exports-production-drops-by-25-percent-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-152968-2026-03-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: पश्चिम एशिया में युद्ध ने रोका प्लाई का निर्यात, 25 प्रतिशत घटा उत्पादन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: पश्चिम एशिया में युद्ध ने रोका प्लाई का निर्यात, 25 प्रतिशत घटा उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:24 AM IST
विज्ञापन
फैक्ट्री में तैयार की गई प्लाई और काम करते मजदूर। आर्काइव
विज्ञापन
राजेश कुमार
यमुनानगर। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने प्रदेश के सबसे बड़े प्लाईवुड उद्योग की रफ्तार थाम दी है। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का सीधा असर यहां के कारोबार पर पड़ा है। दुबई, कतर, ओमान समेत अरब देशों को होने वाला प्लाई का निर्यात रुक गया है। कारोबारियों को उत्पादन 20 से 25 प्रतिशत तक घटाना पड़ा है। तैयार माल गोदामों और बंदरगाहों पर अटका पड़ा है, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ता जा रहा है।
जिले में करीब 350 प्लाईवुड फैक्टरियां संचालित हैं, जहां रोजाना लगभग 7000 क्यूबिक मीटर प्लाई तैयार होती है। इसमें से 15 से 20 प्रतिशत उत्पादन विदेशों में निर्यात किया जाता रहा है। लेकिन ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ने से निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है।
प्लाईवुड कारोबारियों का कहना है कि यह स्थिति उनके लिए बेहद चिंताजनक बन गई है। कारोबारी अंकुर जैन, कमल गुप्ता और मुकेश गुप्ता के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले जो माल भेजा गया था, वह अब विभिन्न बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। इससे उनका भुगतान अटक गया है और अतिरिक्त खर्च बढ़ता जा रहा है।
युद्ध के दौरान तैयार की गई प्लाई को फिलहाल गोदामों में ही जमा किया जा रहा है, क्योंकि उसे भेजने का कोई रास्ता नहीं है। एक ओर निर्यात बंद है, तो दूसरी ओर घरेलू बाजार में भी मांग अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। ऐसे में तैयार प्लाई की बिक्री लगभग ठप हो गई है। इस स्थिति ने कारोबारियों को उत्पादन घटाने के लिए मजबूर कर दिया है।
युद्ध के बीच प्लाई का निर्यात नहीं होने के बीच इसे तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के दाम का बढ़ना भी परेशानी बढ़ा रहा है। बिक्री प्रभावित होने के कारण लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। कारोबारियों का कहना है कि वे दोहरी मार झेल रहे हैं, एक तरफ एक्सपोर्ट बंद है और दूसरी तरफ लागत बढ़ती जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग सबसे पहले प्रभावित होंगे। संवाद
यदि समय रहते युद्ध नहीं रुका तो जिले का यह प्रमुख उद्योग लंबे समय तक संकट से उबर नहीं पाएगा। निर्यात बहाल होने पर ही कारोबार पटरी पर लौट पाएगा। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक नुकसान का यह सिलसिला थमने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। प्लाई का निर्यात रुकने से उत्पादन घटाना पड़ रहा है। - जेके बिहानी, अध्यक्ष, हरियाणा प्लाईवुड एसोसिएशन यमुनानगर।
Trending Videos
यमुनानगर। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने प्रदेश के सबसे बड़े प्लाईवुड उद्योग की रफ्तार थाम दी है। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का सीधा असर यहां के कारोबार पर पड़ा है। दुबई, कतर, ओमान समेत अरब देशों को होने वाला प्लाई का निर्यात रुक गया है। कारोबारियों को उत्पादन 20 से 25 प्रतिशत तक घटाना पड़ा है। तैयार माल गोदामों और बंदरगाहों पर अटका पड़ा है, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ता जा रहा है।
जिले में करीब 350 प्लाईवुड फैक्टरियां संचालित हैं, जहां रोजाना लगभग 7000 क्यूबिक मीटर प्लाई तैयार होती है। इसमें से 15 से 20 प्रतिशत उत्पादन विदेशों में निर्यात किया जाता रहा है। लेकिन ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ने से निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्लाईवुड कारोबारियों का कहना है कि यह स्थिति उनके लिए बेहद चिंताजनक बन गई है। कारोबारी अंकुर जैन, कमल गुप्ता और मुकेश गुप्ता के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले जो माल भेजा गया था, वह अब विभिन्न बंदरगाहों पर फंसा हुआ है। इससे उनका भुगतान अटक गया है और अतिरिक्त खर्च बढ़ता जा रहा है।
युद्ध के दौरान तैयार की गई प्लाई को फिलहाल गोदामों में ही जमा किया जा रहा है, क्योंकि उसे भेजने का कोई रास्ता नहीं है। एक ओर निर्यात बंद है, तो दूसरी ओर घरेलू बाजार में भी मांग अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। ऐसे में तैयार प्लाई की बिक्री लगभग ठप हो गई है। इस स्थिति ने कारोबारियों को उत्पादन घटाने के लिए मजबूर कर दिया है।
युद्ध के बीच प्लाई का निर्यात नहीं होने के बीच इसे तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल के दाम का बढ़ना भी परेशानी बढ़ा रहा है। बिक्री प्रभावित होने के कारण लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। कारोबारियों का कहना है कि वे दोहरी मार झेल रहे हैं, एक तरफ एक्सपोर्ट बंद है और दूसरी तरफ लागत बढ़ती जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग सबसे पहले प्रभावित होंगे। संवाद
यदि समय रहते युद्ध नहीं रुका तो जिले का यह प्रमुख उद्योग लंबे समय तक संकट से उबर नहीं पाएगा। निर्यात बहाल होने पर ही कारोबार पटरी पर लौट पाएगा। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक नुकसान का यह सिलसिला थमने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। प्लाई का निर्यात रुकने से उत्पादन घटाना पड़ रहा है। - जेके बिहानी, अध्यक्ष, हरियाणा प्लाईवुड एसोसिएशन यमुनानगर।