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Bilaspur News: 138 साल पुराने नलवाड़ी मेला को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:13 PM IST
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138 year old Nalwadi fair will get national recognition
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सरकार ने की मेले को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा देने के लिए शुरू की कवायद
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मंत्री धर्माणी बोले- सीएम से सहमति, औपचारिकताएं अंतिम चरण में

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर का ऐतिहासिक राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेला, जो बदलते दौर में अपनी मूल पहचान के संकट से जूझ रहा है, अब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान पाने की ओर बढ़ रहा है। इसी वर्ष इस मेले को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा हो चुकी है और सभी आवश्यक औपचारिकताएं लगभग पूरी कर ली गई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि इस ऐतिहासिक मेले को उसकी गरिमा के अनुरूप राष्ट्रीय पहचान दिलाई जाए। 1889 में शुरू हुआ नलवाड़ी मेला कभी उत्तर भारत के सबसे बड़े पशुधन व्यापार मेलों में शुमार होता था। बैलों की खरीद-फरोख्त इसका मुख्य आकर्षण थी और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता था। पंजाब, रोपड़, नवांशहर, नालागढ़ और आसपास के क्षेत्रों से व्यापारी और किसान यहां पहुंचते थे। उस दौर में हजारों की संख्या में पशुधन की खरीद-फरोख्त होती थी। भाखड़ा बांध के निर्माण के बाद पुराने सांडू मैदान के जलमग्न होने पर मेले को लुहणू मैदान में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद मेले के स्वरूप में धीरे-धीरे बदलाव आने लगा। आज स्थिति यह है कि पशुधन व्यापार लगभग समाप्त हो चुका है और मेला मुख्य रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित होकर रह गया है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर का दर्जा मिलने से न केवल मेले की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने का अवसर मिलेगा, बल्कि पशुधन व्यापार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक लोक संस्कृति को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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परमार के विजन से राज्य स्तर तक पहुंचा मेला
नलवाड़ी मेले को राज्य स्तरीय पहचान दिलाने का श्रेय हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री यशवंत सिंह परमार को दिया जाता है। 1971 में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद 1970 के दशक में डॉ. परमार ने प्रदेश की पारंपरिक मेलों और सांस्कृतिक धरोहरों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए। इसी क्रम में नलवाड़ी मेले को आधिकारिक रूप से राज्य स्तरीय मेला बनाया गया।
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राष्ट्रीय दर्जा बनेगा संजीवनी
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि नलवाड़ी मेले को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा मिलता है, तो यह इसकी खोती पहचान को नई दिशा देगा। यह कदम न केवल मेले की ऐतिहासिक गरिमा को पुनर्स्थापित करेगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों, पशुपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत से जुड़ी रह सकेंगी।
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