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Bilaspur News: छेड़छाड़ व मारपीट के मामले में दोषी की सजा बरकरार

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Wed, 25 Mar 2026 11:52 PM IST
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Conviction in molestation and assault case upheld
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अदालत से
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सेशन कोर्ट ने खारिज की आरोपी की अपील
निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया
2012 में सुन्हाणी पुल के पास महिला से की थी बदसलूकी
कोर्ट ने कहा- पीड़िता की गवाही विश्वसनीय, मेडिकल साक्ष्य से हुई पुष्टी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने महिला से छेड़छाड़, मारपीट और रास्ता रोकने के मामले में दोषी करार दिए गए आरोपी की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी को तुरंत सजा भुगतने के आदेश दिए हैं।
यह मामला वर्ष 2012 का है, जब झंडूता क्षेत्र के सुन्हाणी पुल के पास एक युवती के साथ आरोपी ने रास्ता रोककर बदसलूकी की थी। अदालत के अनुसार आरोपी ने महिला को पकड़कर उसके साथ मारपीट की, उसका कंगन तोड़ दिया और जबरन पकड़कर उसकी गरिमा भंग करने का प्रयास किया। अभियोजन के अनुसार घटना 15 अप्रैल 2012 की सुबह करीब 9:30 बजे की है। पीड़िता बस पकड़ने के लिए सड़क किनारे खड़ी थी, तभी आरोपी ने उसका रास्ता रोक लिया और उसके साथ मारपीट व अश्लील हरकतें कीं। घटना के बाद पीड़िता ने अपने पिता को फोन किया, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और मामला दर्ज हुआ। जांच के दौरान पुलिस ने मौके से टूटे कंगन के टुकड़े बरामद किए और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया, जिसमें चोटों की पुष्टि हुई। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बिलासपुर ने आरोपी को गलत तरीके से रोकना, महिला की लज्जा भंग करना और मारपीट के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। आरोपी को एक माह का साधारण कारावास, एक वर्ष का कठोर कारावास, छह माह की अतिरिक्त सजा सुनाई गई थी, जो साथ-साथ चलनी थी।
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आरोपी ने सत्र अदालत में अपील दायर कर कहा कि गवाह उसके खिलाफ हैं और स्वतंत्र गवाह मुकर गया,सबूतों में विरोधाभास है,उसे झूठा फंसाया गया है। सत्र न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि घटना एक सुनसान स्थान पर हुई, इसलिए पीड़िता की गवाही अहम है। पीड़िता की गवाही सुसंगत और विश्वसनीय है। मेडिकल साक्ष्य और अन्य गवाहों के बयान उससे मेल खाते हैं,
स्वतंत्र गवाह के मुकरने से पूरा मामला कमजोर नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय सामाजिक परिस्थितियों में कोई महिला झूठा ऐसा आरोप लगाने से बचती है, क्योंकि इससे उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे सिद्ध हुए हैं। इसके चलते अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा गया। साथ ही आदेश दिए गए कि आरोपी तुरंत सजा भुगते।
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