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Himachal: पेट्रोल-डीजल पर पांच रुपये उपकर के प्रस्ताव का विरोध, कोर्ट जाने की तैयारी में डीलर

सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 26 Mar 2026 06:00 AM IST
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सार

पेट्रोल और डीजल पर पांच रुपये प्रति लीटर तक अनाथ और विधवा उपकर लगाने के सरकार के प्रस्ताव ने पेट्रोल पंप डीलरों के बीच असमंजस और विरोध की स्थिति पैदा कर दी है। 

Himachal: Opposition to Proposal for 5 Cess on Petrol and Diesel; Dealers Prepare to Move Court
पेट्रोल-डीजल सेस मामला। - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर पांच रुपये प्रति लीटर तक अनाथ और विधवा उपकर लगाने के सरकार के प्रस्ताव ने पेट्रोल पंप डीलरों के बीच असमंजस और विरोध की स्थिति पैदा कर दी है। डीलरों का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था न तो आर्थिक रूप से व्यावहारिक है और न ही इसके नियम अभी तक स्पष्ट किए गए हैं। ऐसे में 27 मार्च को बिलासपुर में बुलाई गई बैठक को इस पूरे विवाद के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार वैट एक्ट में धारा 6-क जोड़कर इस उपकर को लागू करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार यह उपकर प्रथम बिक्री यानी तेल कंपनी से खरीद के समय ही वसूला जाएगा। इसका मतलब यह है कि डीलरों को पेट्रोल-डीजल खरीदते समय ही प्रति लीटर पांच रुपये अतिरिक्त राशि अग्रिम रूप से जमा करनी होगी। डीलरों के अनुसार इस व्यवस्था से उनकी कार्यशील पूंजी पर सीधा असर पड़ेगा। एक टैंकर में औसतन 12,000 लीटर ईंधन आता है, जिस पर लगभग 60 हजार अतिरिक्त भुगतान करना होगा। इससे छोटे और मध्यम डीलरों की पूंजी फंसने और नकदी संकट गहराने की आशंका है।

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डीलरों ने स्पष्ट किया कि वे भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देशों और कमीशन के आधार पर काम करते हैं। वे राज्य सरकार के लिए केवल कलेक्टिंग ऑफिसर (टैक्स जमा करने वाले) की तरह हैं। मौजूदा कमीशन में वे पहले ही सीमित मार्जिन पर काम कर रहे हैं, ऐसे में इस तरह का अग्रिम भुगतान उनके लिए गंभीर आर्थिक दबाव पैदा करेगा। डीलरों का तर्क है कि वे सरकार और उपभोक्ता के बीच केवल एक माध्यम की भूमिका निभाते हैं। पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला कोई भी टैक्स या उपकर अंत में आम जनता से ही वसूला जाता है और डीलर उसे सरकार तक पहुंचाने का काम करते हैं।

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उनका कहना है कि यदि सरकार कोई भी उपकर लागू करती है तो उसे पारदर्शी और स्पष्ट व्यवस्था के तहत लागू किया जाना चाहिए। डीलरों ने इस प्रस्ताव की संरचना पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि प्रदेश की करीब 75 लाख आबादी के बीच केवल 800 के आसपास पेट्रोल पंप डीलरों पर इस तरह का आर्थिक बोझ डालना तर्कसंगत नहीं है। डीलरों के मुताबिक यह व्यवस्था व्यवहारिक रूप से कठिन है और इससे असंतुलन पैदा हो सकता है। प्रदेश में पहले से ही ईंधन आपूर्ति को लेकर दबाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में यदि डीलरों ने बैठक में कोई सख्त रुख अपनाया या विरोध का रास्ता चुना, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर पड़ सकता है और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 

27 मार्च की बैठक में तय होगी रणनीति
इस पूरे मुद्दे पर डीलरों ने 27 मार्च को होटल सागर व्यू पैलेस में बैठक बुलाई है, जो सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगी। बैठक में उपकर प्रस्ताव का विस्तृत विश्लेषण,आर्थिक प्रभाव पर चर्चा,कानूनी विकल्पों पर विचार,कोर्ट में याचिका दायर करने की रणनीति,वकीलों की फीस और कोर्ट खर्च के लिए फंड जुटाने का निर्णय लिए जाने की संभावना है। बैठक के बाद डीलर अपने रुख को सार्वजनिक भी कर सकते हैं।

राज्य में 1000 पेट्रोल पंप, सियासी जुड़ाव भी
प्रदेश में करीब 1000 पेट्रोल पंप संचालित हैं। इनमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और रिलायंस के पंप शामिल हैं। बताया जा रहा है कि 100 से अधिक पेट्रोल पंप वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों से जुड़े हुए हैं, जबकि कुछ पंप हिमफेड और सिविल सप्लाई जैसी सरकारी एजेंसियों के अधीन भी हैं।

नियमों में स्पष्टता का अभाव, लागू करने को लेकर संशय
डीलरों की सबसे बड़ी आपत्ति इस बात को लेकर है कि प्रस्तावित उपकर को लागू करने के लिए अभी तक स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं। यह उपकर किस श्रेणी में आएगा,इसकी वसूली और समायोजन की प्रक्रिया क्या होगी,डीलरों को भुगतान का तरीका क्या होगा। इन सभी बिंदुओं पर स्पष्टता न होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जब तक सरकार के कानूनी विशेषज्ञ और संबंधित विभाग इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं करते, तब तक इसे लागू करना मुश्किल होगा। -सुकुमार, प्रदेशाध्यक्ष, पेट्रोल पंप एसोसिएशन

निजी ऑपरेटर बोले, डीजल पर सेस बढ़ेगा तो बस किराया भी बढ़ाएं
 सरकार की तरफ से डीजल पर सेस लगाए दाने के फैसले से निजी बस ऑपरेटर चिंतित है। उनका कहना है कि इससे डीजल पांच रुपये प्रति लीटर महंगा हो जाएगा। उन पर 90 हजार रुपये वार्षिक प्रति बस अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। ऑपरेटरों ने मांग की है डीजल के अनुपात में बस किराये में भी बढ़ोतरी की जाए। जिला सिरमौर में ही करीब 160 निजी बसें हैं। एक बस लगभग 200 किलोमीटर प्रतिदिन चलती है। इसमें रोज 50 लीटर डीजल की खपत होती है। इसी प्रकार एक बस का हर रोज 250 रुपये, महीने में 7500 रुपये जबकि एक साल में औसतन 90 हजार रुपये आर्थिक बोझ पड़ेगा। बस यूनियन के अध्यक्ष बलबिंद्र सिंह सहित अखिल शर्मा, मेहराज काशमी, कमलजीत सिंह बंगा ने बताया कि डीजल के अनुपात में बस किराए में बढ़ोतरी की जाए। ऑपरेटरों ने बताया कि जल्दी ही मुख्यमंत्री से मिलकर इस संबंध में ज्ञापन दिया जाएगा।

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