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Himachal: 10 साल तक कर्मचारी को लाभ नहीं देना गलत, अधिकारियों पर लगा पांच लाख का जुर्माना बरकरार

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 26 Mar 2026 06:00 AM IST
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सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर एक अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अदालती आदेशों की अवहेलना स्वीकार्य नहीं है। 

Himachal: Denying benefits to an employee for 10 years is wrongful; fine of ₹5 lakh imposed on officials uphel
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर एक अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अदालती आदेशों की अवहेलना स्वीकार्य नहीं है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस निर्णय को सही ठहराया है, जिसमें दोषी अधिकारियों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। अदालत ने पाया कि विभाग ने एक दशक तक कर्मचारी को उसके जायज हक से वंचित रखा। अदालत इस बात पर भी हैरान थी कि अपील उन 6 सेवानिवृत्त अधिकारियों की ओर से भी दायर की गई थी, जिन्होंने इसके लिए कोई आधिकारिक अधिकार पत्र (पॉवर ऑफ अटॉर्नी तक नहीं दिया था।

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हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें कहा गया था कि पहले सरकार 5 लाख रुपये का जुर्माना अदा करे और फिर इस राशि की वसूली उन दोषी अधिकारियों से की जाए जो इस देरी और अवहेलना के लिए जिम्मेदार थे। खंडपीठ ने नोट किया कि इससे पहले भी एक समन्वय पीठ ने राज्य सरकार को भविष्य में इस तरह की हरकतें न दोहराने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद सरकार ने फिर से अपील दायर की, जिसे अदालत ने भ्रामक करार दिया।

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अदालत ने कहा कि जब ट्रिब्यूनल का आदेश अंतिम हो चुका था, तो उसका पालन करना राज्य का संवैधानिक कर्तव्य था। यह मामला गेजम राम नामक एक कर्मचारी के नियमितीकरण से जुड़ा है। कर्मचारी 1994 से सेवा में था। नियमानुसार, 8 साल की सेवा पूरी करने के बाद वर्ष 2002 में उसे नियमित किया जाना चाहिए था, लेकिन विभाग ने उसे 2006 से नियमित किया। वर्ष 2016 में ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया था कि प्रार्थी को 2002 से सभी लाभ दिए जाएं। इसके बावजूद, अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए लाभ देने से इन्कार कर दिया, जिसके बाद यह मामला अवमानना की कार्यवाही तक पहुंच गया।

आईजीएमसी डॉक्टर के स्थानांतरण पर राज्य सरकार की अधिसूचनाओं पर रोक
 प्रदेश हाईकोर्ट ने आईजीएमसी डॉक्टरों के स्थानांतरण पर राज्य सरकार की तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के निष्पादन और संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी। हाईकोर्ट में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की ओर से सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है जिसके तहत इन डॉक्टरों का स्थानांतरण हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में किया गया है। याचिकाओं में 15 अप्रैल 2020, 19 मार्च और 20 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि जो स्थानांतरण हुआ है वह मेडिकल कॉलेज के लिए बनाई गई एनकैड्रेमेंट पॉलिसी 2018 के खिलाफ है। इस पॉलिसी के तहत इन डॉक्टरों का स्थानांतरण मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में नहीं किया जा सकता है।

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