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Bilaspur News: 50 ग्राम हेरोइन केस में आरोपी को मिली जमानत
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 11 Apr 2026 11:31 PM IST
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सह-आरोपी के बयान को अदालत ने माना अपर्याप्त साक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज 50.32 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामदगी मामले में विशेष न्यायाधीश-II बिलासपुर की अदालत ने आरोपी युगल को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि सह-आरोपी के बयान के आधार पर ही किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
7 मार्च 2026 को सदर थाना पुलिस ने पट्टा में ट्रैफिक चेकिंग के दौरान एक बाइक सवार रोहन चौहान को पकड़ा, जिसके कब्जे से 50.32 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। जांच के दौरान रोहन ने खुलासा किया कि उसने यह नशा गरामोड़ टोल प्लाजा पर युगल और एक अन्य आरोपी से लिया था। इसके बाद पुलिस ने युगल को 10 मार्च को गिरफ्तार किया। अदालत ने पाया कि युगल की संलिप्तता मुख्य रूप से सह-आरोपी के बयान और कॉल डिटेल्स पर आधारित है, जो कानून के तहत ठोस साक्ष्य नहीं माने जा सकते। साथ ही, जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी से कोई बरामदगी बाकी नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सह-आरोपी का कबूलनामा स्वतंत्र साक्ष्य नहीं होता और इसे अकेले आधार बनाकर जमानत से इंकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही आरोपी को देश छोड़ने से पहले अनुमति लेनी होगी और गवाहों को प्रभावित न करने की शर्त भी लगाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल जमानत याचिका के निपटारे के लिए है और इससे मामले के अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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बिलासपुर। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज 50.32 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामदगी मामले में विशेष न्यायाधीश-II बिलासपुर की अदालत ने आरोपी युगल को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि सह-आरोपी के बयान के आधार पर ही किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
7 मार्च 2026 को सदर थाना पुलिस ने पट्टा में ट्रैफिक चेकिंग के दौरान एक बाइक सवार रोहन चौहान को पकड़ा, जिसके कब्जे से 50.32 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। जांच के दौरान रोहन ने खुलासा किया कि उसने यह नशा गरामोड़ टोल प्लाजा पर युगल और एक अन्य आरोपी से लिया था। इसके बाद पुलिस ने युगल को 10 मार्च को गिरफ्तार किया। अदालत ने पाया कि युगल की संलिप्तता मुख्य रूप से सह-आरोपी के बयान और कॉल डिटेल्स पर आधारित है, जो कानून के तहत ठोस साक्ष्य नहीं माने जा सकते। साथ ही, जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी से कोई बरामदगी बाकी नहीं है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सह-आरोपी का कबूलनामा स्वतंत्र साक्ष्य नहीं होता और इसे अकेले आधार बनाकर जमानत से इंकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। साथ ही आरोपी को देश छोड़ने से पहले अनुमति लेनी होगी और गवाहों को प्रभावित न करने की शर्त भी लगाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल जमानत याचिका के निपटारे के लिए है और इससे मामले के अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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