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Bilaspur News: आपदा में ढहे कसोल स्कूल भवन का निर्माण अब तक नहीु हुआ शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 25 Mar 2026 11:15 PM IST
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विधायक त्रिलोक जमवाल ने मामले को लेकर सरकार को घेरा
दान की जमीन को बताया जा रहा कम, बच्चे मकानों के कमरों में पढ़ने को मजबूर
विधानसभा में अन्य स्कूलों की बदहाल स्थिति के बारे में भी उठाई बात
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक त्रिलोक जमवाल ने मोरसिंघी पंचायत के तहत आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए प्राइमरी स्कूल कसोल के भवन निर्माण में हो रही देरी को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय बीत जाने के बावजूद अब तक न तो भवन निर्माण कार्य शुरू हो पाया है और न ही इसकी ड्राइंग तैयार की गई है।
बुधवार को विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान मुद्दा उठाते हुए जमवाल ने बताया कि वर्ष 2023 की आपदा में कसोल स्कूल का भवन पूरी तरह ढह गया था। इसके बाद बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों ने सुरक्षित स्थान पर 4 बिस्वा भूमि दान में दी, लेकिन संबंधित अधिकारी उस जमीन को कम बताकर लौट गए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से करीब 25 लाख रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाया है। वर्तमान में स्कूल दो अलग-अलग रिहायशी मकानों के कमरों में संचालित हो रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जमवाल ने मांग की कि उपलब्ध भूमि के अनुसार जल्द ड्राइंग तैयार कर निर्माण कार्य शुरू करवाया जाए, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
विधायक ने बल्ह चुराणी पंचायत के प्राइमरी स्कूल नैण गुजरां की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि दो कमरों वाले इस स्कूल का एक कमरा आपदा में गिर चुका है और उसके निर्माण के लिए मात्र ढाई लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भवन का एक हिस्सा असुरक्षित साबित हो चुका है, तो दूसरे कमरे को सुरक्षित कैसे माना जा सकता है। बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भवन का पुनर्निर्माण आवश्यक है, जिसके लिए अतिरिक्त बजट जारी किया जाना चाहिए। जमवाल ने सीनियर सेकेंडरी स्कूल मल्यावर और चलैहली के प्रांगण में आपदा के दौरान गिरे मलबे को अब तक न हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई। वहीं, कंदरौर स्कूल की छत टपकने की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन सभी स्कूलों में मलबा हटाने और मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सदर विधानसभा क्षेत्र के विधायक त्रिलोक जमवाल ने मोरसिंघी पंचायत के तहत आपदा में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए प्राइमरी स्कूल कसोल के भवन निर्माण में हो रही देरी को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय बीत जाने के बावजूद अब तक न तो भवन निर्माण कार्य शुरू हो पाया है और न ही इसकी ड्राइंग तैयार की गई है।
बुधवार को विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान मुद्दा उठाते हुए जमवाल ने बताया कि वर्ष 2023 की आपदा में कसोल स्कूल का भवन पूरी तरह ढह गया था। इसके बाद बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों ने सुरक्षित स्थान पर 4 बिस्वा भूमि दान में दी, लेकिन संबंधित अधिकारी उस जमीन को कम बताकर लौट गए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से करीब 25 लाख रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाया है। वर्तमान में स्कूल दो अलग-अलग रिहायशी मकानों के कमरों में संचालित हो रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जमवाल ने मांग की कि उपलब्ध भूमि के अनुसार जल्द ड्राइंग तैयार कर निर्माण कार्य शुरू करवाया जाए, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
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विधायक ने बल्ह चुराणी पंचायत के प्राइमरी स्कूल नैण गुजरां की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि दो कमरों वाले इस स्कूल का एक कमरा आपदा में गिर चुका है और उसके निर्माण के लिए मात्र ढाई लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भवन का एक हिस्सा असुरक्षित साबित हो चुका है, तो दूसरे कमरे को सुरक्षित कैसे माना जा सकता है। बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भवन का पुनर्निर्माण आवश्यक है, जिसके लिए अतिरिक्त बजट जारी किया जाना चाहिए। जमवाल ने सीनियर सेकेंडरी स्कूल मल्यावर और चलैहली के प्रांगण में आपदा के दौरान गिरे मलबे को अब तक न हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई। वहीं, कंदरौर स्कूल की छत टपकने की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन सभी स्कूलों में मलबा हटाने और मरम्मत कार्य को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।