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Bilaspur News: तलाक केस में दूसरी शादी के आरोप से जुड़े साक्ष्य स्वीकार

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 11 Apr 2026 11:28 PM IST
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Evidence relating to allegation of second marriage admitted in divorce case
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अदालत से
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परिवार न्यायालय ने कहा, न्यायिक निर्णय के लिए जरूरी दस्तावेज
याचिकाकर्ता की आपत्तियां खारिज, देरी से पेश साक्ष्यों को भी माना प्रासंगिक
एफआईआर चालान रिकॉर्ड पर शामिल, प्रतिवादी को अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की अनुमति

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। परिवार न्यायालय बिलासपुर की प्रधान न्यायाधीश ने तलाक याचिका से जुड़े एक अहम मामले में प्रतिवादी को अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की अनुमति देते हुए पुलिस चालान और एफआईआर की प्रतियों को रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये दस्तावेज मामले के निष्पक्ष और प्रभावी निपटारे के लिए आवश्यक हैं।
मामले में प्रतिवादी की ओर से आदेश 8 नियम 1(ए)(3) सीपीसी व धारा 151 सीपीसी के तहत आवेदन दायर कर पुलिस चालान, एफआईआर की प्रतियां और संबंधित न्यायालय के आपराधिक अहलमद को साक्ष्य के रूप में पेश करने की अनुमति मांगी गई थी। आवेदन में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने पहली शादी के रहते दूसरी शादी कर ली है और वर्तमान तलाक याचिका उसी को वैध बनाने के उद्देश्य से दायर की गई है, जो हिंदू कानून के तहत अवैध है। प्रतिवादी ने यह भी दलील दी कि ये दस्तावेज पहले उसके पास उपलब्ध नहीं थे और पूरी सावधानी बरतने के बावजूद उन्हें पहले पेश नहीं किया जा सका। बाद में विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त होने पर बिना देरी के अदालत में आवेदन दाखिल किया गया। इन दस्तावेजों को मामले की जड़ से जुड़ा बताते हुए न्यायहित में स्वीकार करने की मांग की गई। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से आवेदन का कड़ा विरोध करते हुए इसे सुनवाई को लंबा खींचने का प्रयास बताया गया। जवाब में कहा गया कि कथित दूसरी शादी का तलाक याचिका से कोई संबंध नहीं है और न ही अदालत के डिक्री से किसी दूसरी शादी को वैध ठहराया जा सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रतिवादी अपने केस की कमियों को भरने के लिए ऐसे दस्तावेज पेश करना चाहती है, इसलिए आवेदन खारिज किया जाए।
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दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि मामला बहस के चरण में होने के बावजूद प्रस्तुत दस्तावेज विवाद के निपटारे में सहायक हैं। अदालत ने कहा कि यदि इन्हें रिकॉर्ड पर लिया जाता है तो इससे याचिकाकर्ता को कोई विशेष क्षति नहीं होगी, क्योंकि संबंधित एफआईआर स्वयं उसके पक्ष से जुड़ा दस्तावेज है और उसे इसकी जानकारी भी रही है। अदालत ने यह भी माना कि ये दस्तावेज पहले प्रतिवादी के ज्ञान या कब्जे में नहीं थे और जानकारी मिलते ही उसने बिना देरी आवेदन दायर किया। ऐसे में न्याय हित को ध्यान में रखते हुए आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया और दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर ले लिया गया। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी के वकील ने चालान और एफआईआर को औपचारिक रूप से साक्ष्य के तौर पर पेश करते हुए अपनी ओर से साक्ष्य बंद कर दिया। अब अदालत ने मामले को अंतिम बहस के लिए 23 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध किया है, जहां दोनों पक्ष अपने अंतिम तर्क पेश करेंगे।
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