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Bilaspur News: आउटसोर्स कर्मचारियों ने नियमितीकरण की मांग उठाई
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बिलासपुर में आयोजित आउटसोर्स कर्मचारियों की बैठक में भाग लेने वाले कर्मचारी। स्रोम: कर्मचारी
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बिलासपुर में महासंघ की बैठक का आयोजन, कहा-मानसून सत्र में सरकार के समक्ष उठाएंगे मुद्दा
समान काम-समान वेतन और नौकरी सुरक्षा को लेकर सरकार से नीति बनाने की उठाएंगे मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ जिला इकाई बिलासपुर की बैठक शनिवार को परिधि गृह में जिला अध्यक्ष पवन कुमार की अध्यक्षता में हुई। इसमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष यूनुस अख्तर विशेष तौर पर मौजूद रहे। बैठक का संचालन महासचिव सबीर मोहम्मद ने किया। बैठक में प्रदेशभर के आउटसोर्स कर्मचारियों की पिछले 15 से 20 वर्षों से लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
निर्णय लिया गया कि आगामी मानसून सत्र में सरकार के समक्ष कर्मचारियों की मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष को और तेज किया जाएगा। बैठक में कहा गया कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी आज भी नियमितीकरण की राह देख रहे हैं। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी अब 40 से 45 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, जबकि कई कर्मचारी 50 वर्ष से अधिक के हो चुके हैं। उन्होंने अपने जीवन का बहुमूल्य समय सरकारी विभागों की सेवा में दिया, लेकिन आज भी उनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। महासंघ ने आरोप लगाया कि अब तक की सभी सरकारों ने आउटसोर्स कर्मचारियों का केवल राजनीतिक उपयोग किया है। वर्तमान सरकार के तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन, नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण जैसी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं मिला है। संगठन का कहना है कि विधानसभा चुनावों में वर्तमान सरकार का समर्थन करने वाले अनेक आउटसोर्स कर्मचारी आज स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। बैठक में कहा गया कि महासंघ लगातार अपने प्रतिनिधिमंडलों के माध्यम से सरकार के समक्ष कर्मचारियों का पक्ष रखता रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार वास्तव में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाना चाहती है तो सबसे पहले सेवा प्रदाता आउटसोर्स कंपनियों की व्यवस्था समाप्त करनी होगी। उनका कहना है कि इन कंपनियों को दिए जाने वाले कमीशन की राशि सीधे कर्मचारियों को दी जाए। इससे प्रत्येक कर्मचारी के वेतन में लगभग पांच से छह हजार रुपये तक की वृद्धि हो सकती है और सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। महासंघ ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के बराबर जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उनके लिए वेतन के समान मानदंडए सेवा सुरक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने वाली कोई स्थायी नीति नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने परिवार का पालन-पोषण और भविष्य की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बैठक के माध्यम से मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल और सभी विधायकों से आग्रह किया गया कि जिस प्रकार पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का निर्णय लिया गया, उसी तरह आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी समान काम-समान वेतन, नौकरी की सुरक्षा और नियमित स्थायी नीति लागू करने का निर्णय लिया जाए। बैठक में शमशेर कटोच, कुलवीर, देवराज, सोमदत्त, नीलकंठ, मनोज कुमार, हनीश कुमार, रक्षा देवी, मनु कुमारी, सरिता देवी, सपना कुमारी, राकेश कुमार, विनोद बंसल सहित जिला बिलासपुर के विभिन्न विभागों के अनेक आउटसोर्स कर्मचारियों ने भाग लिया।
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समान काम-समान वेतन और नौकरी सुरक्षा को लेकर सरकार से नीति बनाने की उठाएंगे मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ जिला इकाई बिलासपुर की बैठक शनिवार को परिधि गृह में जिला अध्यक्ष पवन कुमार की अध्यक्षता में हुई। इसमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष यूनुस अख्तर विशेष तौर पर मौजूद रहे। बैठक का संचालन महासचिव सबीर मोहम्मद ने किया। बैठक में प्रदेशभर के आउटसोर्स कर्मचारियों की पिछले 15 से 20 वर्षों से लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
निर्णय लिया गया कि आगामी मानसून सत्र में सरकार के समक्ष कर्मचारियों की मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष को और तेज किया जाएगा। बैठक में कहा गया कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी आज भी नियमितीकरण की राह देख रहे हैं। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी अब 40 से 45 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, जबकि कई कर्मचारी 50 वर्ष से अधिक के हो चुके हैं। उन्होंने अपने जीवन का बहुमूल्य समय सरकारी विभागों की सेवा में दिया, लेकिन आज भी उनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। महासंघ ने आरोप लगाया कि अब तक की सभी सरकारों ने आउटसोर्स कर्मचारियों का केवल राजनीतिक उपयोग किया है। वर्तमान सरकार के तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन, नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण जैसी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं मिला है। संगठन का कहना है कि विधानसभा चुनावों में वर्तमान सरकार का समर्थन करने वाले अनेक आउटसोर्स कर्मचारी आज स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। बैठक में कहा गया कि महासंघ लगातार अपने प्रतिनिधिमंडलों के माध्यम से सरकार के समक्ष कर्मचारियों का पक्ष रखता रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
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कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार वास्तव में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाना चाहती है तो सबसे पहले सेवा प्रदाता आउटसोर्स कंपनियों की व्यवस्था समाप्त करनी होगी। उनका कहना है कि इन कंपनियों को दिए जाने वाले कमीशन की राशि सीधे कर्मचारियों को दी जाए। इससे प्रत्येक कर्मचारी के वेतन में लगभग पांच से छह हजार रुपये तक की वृद्धि हो सकती है और सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। महासंघ ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के बराबर जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उनके लिए वेतन के समान मानदंडए सेवा सुरक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने वाली कोई स्थायी नीति नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने परिवार का पालन-पोषण और भविष्य की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। बैठक के माध्यम से मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल और सभी विधायकों से आग्रह किया गया कि जिस प्रकार पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का निर्णय लिया गया, उसी तरह आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी समान काम-समान वेतन, नौकरी की सुरक्षा और नियमित स्थायी नीति लागू करने का निर्णय लिया जाए। बैठक में शमशेर कटोच, कुलवीर, देवराज, सोमदत्त, नीलकंठ, मनोज कुमार, हनीश कुमार, रक्षा देवी, मनु कुमारी, सरिता देवी, सपना कुमारी, राकेश कुमार, विनोद बंसल सहित जिला बिलासपुर के विभिन्न विभागों के अनेक आउटसोर्स कर्मचारियों ने भाग लिया।
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