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Bilaspur News: नलवाड़ी मेले पर अवकाश न मिलने से लोगों में रोष
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:02 PM IST
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समापन दिवस पर पहली बार नहीं मिली लोकल छुट्टी
परंपरा टूटने, अवकाश से वंचित रखने पर उठे सवाल
समाजसेवियों व स्थानीय प्रतिनिधियों ने जताई कड़ी आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। बिलासपुर के ऐतिहासिक एवं राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले के समापन अवसर पर इस वर्ष कर्मचारियों को स्थानीय अवकाश न दिए जाने से क्षेत्र में असंतोष का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि मेले के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब प्रशासन द्वारा समापन दिवस पर छुट्टी घोषित नहीं की गई।
समाजसेवी एवं स्थानीय प्रतिनिधियों में प्रधान हरि सिंह ठाकुर, रूप लाल शर्मा, लेखराम शर्मा, हरि राम शर्मा, बिशन दास शर्मा, प्रीतम कुमार, जगदीश कुमार, प्यारे लाल शर्मा और बलवंत ठाकुर सहित अन्य लोगों ने इस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि नलवाड़ी मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जिला बिलासपुर की पहचान और परंपरा का प्रतीक है, जिसमें हर वर्ष हजारों लोग भाग लेते हैं। कहा कि प्रदेश की वर्तमान सरकार और जिला प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण परंपरा की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों को अवकाश से वंचित रखा है, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि पहले हर वर्ष मेले के समापन अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित किया जाता था, ताकि अधिक से अधिक लोग इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग ले सकें। स्थानीय लोगों ने इसे हैरान करने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि इससे मेले की गरिमा और जनभागीदारी पर असर पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में इस परंपरा को बनाए रखा जाए और ऐसे आयोजनों के महत्व को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से भी इस मुद्दे पर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने इस विषय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आगामी समय में जन आंदोलन भी किया जा सकता है।
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समाजसेवियों व स्थानीय प्रतिनिधियों ने जताई कड़ी आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। बिलासपुर के ऐतिहासिक एवं राज्य स्तरीय नलवाड़ी मेले के समापन अवसर पर इस वर्ष कर्मचारियों को स्थानीय अवकाश न दिए जाने से क्षेत्र में असंतोष का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि मेले के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब प्रशासन द्वारा समापन दिवस पर छुट्टी घोषित नहीं की गई।
समाजसेवी एवं स्थानीय प्रतिनिधियों में प्रधान हरि सिंह ठाकुर, रूप लाल शर्मा, लेखराम शर्मा, हरि राम शर्मा, बिशन दास शर्मा, प्रीतम कुमार, जगदीश कुमार, प्यारे लाल शर्मा और बलवंत ठाकुर सहित अन्य लोगों ने इस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि नलवाड़ी मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जिला बिलासपुर की पहचान और परंपरा का प्रतीक है, जिसमें हर वर्ष हजारों लोग भाग लेते हैं। कहा कि प्रदेश की वर्तमान सरकार और जिला प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण परंपरा की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों को अवकाश से वंचित रखा है, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि पहले हर वर्ष मेले के समापन अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित किया जाता था, ताकि अधिक से अधिक लोग इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग ले सकें। स्थानीय लोगों ने इसे हैरान करने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि इससे मेले की गरिमा और जनभागीदारी पर असर पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में इस परंपरा को बनाए रखा जाए और ऐसे आयोजनों के महत्व को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से भी इस मुद्दे पर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने इस विषय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आगामी समय में जन आंदोलन भी किया जा सकता है।
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