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Bilaspur News: हेरोइन बरामदगी मामले में आरोपी को नियमित जमानत
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अदालत ने कहा- जांच पूरी, अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखना उचित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी के मामले में विशेष अदालत एनडीपीएस एक्ट घुमारवीं ने आरोपी को नियमित जमानत प्रदान की है। अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों पर रिहाई के आदेश दिए हैं। साथ ही आरोपी को साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने, प्रत्येक सुनवाई में अदालत में उपस्थित रहने तथा न्यायालय की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने के निर्देश दिए हैं।
अभियोजन के अनुसार 26 फरवरी 2026 को भराड़ी थाना पुलिस की टीम गश्त और वाहन जांच पर थी। इसी दौरान मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का पालन करते हुए पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान तकिए के अंदर छिपाकर रखा गया 6.62 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद होने का दावा किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया और जांच पूरी करने के बाद फोरेंसिक रिपोर्ट सहित अदालत में चालान पेश कर दिया। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी से अब किसी प्रकार की बरामदगी शेष नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि रिहाई के बाद आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है या दोबारा ऐसे अपराध में शामिल हो सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने माना कि बरामद 6.62 ग्राम हेरोइन एनडीपीएस एक्ट के तहत मध्यम (इंटरमीडिएट) मात्रा की श्रेणी में आती है, इसलिए इस मामले में धारा 37 के कठोर प्रावधान लागू नहीं होते। अदालत ने यह भी माना कि जांच पूरी हो चुकी है, आरोप तय किए जा चुके हैं तथा कुछ गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत सामान्य नियम है और जेल अपवाद। जब तक किसी व्यक्ति का अपराध न्यायालय में सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। इसी आधार पर अदालत ने शर्तों सहित नियमित जमानत मंजूर कर ली।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी के मामले में विशेष अदालत एनडीपीएस एक्ट घुमारवीं ने आरोपी को नियमित जमानत प्रदान की है। अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों पर रिहाई के आदेश दिए हैं। साथ ही आरोपी को साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने, प्रत्येक सुनवाई में अदालत में उपस्थित रहने तथा न्यायालय की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाने के निर्देश दिए हैं।
अभियोजन के अनुसार 26 फरवरी 2026 को भराड़ी थाना पुलिस की टीम गश्त और वाहन जांच पर थी। इसी दौरान मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों का पालन करते हुए पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान तकिए के अंदर छिपाकर रखा गया 6.62 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद होने का दावा किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया और जांच पूरी करने के बाद फोरेंसिक रिपोर्ट सहित अदालत में चालान पेश कर दिया। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी से अब किसी प्रकार की बरामदगी शेष नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि रिहाई के बाद आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है या दोबारा ऐसे अपराध में शामिल हो सकता है।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने माना कि बरामद 6.62 ग्राम हेरोइन एनडीपीएस एक्ट के तहत मध्यम (इंटरमीडिएट) मात्रा की श्रेणी में आती है, इसलिए इस मामले में धारा 37 के कठोर प्रावधान लागू नहीं होते। अदालत ने यह भी माना कि जांच पूरी हो चुकी है, आरोप तय किए जा चुके हैं तथा कुछ गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत सामान्य नियम है और जेल अपवाद। जब तक किसी व्यक्ति का अपराध न्यायालय में सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। इसी आधार पर अदालत ने शर्तों सहित नियमित जमानत मंजूर कर ली।
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