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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ियों पर घमासान

संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sun, 22 Mar 2026 11:02 PM IST
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Uproar over irregularities in Kiratpur-Nerchowk four-lane land acquisition
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने सरकार को भेजा 23वां रिमाइंडर
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एसडीएम रिपोर्टों में विरोधाभास, राजस्व रिकॉर्ड में खामियों से बढ़ी परेशानी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में सामने आई त्रुटियों को लेकर मामला लगातार उलझता जा रहा है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने प्रशासन और राज्य सरकार को 23वां रिमाइंडर जारी कर गंभीर सवाल उठाए हैं।
समिति का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में भारी अनियमितताएं हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया जा रहा है। एसडीएम झंडूता द्वारा डीसी बिलासपुर को प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया है कि फोरलेन के इंतकालों में कई करूकान दर्ज नहीं किए गए हैं। साथ ही कई मामलों में करूकान का विभाजन होने के बावजूद अलग-अलग इंतकाल दर्ज नहीं किए गए, जिससे राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर खामियां सामने आई हैं। वहीं, एसडीएम घुमारवीं और तहसील नयना देवी जी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में इन मुद्दों पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और संबंधित विभाग से सूचना लेने की बात कही गई। इन अलग-अलग रिपोर्टों में विरोधाभास होने से पूरे मामले में और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। यह पहला मामला नहीं है जब ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हों। पूर्व में भी तत्कालीन एसडीएम श्री नयना देवी ने डीसी बिलासपुर को अवगत करवाया था कि राजस्व रिकॉर्ड पढ़ने योग्य नहीं है, जिससे जमाबंदियों में अमल दरामद करने में कठिनाई आ रही है।
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साल 2019 में भी डीसी बिलासपुर की मासिक बैठक में इंतकालों के पुनर्विलोकन का मुद्दा उठाया गया था। एसडीएम घुमारवीं द्वारा तहसीलदार को दिए गए निर्देशों में कहा गया था कि ऐसी त्रुटियों के मामलों को एनएचएआई के तहसीलदार को भेजा जाए। इसके बाद एनएचएआई तहसीलदार सक्षम न्यायालय से अनुमति लेकर कार्रवाई सुनिश्चित करे। अब यही प्रक्रिया और निर्देश प्रशासन के लिए उलझन का कारण बन गए हैं। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव राजस्व, फाइनेंस कमिश्नर राजस्व सहित कई उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर सवाल उठाया है कि—
करूकान दर्ज न होने से राजस्व रिकॉर्ड पर क्या प्रभाव पड़ा। विभाजित करूकान के अलग इंतकाल दर्ज न होने से क्या परिवर्तन हुए। समिति का कहना है कि इन अहम सवालों पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है, जो जनहित के खिलाफ है।
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