{"_id":"6a624aad84edc4405205356c","slug":"amidst-crumbling-mountains-humanity-remained-unbroken-chamba-news-c-88-1-ssml1006-190880-2026-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: टूटते पहाड़ों के बीच नहीं टूटी मानवता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: टूटते पहाड़ों के बीच नहीं टूटी मानवता
Thu, 23 Jul 2026 11:04 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:04 PM IST
विज्ञापन
भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चट्टानों से मरीज को सुरक्षित गुजारते एनएचएआई कर्मचारी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पहाड़ से गिरते पत्थरों के बीच मरीज को एंबुलेंस तक लाए एनएचएआई के कर्मचारी
बुलंद हौसले से मरीज और बीमार बच्ची को पार करवाया खतरनाक हो चुका रास्ता
बत्ती दी हट्टी और दुनाली के पास बार-बार बंद होता रहा नेशनल हाईवे
--
पहाड़ टूट रहे थे, पत्थर बरस रहे थे और रास्ता हर पल खतरे में था। इसी खतरनाक मोर्चे पर एनएचएआई के कर्मचारी इंसानियत की मिसाल बनकर डटे रहे। चट्टानों के बीच फंसे मरीज और एक सात माह की बीमार बच्ची को सुरक्षित निकालने के लिए उन्होंने जान जोखिम में डाल दी। एक ओर हाथों में मशीनें थीं तो दूसरी ओर जिंदगी बचाने का जज्बा। भूस्खलन के बीच उन्होंने मरीजों और बीमार बच्ची को सुरक्षित निकालकर मानवता की मिसाल पेश की।
-- -- -
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। दिन : वीरवार, समय : सुबह 11 बजे, स्थान : चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग, पहाड़ों से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। बत्ती दी हट्टी और दुनाली के पास मार्ग यातायात के लिए बाधित हो चुका है। एनएचएआई के कर्मचारी मशीनरी के साथ मार्ग को बहाल करने में जुटे हैं। 11:20 पर नागरिक अस्पताल से रेफर मरीज को लेकर परिजन बत्ती दी हट्टी के पास पहुंचे। आगे सड़क पर चट्टानें गिरी हैं। एनएचएआई के कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर भरमौर से मेडिकल कॉलेज चंबा के लिए रेफर मरीज को पकड़कर पहले उन चट्टानों को पार करवाया। उसके बाद वहां से अपने वाहन में बैठाकर दूसरी तरफ खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया। परिजन मरीज को चंबा के लिए रवाना हुए। मरीज को समय पर मेडिकल कॉलेज पहुंचाना जरूरी था। वहीं, सात माह की बीमार बच्ची को कंबल में लपेट कर परिजन वहां पहुंचे। पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों से गुजरने में उन्हें डर लगने लगा। एनएचएआई के कर्मचारी ने बच्ची को गोद में लिया और भागते हुए भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को पार करवाया। उसके पीछे माता-पिता भी दौड़ पड़े। वहां बच्ची को एनएचएआई वाहन के जरिये अस्पताल पहुंचाया।
12 बजे कुछ देर के लिए बारिश रुकी तो कर्मचारियों ने सड़क पर गिरीं चट्टानों को जेसीबी से हटाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में उन्होंने मार्ग यातायात के लिए बहाल कर दिया। दोपहर 1 बजे फिर से भूस्खलन हो गया और मार्ग बाधित हो गया। कर्मचारियों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने फिर से वहां बहाली का कार्य शुरू कर दिया। एक कर्मचारी पहाड़ी से गिरने वाले पत्थरों पर नजर रख रहा है तो बाकी सड़क पर गिरे पत्थरों को हटा रहे थे। बड़े पत्थरों को जेसीबी से हटाया जा रहा है। एडीएम भरमौर विकास शर्मा ने बताया कि जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के कारण मार्ग यातायात के लिए बाधित होता रहा लेकिन एनएचएआई के कर्मचारियों ने उसे बहाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मरीज को सुरक्षित एंबुलेंस तक भी पहुंचाया।
विज्ञापन
--
विज्ञापन
बुलंद हौसले से मरीज और बीमार बच्ची को पार करवाया खतरनाक हो चुका रास्ता
बत्ती दी हट्टी और दुनाली के पास बार-बार बंद होता रहा नेशनल हाईवे
पहाड़ टूट रहे थे, पत्थर बरस रहे थे और रास्ता हर पल खतरे में था। इसी खतरनाक मोर्चे पर एनएचएआई के कर्मचारी इंसानियत की मिसाल बनकर डटे रहे। चट्टानों के बीच फंसे मरीज और एक सात माह की बीमार बच्ची को सुरक्षित निकालने के लिए उन्होंने जान जोखिम में डाल दी। एक ओर हाथों में मशीनें थीं तो दूसरी ओर जिंदगी बचाने का जज्बा। भूस्खलन के बीच उन्होंने मरीजों और बीमार बच्ची को सुरक्षित निकालकर मानवता की मिसाल पेश की।
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। दिन : वीरवार, समय : सुबह 11 बजे, स्थान : चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग, पहाड़ों से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। बत्ती दी हट्टी और दुनाली के पास मार्ग यातायात के लिए बाधित हो चुका है। एनएचएआई के कर्मचारी मशीनरी के साथ मार्ग को बहाल करने में जुटे हैं। 11:20 पर नागरिक अस्पताल से रेफर मरीज को लेकर परिजन बत्ती दी हट्टी के पास पहुंचे। आगे सड़क पर चट्टानें गिरी हैं। एनएचएआई के कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर भरमौर से मेडिकल कॉलेज चंबा के लिए रेफर मरीज को पकड़कर पहले उन चट्टानों को पार करवाया। उसके बाद वहां से अपने वाहन में बैठाकर दूसरी तरफ खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया। परिजन मरीज को चंबा के लिए रवाना हुए। मरीज को समय पर मेडिकल कॉलेज पहुंचाना जरूरी था। वहीं, सात माह की बीमार बच्ची को कंबल में लपेट कर परिजन वहां पहुंचे। पहाड़ी से गिर रहे पत्थरों से गुजरने में उन्हें डर लगने लगा। एनएचएआई के कर्मचारी ने बच्ची को गोद में लिया और भागते हुए भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को पार करवाया। उसके पीछे माता-पिता भी दौड़ पड़े। वहां बच्ची को एनएचएआई वाहन के जरिये अस्पताल पहुंचाया।
विज्ञापन
12 बजे कुछ देर के लिए बारिश रुकी तो कर्मचारियों ने सड़क पर गिरीं चट्टानों को जेसीबी से हटाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में उन्होंने मार्ग यातायात के लिए बहाल कर दिया। दोपहर 1 बजे फिर से भूस्खलन हो गया और मार्ग बाधित हो गया। कर्मचारियों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने फिर से वहां बहाली का कार्य शुरू कर दिया। एक कर्मचारी पहाड़ी से गिरने वाले पत्थरों पर नजर रख रहा है तो बाकी सड़क पर गिरे पत्थरों को हटा रहे थे। बड़े पत्थरों को जेसीबी से हटाया जा रहा है। एडीएम भरमौर विकास शर्मा ने बताया कि जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के कारण मार्ग यातायात के लिए बाधित होता रहा लेकिन एनएचएआई के कर्मचारियों ने उसे बहाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मरीज को सुरक्षित एंबुलेंस तक भी पहुंचाया।
विज्ञापन

भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चट्टानों से मरीज को सुरक्षित गुजारते एनएचएआई कर्मचारी।

भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चट्टानों से मरीज को सुरक्षित गुजारते एनएचएआई कर्मचारी।