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Chamba News: यूट्यूब से सीखी कला, मेहंदी के डिजाइन से बनाई रोजगार की राह
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:00 PM IST
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स्नेहा
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चंबा। कहते हैं कि हुनर उम्र या संसाधनों का मोहताज नहीं होता, बस जज्बा और मेहनत चाहिए। साहो पंचायत की रहने वाली 19 वर्षीय स्नेहा इस कहावत को सच साबित कर रही हैं। नर्स बनने का सपना संजोए स्नेहा इन दिनों चंबा के एक संस्थान में नर्सिंग के सेकंड ईयर में पढ़ रही हैं। पढ़ाई के साथ स्नेहा ने यूट्यूब पर मेहंगी रचाने की कला सीख रोजगार का रास्ता भी खोल लिया है।
मेहंदी लगाने का शौक स्नेहा को स्कूल के दिनों से रहा है। नौवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उन्होंने मोबाइल फोन पर यूट्यूब से मेहंदी के डिजाइन देखकर अभ्यास शुरू किया। बिना किसी प्रशिक्षण के आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास के बल पर स्नेहा ने इस कला में दक्षता हासिल की है।
स्नेहा की लगाई मेहंदी अपनी बारीकी, सफाई और आधुनिक डिजाइनों के लिए जानी जाती है। वह बेहद कम समय में आकर्षक दूल्हा-दुल्हन डिजाइन तैयार करने में माहिर हो चुकी हैं। इसी कारण उनकी बनाई मेहंदी युवतियों और दुल्हनों को खूब पसंद आ रही है। धीरे-धीरे स्नेहा की पहचान आसपास के क्षेत्रों में भी बनती जा रही है और शादी-विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर उन्हें बुलाया जा रहा है। उनके धड़ाधड़ ऑर्डर मिल रहे हैं।
स्नेहा के परिवार में माता-पिता, चार बहनें और एक भाई हैं। उसे छोड़कर सभी बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि भाई जमा दो कक्षा में अध्ययनरत है। स्नेहा ने बताया कि मेहंदी कला को आगे बढ़ाने में उनके पिता भिंद्रो और माता मनीशा ने उन्हें पूरा सहयोग और प्रोत्साहन दिया है। पिता पीडब्ल्यूडी में कार्यरत हैं तो माता गृहिणी हैं।
पढ़ाई के साथ अपने शौक को समय देना आसान नहीं होता, लेकिन स्नेहा इस संतुलन को बाखूबी निभा रही हैं। उनका कहना है कि भविष्य में वह एक कुशल नर्स बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं और साथ ही मेहंदी कला को स्वरोजगार के रूप में विकसित करना चाहती हैं।
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मेहंदी लगाने का शौक स्नेहा को स्कूल के दिनों से रहा है। नौवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उन्होंने मोबाइल फोन पर यूट्यूब से मेहंदी के डिजाइन देखकर अभ्यास शुरू किया। बिना किसी प्रशिक्षण के आत्मविश्वास और निरंतर अभ्यास के बल पर स्नेहा ने इस कला में दक्षता हासिल की है।
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स्नेहा की लगाई मेहंदी अपनी बारीकी, सफाई और आधुनिक डिजाइनों के लिए जानी जाती है। वह बेहद कम समय में आकर्षक दूल्हा-दुल्हन डिजाइन तैयार करने में माहिर हो चुकी हैं। इसी कारण उनकी बनाई मेहंदी युवतियों और दुल्हनों को खूब पसंद आ रही है। धीरे-धीरे स्नेहा की पहचान आसपास के क्षेत्रों में भी बनती जा रही है और शादी-विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर उन्हें बुलाया जा रहा है। उनके धड़ाधड़ ऑर्डर मिल रहे हैं।
स्नेहा के परिवार में माता-पिता, चार बहनें और एक भाई हैं। उसे छोड़कर सभी बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि भाई जमा दो कक्षा में अध्ययनरत है। स्नेहा ने बताया कि मेहंदी कला को आगे बढ़ाने में उनके पिता भिंद्रो और माता मनीशा ने उन्हें पूरा सहयोग और प्रोत्साहन दिया है। पिता पीडब्ल्यूडी में कार्यरत हैं तो माता गृहिणी हैं।
पढ़ाई के साथ अपने शौक को समय देना आसान नहीं होता, लेकिन स्नेहा इस संतुलन को बाखूबी निभा रही हैं। उनका कहना है कि भविष्य में वह एक कुशल नर्स बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं और साथ ही मेहंदी कला को स्वरोजगार के रूप में विकसित करना चाहती हैं।
