{"_id":"69749f9d7727da426c094f7e","slug":"students-were-informed-about-the-constitutional-rights-of-girls-chamba-news-c-88-1-ssml1004-172847-2026-01-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: विद्यार्थियों को बालिकाओं के संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: विद्यार्थियों को बालिकाओं के संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 25 Jan 2026 04:00 AM IST
विज्ञापन
महि@ार् दयानंद मठ विद्यालयमें विधिक साक्षरता शिविर में मौजूदविद्यार्थी। स्त्रोत- स्कूल
विज्ञापन
महर्षि दयानंद आदर्श विद्यालय में विधिक सहायता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) चंबा की ओर से महर्षि दयानंद आदर्श विद्यालय में विधिक सहायता जागरूकता कार्यक्रम करवाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं के संरक्षण, अधिकारों एवं सशक्तीकरण के संबंध में विद्यार्थियों को विधिक जानकारी प्रदान करना और समाज में व्याप्त कुरीतियों के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता विकसित करना था।
इस अवसर पर सहायक विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता नवीन सिंह ठाकुर ने संसाधन व्यक्ति के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अध्यापकगण एवं विद्यालय प्रशासन के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुल 269 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें 82 छात्राएं, 156 छात्र, तथा 24 महिला एवं 07 पुरुष शिक्षक/कर्मचारी शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। बाल विवाह की कानूनी आयु, दंडात्मक प्रावधानों और कम उम्र में विवाह से बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत लिंग निर्धारण की सख्त मनाही, चिकित्सा तकनीकों के दुरुपयोग के बारे में बताया गया।
साथ ही लिंग भेदभाव, कन्या भ्रूण हत्या और लिंगानुपात में गिरावट जैसे गंभीर सामाजिक विषयों पर चर्चा करते हुए समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने की बात पर बल दिया गया। बालिकाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के महत्व और उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि महिलाओं, बच्चों एवं समाज के कमजोर वर्गों के लिए विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध है और किसी भी प्रकार के अन्याय, शोषण अथवा अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में इन संस्थाओं से संपर्क किया जा सकता है।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) चंबा की ओर से महर्षि दयानंद आदर्श विद्यालय में विधिक सहायता जागरूकता कार्यक्रम करवाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं के संरक्षण, अधिकारों एवं सशक्तीकरण के संबंध में विद्यार्थियों को विधिक जानकारी प्रदान करना और समाज में व्याप्त कुरीतियों के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता विकसित करना था।
इस अवसर पर सहायक विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता नवीन सिंह ठाकुर ने संसाधन व्यक्ति के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अध्यापकगण एवं विद्यालय प्रशासन के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुल 269 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें 82 छात्राएं, 156 छात्र, तथा 24 महिला एवं 07 पुरुष शिक्षक/कर्मचारी शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। बाल विवाह की कानूनी आयु, दंडात्मक प्रावधानों और कम उम्र में विवाह से बालिकाओं के शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत लिंग निर्धारण की सख्त मनाही, चिकित्सा तकनीकों के दुरुपयोग के बारे में बताया गया।
साथ ही लिंग भेदभाव, कन्या भ्रूण हत्या और लिंगानुपात में गिरावट जैसे गंभीर सामाजिक विषयों पर चर्चा करते हुए समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने की बात पर बल दिया गया। बालिकाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के महत्व और उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि महिलाओं, बच्चों एवं समाज के कमजोर वर्गों के लिए विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध है और किसी भी प्रकार के अन्याय, शोषण अथवा अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में इन संस्थाओं से संपर्क किया जा सकता है।