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Chamba News: डीजल की आग में झुलसने लगी पहाड़ की प्यास
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 20 May 2026 10:56 PM IST
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800 रुपये में मिलने वाले पानी के टैंकर के अब चुकाने पड़ रहे 900 रुपये
डीजल महंगा होने से पानी से लेकर राशन तक, हर जरूरी चीज होने लगी महंगी
पहले 3 रुपये प्रति लीटर तक हुई वृद्धि, अब 90 पैसे और बढ़ा दिए डीजल के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। डीजल की बढ़ती कीमतों ने सिर्फ गाड़ियों की रफ्तार ही नहीं, आम लोगों की जिंदगी की चाल भी धीमी करनी शुरू कर दी है।
पहाड़ों में हर बढ़ता रुपया लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है। पानी से लेकर राशन तक, हर जरूरी चीज महंगी होने लगी है। पहले 800 रुपये में एक टैंकर पानी लोगों की प्यास बुझाता था, अब वही टैंकर 900 रुपये में आ रहा है। एक सप्ताह के भीतर दो बार डीजल की कीमतों में वृद्धि हुई है। मालवाहक वाहनों के किरायों में वृद्धि शुरू हो गई है। गर्मियों के चलते क्षेत्र में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। कई इलाकों में लोग निजी टैंकरों के माध्यम से पानी मंगवाने को मजबूर हैं। ऐसे में पानी सप्लाई करने वाले वाहन चालकों ने बढ़ती ईंधन लागत का हवाला देते हुए किराये में बढ़ोतरी कर दी है। वाहन मालिकों का कहना है कि डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ा है।
व्यावसायिक वाहन मालिकों सोनू, सुरेश, महिंदर, दीपक और सुनील ने बताया कि पहले उनकी गाड़ियां एक दिन में लगभग 15 चक्कर लगा लेती थीं लेकिन अब बढ़ती ईंधन खपत और महंगे डीजल के कारण उतने ही ईंधन में मुश्किल से 12 चक्कर ही लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीजल महंगा होने से वाहन संचालन की लागत काफी बढ़ गई है। इसमें चालक का खर्च, वाहन रखरखाव और अन्य खर्चे भी शामिल हैं। ऐसे में किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है। वाहन मालिकों ने बताया कि पहले डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर और उसके बाद लगभग 90 पैसे की वृद्धि हुई है। मालवाहक वाहनों के किराये बढ़ने से बाजार में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होने लगी हैं। व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने से सामान की लागत बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को डीजल पर लगाए गए टैक्स में कमी करनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि डीजल सस्ता होगा तो परिवहन लागत कम होगी और महंगाई पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। क्षेत्र के लोगों ने चिंता जताई है कि यदि डीजल की कीमतों में इसी तरह लगातार वृद्धि होती रही तो आने वाले समय में खाद्य पदार्थों, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।
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पहले 3 रुपये प्रति लीटर तक हुई वृद्धि, अब 90 पैसे और बढ़ा दिए डीजल के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। डीजल की बढ़ती कीमतों ने सिर्फ गाड़ियों की रफ्तार ही नहीं, आम लोगों की जिंदगी की चाल भी धीमी करनी शुरू कर दी है।
पहाड़ों में हर बढ़ता रुपया लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है। पानी से लेकर राशन तक, हर जरूरी चीज महंगी होने लगी है। पहले 800 रुपये में एक टैंकर पानी लोगों की प्यास बुझाता था, अब वही टैंकर 900 रुपये में आ रहा है। एक सप्ताह के भीतर दो बार डीजल की कीमतों में वृद्धि हुई है। मालवाहक वाहनों के किरायों में वृद्धि शुरू हो गई है। गर्मियों के चलते क्षेत्र में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। कई इलाकों में लोग निजी टैंकरों के माध्यम से पानी मंगवाने को मजबूर हैं। ऐसे में पानी सप्लाई करने वाले वाहन चालकों ने बढ़ती ईंधन लागत का हवाला देते हुए किराये में बढ़ोतरी कर दी है। वाहन मालिकों का कहना है कि डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ा है।
व्यावसायिक वाहन मालिकों सोनू, सुरेश, महिंदर, दीपक और सुनील ने बताया कि पहले उनकी गाड़ियां एक दिन में लगभग 15 चक्कर लगा लेती थीं लेकिन अब बढ़ती ईंधन खपत और महंगे डीजल के कारण उतने ही ईंधन में मुश्किल से 12 चक्कर ही लग रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीजल महंगा होने से वाहन संचालन की लागत काफी बढ़ गई है। इसमें चालक का खर्च, वाहन रखरखाव और अन्य खर्चे भी शामिल हैं। ऐसे में किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है। वाहन मालिकों ने बताया कि पहले डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर और उसके बाद लगभग 90 पैसे की वृद्धि हुई है। मालवाहक वाहनों के किराये बढ़ने से बाजार में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होने लगी हैं। व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने से सामान की लागत बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को डीजल पर लगाए गए टैक्स में कमी करनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि डीजल सस्ता होगा तो परिवहन लागत कम होगी और महंगाई पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। क्षेत्र के लोगों ने चिंता जताई है कि यदि डीजल की कीमतों में इसी तरह लगातार वृद्धि होती रही तो आने वाले समय में खाद्य पदार्थों, निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।
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