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Chamba News: संयुक्त निरीक्षण से आगे नहीं बढ़ पाया चंबा-मंगला रोपवे का कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 01 Feb 2026 06:47 AM IST
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मंगला (चंबा)। पर्यटन को बढ़ावा देने और किसानों को बड़ी सहूलियत देने को लेकर विचाराधीन चंबा-मंगला रोपवे योजना का कार्य संयुक्त निरीक्षण से आगे नहीं बढ़ पाया है। हैरत की बात है कि 15 साल पहले रोपवे को लेकर हलहल तो हुई लेकिन अब तक ये योजना ठंडे बस्ते में ही पड़ी हुई है। रावी नदी के दो किनारों को आपस में जोड़ने के लिए रोपवे निर्माण होने से मंगला, बख्तपुर, टपूण, रठियार, कुपाहड़ा, खज्जियार, साच, नगोड़ी, बसोधन, कोलका, जटकरी की 35 हजार आबादी लाभान्वित होनी थी। इतना ही नहीं, क्षेत्र के किसानों को अपने खेतों की ताजा सब्जियां मुख्यालय पहुंचाना और वाहन चालकों को आठ किलोमीटर के अतिरिक्त सफर से भी निजात मिलनी थी। अब तक ये प्रस्ताव धरातल पर नहीं उतर पाया है जिससे लोग स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों को रंज है कि उन्हें 2010-2011 से रोपवे के नाम पर सब्जबाग ही दिखाए जा रहे हैं। तत्कालीन विधायक स्वर्गीय बीके चौहान ने अपने स्तर पर रोपवे निर्माण को लेकर प्रयास आरंभ किए लेकिन कभी नप चंबा की ओर से एनओसी न मिल पाने तो कभी वन भूमि और हिस्टोरिकल हवा बंगलू की बात सामने आने के बाद ये प्रयास महज विभागीय संयुक्त निरीक्षण तक ही सीमित रहे।
मंगला, बख्तपुर, टपूण, रठियार, कुपाहड़ा, खज्जियार, साच, नगोड़ी, बसोधन, कोलका, जटकरी पंचायतों के गांवों में ग्रामीण खेतीबाड़ी करते हुए घिया, मूली, बैंगन, टमाटर, खीरा समेत अन्य सब्जियां उगा कर शहर की मंडियों में बेचने के लिए पहुंचते हैं। बावजूद उन्हें आठ से दस किमी का सफर तय कर अपने खर्च पर सब्जियां बाजार में आज भी पहुंचानी पड़ रही हैं। जिससे किसानों की जेबों पर खूब कैंची चल रही हैं।
रोपवे का कार्य लंबे समय से अटका हुआ है। यदि ये बन जाता तो मंगला समेत आसपास का क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से विकसित हो जाता।
-मनोज कुमार, मंगला निवासी
ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश लोग खेतीबाड़ी कर सब्जियां उगा कर शहर में बेचने के लिए जाते हैं। रोपवे बनने से उन्हें 8-10 किमी अतिरिक्त सफर से छुटकारा मिल जाता।
-राकेश कुमार, कुपाहड़ा निवासी
रोपवे को लेकर तत्कालीन विधायक बीके चौहान ने प्रयास किए। जिसके तहत संयुक्त विभागीय टीम ने रोपवे के लिए जगह का भी निरीक्षण किया लेकिन अब तक ये जमीन पर नहीं उतर पाया है।
-अमित भारद्वाज, मंगला निवासी
रावी नदी पर रोपवे बनने से हरेक वर्ग को लाभ मिलना था। विकास की दृष्टि से भी रोपवे कारगर साबित होता यदि ये धरातल पर उतर पाता।
-पातो राम, कोलका निवासी
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रोपवे का कार्य लंबे समय से अटका हुआ है। यदि ये बन जाता तो मंगला समेत आसपास का क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से विकसित हो जाता।
-मनोज कुमार, मंगला निवासी
ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश लोग खेतीबाड़ी कर सब्जियां उगा कर शहर में बेचने के लिए जाते हैं। रोपवे बनने से उन्हें 8-10 किमी अतिरिक्त सफर से छुटकारा मिल जाता।
-राकेश कुमार, कुपाहड़ा निवासी
रोपवे को लेकर तत्कालीन विधायक बीके चौहान ने प्रयास किए। जिसके तहत संयुक्त विभागीय टीम ने रोपवे के लिए जगह का भी निरीक्षण किया लेकिन अब तक ये जमीन पर नहीं उतर पाया है।
-अमित भारद्वाज, मंगला निवासी
रावी नदी पर रोपवे बनने से हरेक वर्ग को लाभ मिलना था। विकास की दृष्टि से भी रोपवे कारगर साबित होता यदि ये धरातल पर उतर पाता।
-पातो राम, कोलका निवासी
