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आत्मनिर्भर: धर्मशाला जेल में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कैदियों ने कमाए 1.42 करोड़, जानें विस्तार से

संजीव शर्मा, धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 30 Apr 2026 10:23 AM IST
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सार

लाला लाजपत राय जिला एवं मुक्त सुधार गृह धर्मशाला में सजा काट रहे कैदियों ने बीते वित्तीय वर्ष में 10 स्वरोजगार इकाइयों के जरिये 1 करोड़ 42 लाख 55 हजार रुपये की कमाई कर रिकॉर्ड कायम किया है। पढ़ें पूरी खबर...

Prisoners at Dharamshala Jail Earned ₹1.42 Crore Between April 2025 and March 2026
धर्मशाला जेल। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

कभी जिन हाथों की पहचान जुर्म से थी, आज वही हाथ मेहनत और हुनर से नई कहानी लिख रहे हैं। लाला लाजपत राय जिला एवं मुक्त सुधार गृह धर्मशाला में सजा काट रहे कैदियों ने बीते वित्तीय वर्ष में 10 स्वरोजगार इकाइयों के जरिये 1 करोड़ 42 लाख 55 हजार रुपये की कमाई कर रिकॉर्ड कायम किया है।

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धर्मशाला में कैदियों के माध्यम से कारपेंटरी, पॉलीहाउस, नर्सरी, बेकरी, टेलरिंग, लांड्री, कार वॉशिंग, डेयरी, सब्जी उत्पादन और बैंबू कैंटीन जैसी 10 स्वरोजगार इकाइयां संचालित की जा रही हैं। इन इकाइयों के जरिये अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 1.42 करोड़ रुपये का कारोबार किया गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 47 लाख रुपये से अधिक है। दो साल पहले भी कारोबार एक करोड़ रुपये के पार पहुंचा था, लेकिन 2024-25 में यह आंकड़ा एक करोड़ से करीब पांच लाख रुपये कम रह गया था।

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इस बार कैदियों की मेहनत और कौशल ने न केवल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि जेल प्रशासन के सुधारात्मक प्रयासों को भी नई पहचान दी है। जेल के भीतर कोई कार वॉशिंग यूनिट में गाड़ियों को चमका रहा है, कोई डेयरी में गायों की देखभाल कर दूध उत्पादन बढ़ा रहा है, तो कोई खेतों में सब्जियां उगाकर आमदनी बढ़ाने में जुटा है। बेकरी में तैयार हो रहे उत्पाद और कैंटीन का संचालन भी कैदियों के जिम्मे है।  जेल की कारपेंटरी इकाई में तैयार और रिपेयर हो रहे फर्नीचर की मांग लगातार बढ़ रही है। 

डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, केंद्रीय विवि, स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला कॉलेज, गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा समेत कई संस्थानों से फर्नीचर, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर रिपेयर का काम यहां पहुंच रहा है।

रिहाई के बाद भी सहारा बन रहा हुनर :  यहां प्रशिक्षण लेकर रिहा हुए कई कैदी आज फास्ट फूड, हथकरघा, कारपेंटरी और कार वॉशिंग जैसे कार्यों से अपनी आजीविका कमा रहे हैं। जेल के भीतर सीखा गया हुनर उनकी नई जिंदगी की मजबूत नींव बन रहा है।

जेल प्रशासन का प्रयास है कि यहां सजा काट रहे कैदी रिहाई के बाद खाली हाथ न जाएं बल्कि उनके पास रोजगार का हुनर हो। इस दिशा में मिल रहे परिणाम उत्साहजनक हैं। - विकास भटनागर, सुपरिंटेंडेंट जिला कारागार धर्मशाला

डेयरी, बेकरी और कैंटीन बने कमाई के इंजन
सबसे बेहतर प्रदर्शन डेयरी इकाई का रहा, जहां 77 कैदी कार्यरत रहे। इस इकाई ने 22 लाख 43 हजार 128 रुपये का कारोबार कर करीब 6 लाख 50 हजार 398 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। गोशाला में हर महीने 350 लीटर से अधिक दूध उत्पादन हो रहा है। कैंटीन इकाई रोजगार के लिहाज से सबसे बड़ी रही, जहां 144 कैदी कार्यरत हैं। इसने 43.79 लाख रुपये का कारोबार किया और 6.24 लाख रुपये का लाभ कमाया। बेकरी इकाई में 57 कैदी कार्यरत रहे। यहां 45.86 लाख रुपये का कारोबार हुआ और 5.73 लाख रुपये का मुनाफा दर्ज किया गया। कार वॉशिंग इकाई से 8.34 लाख रुपये और सब्जी उत्पादन इकाई से 7.19 लाख रुपये की कमाई हुई। इसके अलावा अन्य इकाइयों से करीब 15 लाख रुपये की कमाई हुई। 
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