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Hamirpur (Himachal) News: जांच और सक्रिय खोज से टीबी पर किया वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:37 AM IST
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हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में जांच और सक्रिय खोज से टीबी पर वार किया। इसी का परिणाम है कि छह वर्षों में लक्ष्य के मुकाबले टीबी के अधिक मामले आए हैं। जहां 4850 मामलों की पहचान का लक्ष्य रखा गया था, वहीं वास्तविक संख्या बढ़कर 5163 तक पहुंच गई।
मामलों में वृद्धि का एक कारण बेहतर जांच और सक्रिय खोज अभियान भी है, जिससे छिपे हुए मरीजों की पहचान संभव हो पाई है। टीबी उन्मूलन अभियान में निक्षय मित्रों की भूमिका भी अहम रही है। अब तक 214 से अधिक निक्षय मित्रों ने 2378 से अधिक पोषण किट मरीजों को वितरित की हैं। इनमें प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व शामिल होते हैं, जो टीबी मरीजों के उपचार और रिकवरी में मददगार साबित होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और इलाज पूरा करें। टीबी एक संक्रामक बैक्टीरियल रोग है जो आमतौर पर खांसी, छींक या बोलने के दौरान हवा में फैलने वाले बैक्टीरिया से फैलता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों, वेंटिलेशन की कमी और कुपोषण जैसी स्थितियों में यह तेजी से फैल सकता है।
तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक खांसी रहना, बलगम आना और कुछ मामलों में बलगम से खून आना टीबी का आम संकेत माना जाता है। समय रहते टीबी के लक्षणों की पहचान हो जाए और दवाओं का कोर्स पूरा किया जाए तो इस रोग को आसानी से ठीक किया जा सकता है।
बॉक्स
किस वर्ष कितने मरीज आए
2020 में 820 के लक्ष्य पर 749 टीबी के मामले आए। वहीं, 2021 में 760 के लक्ष्य पर 842, 2022 पर 880 के लक्ष्य पर 811, 2023 में 750 के लक्ष्य पर 942 टीबी के मामले आए। 2024 में 820 के लक्ष्य पर 920, 2025 में 820 के लक्ष्य पर 899 टीबी मरीजों की पहचान हुई।
कोट
हर वर्ष टीबी मरीजों की पहचान का लक्ष्य रखा जाता है। छह वर्षों में 5163 टीबी मरीजों की पहचान हुई। निक्षय मित्र मरीजों को पोषण किट भी वितरित करते हैं। -डॉ. सुनील वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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मामलों में वृद्धि का एक कारण बेहतर जांच और सक्रिय खोज अभियान भी है, जिससे छिपे हुए मरीजों की पहचान संभव हो पाई है। टीबी उन्मूलन अभियान में निक्षय मित्रों की भूमिका भी अहम रही है। अब तक 214 से अधिक निक्षय मित्रों ने 2378 से अधिक पोषण किट मरीजों को वितरित की हैं। इनमें प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्व शामिल होते हैं, जो टीबी मरीजों के उपचार और रिकवरी में मददगार साबित होते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं और इलाज पूरा करें। टीबी एक संक्रामक बैक्टीरियल रोग है जो आमतौर पर खांसी, छींक या बोलने के दौरान हवा में फैलने वाले बैक्टीरिया से फैलता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों, वेंटिलेशन की कमी और कुपोषण जैसी स्थितियों में यह तेजी से फैल सकता है।
तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक खांसी रहना, बलगम आना और कुछ मामलों में बलगम से खून आना टीबी का आम संकेत माना जाता है। समय रहते टीबी के लक्षणों की पहचान हो जाए और दवाओं का कोर्स पूरा किया जाए तो इस रोग को आसानी से ठीक किया जा सकता है।
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किस वर्ष कितने मरीज आए
2020 में 820 के लक्ष्य पर 749 टीबी के मामले आए। वहीं, 2021 में 760 के लक्ष्य पर 842, 2022 पर 880 के लक्ष्य पर 811, 2023 में 750 के लक्ष्य पर 942 टीबी के मामले आए। 2024 में 820 के लक्ष्य पर 920, 2025 में 820 के लक्ष्य पर 899 टीबी मरीजों की पहचान हुई।
कोट
हर वर्ष टीबी मरीजों की पहचान का लक्ष्य रखा जाता है। छह वर्षों में 5163 टीबी मरीजों की पहचान हुई। निक्षय मित्र मरीजों को पोषण किट भी वितरित करते हैं। -डॉ. सुनील वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी