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Hamirpur (Himachal) News: अग्निशमन उपकेंद्र की कमी लोगों पर पड़ सकती है भारी
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 03 Apr 2026 12:42 AM IST
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बड़सर (हमीरपुर)। गर्मी के मौसम की दस्तक के बाद बड़सर में लोगों और उनकी संपत्ति पर अग्निशमन उपकेंद्र की कमी भारी पड़ सकती है। नगर पंचायत बड़सर में अग्निशमन उपकेंद्र न होने के कारण आग की घटनाओं पर अंकुश लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
बड़सर मुख्यालय में अग्निशमन उपकेंद्र न होने के कारण आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को अपने स्तर पर प्रयास करने पड़ते हैं। आग की घटनाओं पर अंकुश पाने के लिए 12 किलोमीटर दूर स्थित बिझड़ी से अग्निशामक वाहन बड़सर पहुंचते हैं। तंग सड़क और वाहनों की आवाजाही के बीच इन वाहनों को बड़सर पहुंचने के लिए 30 से 40 मिनट का समय लग जाता है। तब तक आग काफी संपत्ति को अपने में स्वाह कर चुकी होती है।
लोगों का कहना है कि बड़सर उपमंडल का अधिकांश क्षेत्र चीड़ के घने जंगलों से घिरा हुआ है। चीड़ के सूखे पत्ते और राल (रेजिन) अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं, जिससे आग तेजी से फैलती है। इससे घटनाओं की संख्या में इजाफा हो जाता है। क्षेत्र में हर साल आग लगने की घटनाएं अधिक देखने को मिलती हैं।
आंकड़ों के अनुसार बड़सर उपमंडल में हर वर्ष औसतन 200 से 300 फायर केस दर्ज किए जाते हैं। पिछले वर्ष भी फायर सीजन के दौरान महज दो महीनों में विभाग ने करीब 200 मामले दर्ज किए थे, जबकि वन विभाग और ग्रामीणों ने मिलकर 350 से अधिक आग की घटनाओं को अपने स्तर पर नियंत्रित किया।
इस संबंध में व्यापार मंडल प्रधान राज कुमार विज, उपप्रधान सतीश राठौर, देशराज बिज, भूपेंद्र सिंह, शैलजा बनयाल, राजेश बन्याल आदि ने कहा कि बिझड़ी अग्निशमन चौकी को उपकेंद्र में अपग्रेड करने के साथ-साथ बड़सर मुख्यालय में भी अग्निशमन उपकेंद्र स्थापित किया जाए और अलग से दमकल वाहन की व्यवस्था की जाए।
कोट :
बड़सर में अग्निशमन उपकेंद्र खोलने के लिए भूमि की तलाश की जाएगी। अगर भूमि उपलब्ध होती है तो इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा जा सकता है। फिलहाल आग की घटनाओं पर नियंत्रण करने की जिम्मेवारी बिझड़ी स्थित उपकेंद्र पर ही है। -स्वाति डोगरा, एसडीएम बड़सर
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बड़सर मुख्यालय में अग्निशमन उपकेंद्र न होने के कारण आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को अपने स्तर पर प्रयास करने पड़ते हैं। आग की घटनाओं पर अंकुश पाने के लिए 12 किलोमीटर दूर स्थित बिझड़ी से अग्निशामक वाहन बड़सर पहुंचते हैं। तंग सड़क और वाहनों की आवाजाही के बीच इन वाहनों को बड़सर पहुंचने के लिए 30 से 40 मिनट का समय लग जाता है। तब तक आग काफी संपत्ति को अपने में स्वाह कर चुकी होती है।
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लोगों का कहना है कि बड़सर उपमंडल का अधिकांश क्षेत्र चीड़ के घने जंगलों से घिरा हुआ है। चीड़ के सूखे पत्ते और राल (रेजिन) अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं, जिससे आग तेजी से फैलती है। इससे घटनाओं की संख्या में इजाफा हो जाता है। क्षेत्र में हर साल आग लगने की घटनाएं अधिक देखने को मिलती हैं।
आंकड़ों के अनुसार बड़सर उपमंडल में हर वर्ष औसतन 200 से 300 फायर केस दर्ज किए जाते हैं। पिछले वर्ष भी फायर सीजन के दौरान महज दो महीनों में विभाग ने करीब 200 मामले दर्ज किए थे, जबकि वन विभाग और ग्रामीणों ने मिलकर 350 से अधिक आग की घटनाओं को अपने स्तर पर नियंत्रित किया।
इस संबंध में व्यापार मंडल प्रधान राज कुमार विज, उपप्रधान सतीश राठौर, देशराज बिज, भूपेंद्र सिंह, शैलजा बनयाल, राजेश बन्याल आदि ने कहा कि बिझड़ी अग्निशमन चौकी को उपकेंद्र में अपग्रेड करने के साथ-साथ बड़सर मुख्यालय में भी अग्निशमन उपकेंद्र स्थापित किया जाए और अलग से दमकल वाहन की व्यवस्था की जाए।
कोट :
बड़सर में अग्निशमन उपकेंद्र खोलने के लिए भूमि की तलाश की जाएगी। अगर भूमि उपलब्ध होती है तो इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेजा जा सकता है। फिलहाल आग की घटनाओं पर नियंत्रण करने की जिम्मेवारी बिझड़ी स्थित उपकेंद्र पर ही है। -स्वाति डोगरा, एसडीएम बड़सर