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Kangra News: पांच से नहीं चलेंगी एंबुलेंस, चालकों के खाली पदों ने बढ़ाई सिस्टम की धड़कन
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धर्मशाला। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्षरत 102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारी एक बार फिर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। एंबुलेंस यूनियन ने 5 से 11 अप्रैल तक हड़ताल का ऐलान कर दिया है। कर्मचारी एंबुलेंस की चाबियां स्वास्थ्य विभाग को सौंप देंगे। इस घोषणा ने स्वास्थ्य विभाग का चेन छीन लिया है। कारण है विभाग के पास चालकों की भारी कमी है, जिससे आपातकालीन सेवाएं चरमरा सकती हैं।
कांगड़ा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का गणित बेहद चिंताजनक है। जिले में 108 एंबुलेंस की संख्या 36 और 102 की संख्या 26 है, जबकि 2 बाइक एंबुलेंस भी हैं। इन 64 वाहनों को चलाने के लिए विभाग के पास स्वीकृत 57 पदों के मुकाबले मात्र नौ नियमित चालक ही उपलब्ध हैं। 48 पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं।
इन नौ चालकों में से भी दो अधिकारी की गाड़ी चलाते हैं, जबकि एक चालक 31 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने जा रहा है। हड़ता के दौरान अगर अधिकारियों की गाड़ी चलाने वाले चालक भी एंबुलेंस चलाएं तो भी महज 8 चालकों के सहारे पूरे जिले की एंबुलेंस सेवा चलाना विभाग के लिए नामुमकिन जैसा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेगा जोखिम
102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल का सबसे घातक असर ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों पर पड़ेगा। निजी वाहनों का खर्च वहन न कर पाने वाले गरीब परिवारों के लिए एंबुलेंस ही एकमात्र सहारा होती है। ऐसे में समय पर अस्पताल न पहुंच पाने की स्थिति में जच्चा-बच्चा की जान को खतरा पैदा हो सकता है।
जिला कांगड़ा में चालकों के अधिकतर पद खाली हैं। यदि हड़ताल होती है, तो उपलब्ध चालकों की ड्यूटी प्रमुख अस्पतालों में लगाई जाएगी। खाली पदों के बारे में सरकार और उच्चाधिकारियों को समय-समय पर अवगत करवाया जा रहा है। -डॉ. विवेक करोल, सीएमओ कांगड़ा
प्रबंधन और एनएचएम को भेज चुके हैं नोटिस : प्रशांत
102 और 108 एंबुलेंस यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रशांत ने बताया कि मेड स्वान फाउंडेशन प्रबंधन और एनएचएम को नोटिस भेजा जा चुका है। यदि इन मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो 5 से 11 अप्रैल तक चक्का जाम रहेगा। उन्होंने कहा कि मांग की कि नौकरी से निकाले गए कर्मियों की तुरंत वापसी हो। बदले की भावना से किए गए हालिया तबादले रद्द किए जाएं। न्यूनतम वेतन के साथ 12 घंटे ड्यूटी पर दोगुना ओवरटाइम मिले। ईपीएफ और ईएसआई की विसंगतियां दूर की जाएं। इसके साथ ही कर्मचारियों की सर्विस कंटिन्यूटी और सीनियरिटी बनी रहे। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी न होने पर 102 और 108 एंबुलेंस यूनियन वाहनों की चाबियां विभाग को सौंप देगी।
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कांगड़ा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का गणित बेहद चिंताजनक है। जिले में 108 एंबुलेंस की संख्या 36 और 102 की संख्या 26 है, जबकि 2 बाइक एंबुलेंस भी हैं। इन 64 वाहनों को चलाने के लिए विभाग के पास स्वीकृत 57 पदों के मुकाबले मात्र नौ नियमित चालक ही उपलब्ध हैं। 48 पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं।
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इन नौ चालकों में से भी दो अधिकारी की गाड़ी चलाते हैं, जबकि एक चालक 31 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने जा रहा है। हड़ता के दौरान अगर अधिकारियों की गाड़ी चलाने वाले चालक भी एंबुलेंस चलाएं तो भी महज 8 चालकों के सहारे पूरे जिले की एंबुलेंस सेवा चलाना विभाग के लिए नामुमकिन जैसा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेगा जोखिम
102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल का सबसे घातक असर ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों पर पड़ेगा। निजी वाहनों का खर्च वहन न कर पाने वाले गरीब परिवारों के लिए एंबुलेंस ही एकमात्र सहारा होती है। ऐसे में समय पर अस्पताल न पहुंच पाने की स्थिति में जच्चा-बच्चा की जान को खतरा पैदा हो सकता है।
जिला कांगड़ा में चालकों के अधिकतर पद खाली हैं। यदि हड़ताल होती है, तो उपलब्ध चालकों की ड्यूटी प्रमुख अस्पतालों में लगाई जाएगी। खाली पदों के बारे में सरकार और उच्चाधिकारियों को समय-समय पर अवगत करवाया जा रहा है। -डॉ. विवेक करोल, सीएमओ कांगड़ा
प्रबंधन और एनएचएम को भेज चुके हैं नोटिस : प्रशांत
102 और 108 एंबुलेंस यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रशांत ने बताया कि मेड स्वान फाउंडेशन प्रबंधन और एनएचएम को नोटिस भेजा जा चुका है। यदि इन मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो 5 से 11 अप्रैल तक चक्का जाम रहेगा। उन्होंने कहा कि मांग की कि नौकरी से निकाले गए कर्मियों की तुरंत वापसी हो। बदले की भावना से किए गए हालिया तबादले रद्द किए जाएं। न्यूनतम वेतन के साथ 12 घंटे ड्यूटी पर दोगुना ओवरटाइम मिले। ईपीएफ और ईएसआई की विसंगतियां दूर की जाएं। इसके साथ ही कर्मचारियों की सर्विस कंटिन्यूटी और सीनियरिटी बनी रहे। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी न होने पर 102 और 108 एंबुलेंस यूनियन वाहनों की चाबियां विभाग को सौंप देगी।