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Kangra News: पहले क्लेम किया खारिज, अब बीमा कंपनी को देने होंगे 1.05 लाख रुपये
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धर्मशाला। जिला उपभोक्ता आयोग कांगड़ा ने स्वास्थ्य बीमा कंपनी द्वारा गलत आधार पर क्लेम खारिज करने को सेवा में कमी मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता नवनीत सूद को 1,05,322 रुपये की बीमा राशि शिकायत दायर करने की तिथि से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा 25 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा तथा 7,500 रुपये अदालती खर्च भी अदा करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता ने अगस्त 2024 में कंपनी की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। इसके बाद यूरेटरिक स्टोन (पथरी) की शिकायत होने पर उन्हें फोर्टिस अस्पताल कांगड़ा में भर्ती होना पड़ा, जहां उनकी सर्जरी हुई। उपचार पर एक लाख रुपये से अधिक का खर्च आया, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि मरीज ने नौ माह पुराना इलाज का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता की पुरानी पॉलिसी नियमानुसार पोर्ट होकर नई पॉलिसी में आई थी, जिसमें प्रतीक्षा अवधि समाप्त हो चुकी थी। चिकित्सक ने भी प्रमाणित किया कि मरीज को केवल चार दिन से दर्द था, न कि नौ माह से। आयोग ने माना कि कंपनी ने महज अपुष्ट जानकारी के आधार पर दावा अस्वीकार किया, जो सेवा में स्पष्ट कमी है।
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इसके अलावा 25 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा तथा 7,500 रुपये अदालती खर्च भी अदा करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता ने अगस्त 2024 में कंपनी की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। इसके बाद यूरेटरिक स्टोन (पथरी) की शिकायत होने पर उन्हें फोर्टिस अस्पताल कांगड़ा में भर्ती होना पड़ा, जहां उनकी सर्जरी हुई। उपचार पर एक लाख रुपये से अधिक का खर्च आया, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि मरीज ने नौ माह पुराना इलाज का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया।
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सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता की पुरानी पॉलिसी नियमानुसार पोर्ट होकर नई पॉलिसी में आई थी, जिसमें प्रतीक्षा अवधि समाप्त हो चुकी थी। चिकित्सक ने भी प्रमाणित किया कि मरीज को केवल चार दिन से दर्द था, न कि नौ माह से। आयोग ने माना कि कंपनी ने महज अपुष्ट जानकारी के आधार पर दावा अस्वीकार किया, जो सेवा में स्पष्ट कमी है।
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