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कलाई की चोट को न करें नजरअंदाज, समय पर कराएं जांच : डॉ. कार्तिक
Mon, 27 Jul 2026 05:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 27 Jul 2026 05:54 AM IST
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जसूर (कांगड़ा)। बारिश के मौसम में फिसलन के कारण गिरने से कलाई की हड्डी टूटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सिविल अस्पताल नूरपुर में प्रतिदिन कलाई के फ्रैक्चर के तीन से चार मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कार्तिक सैनी ने लोगों से अपील की है कि फ्रैक्चर की स्थिति में देसी पट्टी, मालिश या पारंपरिक उपचार के बजाय तुरंत अस्पताल जाकर एक्स-रे करवाएं और विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराएं।
डॉ. सैनी ने बताया कि बारिश के दौरान फिसलने पर अधिकांश लोग खुद को संभालने के लिए हाथ आगे कर देते हैं। इससे पूरे शरीर का भार कलाई पर पड़ता है और रेडियस सहित अन्य हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। कई बार हेयरलाइन या जोड़ के भीतर का फ्रैक्चर सामान्य रूप से दिखाई नहीं देता, इसलिए इसकी पुष्टि के लिए एक्स-रे जांच जरूरी होती है।
उन्होंने कहा कि मालिश से टूटी हड्डी नहीं जुड़ती, बल्कि नुकसान बढ़ सकता है। फ्रैक्चर के बाद चिकित्सक हड्डी को सही स्थिति में लाकर प्लास्टर या आवश्यकता पड़ने पर रॉड के माध्यम से स्थिर करते हैं। यदि इस दौरान देसी मालिश या हड्डी को दबाने-मरोड़ने का प्रयास किया जाए तो हड्डी के टूटे हिस्से अपनी जगह से खिसक सकते हैं, जिससे हड्डी टेढ़ी जुड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
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डॉ. सैनी ने कहा कि गलत तरीके से जुड़ी हड्डी भविष्य में लगातार दर्द, कलाई में जकड़न, हाथ की कार्यक्षमता में कमी और गठिया (आर्थराइटिस) जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। उन्होंने सलाह दी कि फ्रैक्चर होने पर घायल हाथ को स्थिर रखें, कपड़े में लपेटकर 15 मिनट तक बर्फ की सिकाई करें, हाथ को हृदय के स्तर से ऊपर रखें और जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचकर एक्स-रे करवाएं।
यदि कलाई में अत्यधिक सूजन हो, हाथ टेढ़ा दिखाई दे, उंगलियां सुन्न या नीली पड़ जाएं अथवा हड्डी बाहर दिखाई दे तो इसे आपात स्थिति मानते हुए तुरंत हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। साथ ही बारिश के मौसम में एंटी-स्किड जूते पहनने, सीढ़ियों पर रेलिंग का सहारा लेने और फिसलन वाले स्थानों पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।
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डॉ. सैनी ने बताया कि बारिश के दौरान फिसलने पर अधिकांश लोग खुद को संभालने के लिए हाथ आगे कर देते हैं। इससे पूरे शरीर का भार कलाई पर पड़ता है और रेडियस सहित अन्य हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। कई बार हेयरलाइन या जोड़ के भीतर का फ्रैक्चर सामान्य रूप से दिखाई नहीं देता, इसलिए इसकी पुष्टि के लिए एक्स-रे जांच जरूरी होती है।
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उन्होंने कहा कि मालिश से टूटी हड्डी नहीं जुड़ती, बल्कि नुकसान बढ़ सकता है। फ्रैक्चर के बाद चिकित्सक हड्डी को सही स्थिति में लाकर प्लास्टर या आवश्यकता पड़ने पर रॉड के माध्यम से स्थिर करते हैं। यदि इस दौरान देसी मालिश या हड्डी को दबाने-मरोड़ने का प्रयास किया जाए तो हड्डी के टूटे हिस्से अपनी जगह से खिसक सकते हैं, जिससे हड्डी टेढ़ी जुड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
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डॉ. सैनी ने कहा कि गलत तरीके से जुड़ी हड्डी भविष्य में लगातार दर्द, कलाई में जकड़न, हाथ की कार्यक्षमता में कमी और गठिया (आर्थराइटिस) जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। उन्होंने सलाह दी कि फ्रैक्चर होने पर घायल हाथ को स्थिर रखें, कपड़े में लपेटकर 15 मिनट तक बर्फ की सिकाई करें, हाथ को हृदय के स्तर से ऊपर रखें और जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचकर एक्स-रे करवाएं।
यदि कलाई में अत्यधिक सूजन हो, हाथ टेढ़ा दिखाई दे, उंगलियां सुन्न या नीली पड़ जाएं अथवा हड्डी बाहर दिखाई दे तो इसे आपात स्थिति मानते हुए तुरंत हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। साथ ही बारिश के मौसम में एंटी-स्किड जूते पहनने, सीढ़ियों पर रेलिंग का सहारा लेने और फिसलन वाले स्थानों पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।