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Kangra News: निर्वासित तिब्बतियों ने मैक्लोडगंज से धर्मशाला तक निकाली रैली
Sat, 18 Jul 2026 08:19 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sat, 18 Jul 2026 08:19 PM IST
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धर्मशाला में लोबगा रांगजेन के सम्मान और चीन के विरोध में रैली निकालते तिब्बती समुदाय के लोग। -स
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धर्मशाला। तिब्बत की आजादी और चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोबगा रांगजेन के सम्मान में तिब्बत युवा कांग्रेस द्वारा दुनियाभर में चेन प्रोटेस्ट शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार को मैक्लोडगंज से धर्मशाला तक निर्वासित तिब्बतियों ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह करने वाले लोबगा रांगजेन की तस्वीरें गले में टांगकर रैली निकाली और चीन के खिलाफ नारेबाजी की।
तिब्बतियन युकां के प्रतिनिधि तेन्जिन लोबसंग ने कहा कि लोबगा रांगजेन का सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उनके इस त्याग को कभी मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जब तक तिब्बत की आजादी के संघर्ष पर दुनिया का ध्यान केंद्रित नहीं होता और चीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक शहीद का आखिरी संदेश वैश्विक मंचों पर गूंजता रहेगा।
युकां प्रतिनिधि ने चीन द्वारा लागू किए गए तथाकथित एथनिक यूनिटी लॉ (जातीय एकता कानून) को सिरे से खारिज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वास्तव में एकता का नहीं बल्कि कब्जे का कानून है, जिसकी आड़ में चीन तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान, दक्षिणी मंगोलिया और मंचूरिया जैसे क्षेत्रों को जबरन अपने साम्राज्य में मिलाने की प्रक्रिया तेज कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोबगा रांगजेन का बलिदान संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि चीनी दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का एक नया आह्वान है।
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तिब्बतियन युकां के प्रतिनिधि तेन्जिन लोबसंग ने कहा कि लोबगा रांगजेन का सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उनके इस त्याग को कभी मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जब तक तिब्बत की आजादी के संघर्ष पर दुनिया का ध्यान केंद्रित नहीं होता और चीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक शहीद का आखिरी संदेश वैश्विक मंचों पर गूंजता रहेगा।
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युकां प्रतिनिधि ने चीन द्वारा लागू किए गए तथाकथित एथनिक यूनिटी लॉ (जातीय एकता कानून) को सिरे से खारिज किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वास्तव में एकता का नहीं बल्कि कब्जे का कानून है, जिसकी आड़ में चीन तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान, दक्षिणी मंगोलिया और मंचूरिया जैसे क्षेत्रों को जबरन अपने साम्राज्य में मिलाने की प्रक्रिया तेज कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोबगा रांगजेन का बलिदान संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि चीनी दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का एक नया आह्वान है।
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