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मजबूत लोकतंत्र के लिए हर मतदाता की समावेशी भागीदारी जरूरी : नंदिता
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की मुख्य निर्वाचन अधिकारी नंदिता गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र मतदाता की निर्बाध और सुगम भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। वह धर्मशाला में मतदान केंद्र पर पहचान की सुगमता विषय पर आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय विषयगत कार्यशाला में बोल रही थीं।
उन्होंने कहा कि मतदाता पहचान प्रक्रिया को अधिक सरल, समावेशी एवं तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यशाला भविष्य की निर्वाचन प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव और नवाचार प्रदान करेगी। इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में निर्वाचन विभाग के अधिकारियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में राज्य प्रशिक्षण नोडल अधिकारी ने मतदान केंद्र पर पहचान की सुगमता विषय पर तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण किया। इसके बाद अलग-अलग तकनीकी सत्रों के माध्यम से चुनाव प्रणाली को और बेहतर बनाने पर गहन मंथन किया गया। कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में मतदाता पहचान से जुड़े कानूनी प्रावधानों एवं कानून-व्यवस्था संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गई।
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इस अवसर पर पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान, पूर्व जिला निर्वाचन अधिकारी डीसी राणा और दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध सहयोगी ऋषभ धांशु ने अपने विचार साझा किए। दूसरे सत्र में मतदाता जागरूकता एवं मतदान दिवस से पूर्व पहचान को सरल बनाने के लिए उठाए गए कदमों पर विचार-विमर्श हुआ।
इस दौरान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी प्रो. सन्नी अटवाल, राजकीय महाविद्यालय चंबा से डॉ. अंकिता धवन, राज्य स्वीप आइकन शालिनी शर्मा और जसप्रीत ने जनसहभागिता बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला।
वहीं, तीसरे सत्र में महिलाओं, ट्रांसजेंडर, प्रवासी एवं जनजातीय समुदायों सहित समाज के वंचित वर्गों के समावेशन से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई। इस अवसर पर आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार कुमार संभव पांडे और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से शोध सहयोगी अरुण शर्मा ने विभिन्न वर्गों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। दोपहर बाद आयोजित सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नई तकनीकों द्वारा मतदाता पहचान प्रक्रिया को सरल बनाने, प्रशासनिक दृष्टिकोण, चुनौतियों और अन्य देशों के सफल अनुभवों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि मतदाता पहचान प्रक्रिया को अधिक सरल, समावेशी एवं तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यशाला भविष्य की निर्वाचन प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव और नवाचार प्रदान करेगी। इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में निर्वाचन विभाग के अधिकारियों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया।
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कार्यक्रम की शुरुआत में राज्य प्रशिक्षण नोडल अधिकारी ने मतदान केंद्र पर पहचान की सुगमता विषय पर तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण किया। इसके बाद अलग-अलग तकनीकी सत्रों के माध्यम से चुनाव प्रणाली को और बेहतर बनाने पर गहन मंथन किया गया। कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में मतदाता पहचान से जुड़े कानूनी प्रावधानों एवं कानून-व्यवस्था संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र चौहान, पूर्व जिला निर्वाचन अधिकारी डीसी राणा और दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध सहयोगी ऋषभ धांशु ने अपने विचार साझा किए। दूसरे सत्र में मतदाता जागरूकता एवं मतदान दिवस से पूर्व पहचान को सरल बनाने के लिए उठाए गए कदमों पर विचार-विमर्श हुआ।
इस दौरान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी प्रो. सन्नी अटवाल, राजकीय महाविद्यालय चंबा से डॉ. अंकिता धवन, राज्य स्वीप आइकन शालिनी शर्मा और जसप्रीत ने जनसहभागिता बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला।
वहीं, तीसरे सत्र में महिलाओं, ट्रांसजेंडर, प्रवासी एवं जनजातीय समुदायों सहित समाज के वंचित वर्गों के समावेशन से जुड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई। इस अवसर पर आईआईटी मंडी के रजिस्ट्रार कुमार संभव पांडे और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से शोध सहयोगी अरुण शर्मा ने विभिन्न वर्गों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। दोपहर बाद आयोजित सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नई तकनीकों द्वारा मतदाता पहचान प्रक्रिया को सरल बनाने, प्रशासनिक दृष्टिकोण, चुनौतियों और अन्य देशों के सफल अनुभवों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।