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Kangra News: जमीन रजिस्ट्री पर रोक, विक्रेता को नौ फीसदी ब्याज सहित लौटाने होंगे दो लाख
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:05 AM IST
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धर्मशाला। जमीन बिक्री समझौते से जुड़े एक मामले में न्यायालय ने विक्रेता को दो लाख रुपये खरीदार को ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। यह राशि नौ फीसदी ब्याज के साथ वापस करनी होगी। साथ ही याचिकाकर्ता की जमीन की रजिस्ट्री (स्पेसिफिक परफॉर्मेंस) कराने की मांग खारिज कर दी है। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश धर्मशाला हकीकत ढांडा की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
न्यायालय में कांगड़ा क्षेत्र के व्यक्ति ने इस बारे में वर्ष 2018 में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि क्षेत्र के एक व्यक्ति से जून 2017 को एक कनाल जमीन बेचने का समझौता हुआ था। इसकी कुल कीमत छह लाख रुपये तय हुई थी और दो लाख रुपये बतौर बयाना दिया गया, लेकिन बाद में विक्रेता ने रजिस्ट्री करने से इन्कार कर दिया।
वादी ने अदालत से समझौते को लागू करवाने (रजिस्ट्री) और कब्जा दिलाने की मांग की थी। वैकल्पिक रूप से चार लाख रुपये (बयाने की दोगुनी राशि) ब्याज सहित दिलाने की मांग भी की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जमीन संयुक्त स्वामित्व में है और समझौते में कुछ शर्तें ऐसी हैं, जिनके चलते रजिस्ट्री करवाना व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में स्पेसिफिक परफॉर्मेंस देना उचित नहीं होगा।
न्यायालय ने अपने फैसले में वादी के पक्ष में वैकल्पिक राहत देते हुए प्रतिवादी को दो लाख रुपये राशि नौ फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज के साथ 13 जून 2017 से भुगतान तिथि तक लौटाने के आदेश दिए। साथ ही मुकद्दमे का खर्च भी देने को कहा है।
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न्यायालय में कांगड़ा क्षेत्र के व्यक्ति ने इस बारे में वर्ष 2018 में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि क्षेत्र के एक व्यक्ति से जून 2017 को एक कनाल जमीन बेचने का समझौता हुआ था। इसकी कुल कीमत छह लाख रुपये तय हुई थी और दो लाख रुपये बतौर बयाना दिया गया, लेकिन बाद में विक्रेता ने रजिस्ट्री करने से इन्कार कर दिया।
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वादी ने अदालत से समझौते को लागू करवाने (रजिस्ट्री) और कब्जा दिलाने की मांग की थी। वैकल्पिक रूप से चार लाख रुपये (बयाने की दोगुनी राशि) ब्याज सहित दिलाने की मांग भी की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जमीन संयुक्त स्वामित्व में है और समझौते में कुछ शर्तें ऐसी हैं, जिनके चलते रजिस्ट्री करवाना व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में स्पेसिफिक परफॉर्मेंस देना उचित नहीं होगा।
न्यायालय ने अपने फैसले में वादी के पक्ष में वैकल्पिक राहत देते हुए प्रतिवादी को दो लाख रुपये राशि नौ फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज के साथ 13 जून 2017 से भुगतान तिथि तक लौटाने के आदेश दिए। साथ ही मुकद्दमे का खर्च भी देने को कहा है।