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Kangra News: कांगड़ा के चार वन क्षेत्रों में लैंटाना कैमारा का प्रकोप
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 18 Mar 2026 05:15 AM IST
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खास खबर.....
नूरपुर वन मंडल में वनस्पति विविधता का सर्वेक्षण पूरा
हिमालयन फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ने वन विभाग को सौंपी विस्तृत रिपोर्ट
समृद्ध विविधता में कुल 141 वृक्ष प्रजातियां और 128 झाड़ी प्रजातियां प्रलेखित
रितेश महाजन
नूरपुर (कांगड़ा)। वन मंडल नूरपुर के तहत निचली शिवालिक पहाड़ियों में वृक्षों की विविधता पर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा हो गया है। इस परामर्श परियोजना का संचालन शिमला स्थित हिमालयन फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचएफआरआई) ने किया था, जिसने दिसंबर 2025 में क्षेत्र सर्वेक्षण पूरा करने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश वन विभाग को सौंप दी है।
इस वनस्पति विविधता के वैज्ञानिक अध्ययन का उद्देश्य पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण शिवालिक भू भाग में वनस्पति संसाधनों के संरक्षण नियोजन और सतत प्रबंधन के लिए एक वैज्ञानिक आधार रेखा तैयार करना है।
शोधकर्ताओं ने वन अधिकारियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के सहयोग से व्यापक क्षेत्र में सर्वेक्षण पूरा किया। इसमें मात्रात्मक पारिस्थितिक विधियों का उपयोग करते हुए टीम ने वनस्पति पैटर्न को समझने के लिए प्रजाति विविधता, घनत्व और आवृत्ति पर डेटा का विश्लेषण किया।
एचएफआरआई के वानिकी वैज्ञानिक विनीत जिस्तु ने बताया कि नूरपुर वन मंडल में लगभग 40 फीसदी वन क्षेत्र है और यह शिवालिक की तलहटी का हिस्सा है, जिसकी विशेषता ऊबड़-खाबड़ भूभाग और समुद्र तल से 257 मीटर से लेकर 1,590 मीटर तक की ऊंचाई में भिन्नता है। क्षेत्रीय सर्वेक्षणों में 269 वन आनुवंशिक संसाधन दर्ज किए गए, जिनमें 142 वृक्ष प्रजातियां और 128 झाड़ी प्रजातियां शामिल हैं। चार वन क्षेत्रों कोटला, इंदौरा, रे और जवाली में आक्रामक झाड़ी लैंटाना कैमारा का भारी प्रकोप पाया गया, जो देशी वनस्पतियों और वन पुनर्जनन के लिए गंभीर खतरा है।
वहीं, नूरपुर क्षेत्र में मुख्य रूप से मल्लोटस फिलिपेंसिस (रोहिणी) का प्रभुत्व था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट कांगड़ा जिले की शिवालिक पहाड़ियों में भविष्य की वन प्रबंधन योजना, जैव विविधता संरक्षण पहलों और पारिस्थितिक निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में काम करेगी। संवाद
20 वन ब्लॉकों का हुआ सर्वेक्षण
सर्वेक्षण में नूरपुर वन मंडल के पांच वन रेंजों में फैले 20 वन ब्लॉकों के 82 वन क्षेत्र शामिल थे। इस अध्ययन में वृक्षों की कुल 141 प्रजातियों और झाड़ियों की 128 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जो इस क्षेत्र की समृद्ध वनस्पति विविधता को उजागर करता है। दर्ज की गई वृक्ष प्रजातियों में सेनेगलिया कैटेचू (खैर) और मैलोटस फिलिपेंसिस (रोहिणी) प्रमुख प्रजातियां पाई गईं। इनकी व्यापकता शिवालिक क्षेत्र की विशेषता बताने वाले उत्तरी उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है। जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में इस तरह की निगरानी से अधिकारियों को पारिस्थितिक बदलावों की पहचान करने और अनुकूल वन प्रबंधन रणनीतियों को लागू करने में मदद मिलेगी।
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नूरपुर वन मंडल में वनस्पति विविधता का सर्वेक्षण पूरा
हिमालयन फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ने वन विभाग को सौंपी विस्तृत रिपोर्ट
समृद्ध विविधता में कुल 141 वृक्ष प्रजातियां और 128 झाड़ी प्रजातियां प्रलेखित
रितेश महाजन
नूरपुर (कांगड़ा)। वन मंडल नूरपुर के तहत निचली शिवालिक पहाड़ियों में वृक्षों की विविधता पर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा हो गया है। इस परामर्श परियोजना का संचालन शिमला स्थित हिमालयन फोरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एचएफआरआई) ने किया था, जिसने दिसंबर 2025 में क्षेत्र सर्वेक्षण पूरा करने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश वन विभाग को सौंप दी है।
इस वनस्पति विविधता के वैज्ञानिक अध्ययन का उद्देश्य पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण शिवालिक भू भाग में वनस्पति संसाधनों के संरक्षण नियोजन और सतत प्रबंधन के लिए एक वैज्ञानिक आधार रेखा तैयार करना है।
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शोधकर्ताओं ने वन अधिकारियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के सहयोग से व्यापक क्षेत्र में सर्वेक्षण पूरा किया। इसमें मात्रात्मक पारिस्थितिक विधियों का उपयोग करते हुए टीम ने वनस्पति पैटर्न को समझने के लिए प्रजाति विविधता, घनत्व और आवृत्ति पर डेटा का विश्लेषण किया।
एचएफआरआई के वानिकी वैज्ञानिक विनीत जिस्तु ने बताया कि नूरपुर वन मंडल में लगभग 40 फीसदी वन क्षेत्र है और यह शिवालिक की तलहटी का हिस्सा है, जिसकी विशेषता ऊबड़-खाबड़ भूभाग और समुद्र तल से 257 मीटर से लेकर 1,590 मीटर तक की ऊंचाई में भिन्नता है। क्षेत्रीय सर्वेक्षणों में 269 वन आनुवंशिक संसाधन दर्ज किए गए, जिनमें 142 वृक्ष प्रजातियां और 128 झाड़ी प्रजातियां शामिल हैं। चार वन क्षेत्रों कोटला, इंदौरा, रे और जवाली में आक्रामक झाड़ी लैंटाना कैमारा का भारी प्रकोप पाया गया, जो देशी वनस्पतियों और वन पुनर्जनन के लिए गंभीर खतरा है।
वहीं, नूरपुर क्षेत्र में मुख्य रूप से मल्लोटस फिलिपेंसिस (रोहिणी) का प्रभुत्व था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट कांगड़ा जिले की शिवालिक पहाड़ियों में भविष्य की वन प्रबंधन योजना, जैव विविधता संरक्षण पहलों और पारिस्थितिक निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में काम करेगी। संवाद
20 वन ब्लॉकों का हुआ सर्वेक्षण
सर्वेक्षण में नूरपुर वन मंडल के पांच वन रेंजों में फैले 20 वन ब्लॉकों के 82 वन क्षेत्र शामिल थे। इस अध्ययन में वृक्षों की कुल 141 प्रजातियों और झाड़ियों की 128 प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जो इस क्षेत्र की समृद्ध वनस्पति विविधता को उजागर करता है। दर्ज की गई वृक्ष प्रजातियों में सेनेगलिया कैटेचू (खैर) और मैलोटस फिलिपेंसिस (रोहिणी) प्रमुख प्रजातियां पाई गईं। इनकी व्यापकता शिवालिक क्षेत्र की विशेषता बताने वाले उत्तरी उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाती है। जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में इस तरह की निगरानी से अधिकारियों को पारिस्थितिक बदलावों की पहचान करने और अनुकूल वन प्रबंधन रणनीतियों को लागू करने में मदद मिलेगी।