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जमानत रद्द करने के लिए जांच पर सवाल उठाना ही काफी नहीं : कोर्ट
Sun, 28 Jun 2026 01:30 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 28 Jun 2026 01:30 AM IST
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धर्मशाला। मैक्लोडगंज के एक मसाज सेंटर में इस्रायली महिला से कथित छेड़छाड़ के मामले में आरोपी थेरेपिस्ट की जमानत रद्द कराने की अपील अदालत ने खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-प्रथम धर्मशाला राजेश चौहान की अदालत ने कहा कि जमानत रद्द करने के लिए केवल जांच पर सवाल उठाना या अधिक गंभीर धाराएं लगाने की दलील काफी नहीं है, बल्कि यह साबित होना चाहिए कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।
मामला वर्ष 2024 का है, जब भारत आई एक इस्रायली महिला ने मैक्लोडगंज के समीप स्थित मसाज सेंटर के थेरेपिस्ट पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था। पुलिस ने आईपीसी की धारा 354ए के तहत मामला दर्ज किया था और अपराध जमानती होने के कारण निचली अदालत ने 21 मई 2024 को आरोपी को जमानत दे दी थी। इस आदेश को पीड़िता ने सत्र अदालत में चुनौती दी थी।पीड़िता का तर्क था कि हिब्रू भाषा की कठिनाई के कारण वह पूरा विवरण नहीं बता सकी, जिससे पुलिस ने कम गंभीर धारा लगाई।
वहीं, अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि आरोपी ने गवाहों को धमकाया या जांच प्रभावित की। चूंकि पुलिस आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है, इसलिए आरोपी को दोबारा हिरासत में भेजने का कोई कानूनी औचित्य नहीं है। संवाद
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मामला वर्ष 2024 का है, जब भारत आई एक इस्रायली महिला ने मैक्लोडगंज के समीप स्थित मसाज सेंटर के थेरेपिस्ट पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था। पुलिस ने आईपीसी की धारा 354ए के तहत मामला दर्ज किया था और अपराध जमानती होने के कारण निचली अदालत ने 21 मई 2024 को आरोपी को जमानत दे दी थी। इस आदेश को पीड़िता ने सत्र अदालत में चुनौती दी थी।पीड़िता का तर्क था कि हिब्रू भाषा की कठिनाई के कारण वह पूरा विवरण नहीं बता सकी, जिससे पुलिस ने कम गंभीर धारा लगाई।
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वहीं, अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे साबित हो कि आरोपी ने गवाहों को धमकाया या जांच प्रभावित की। चूंकि पुलिस आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है, इसलिए आरोपी को दोबारा हिरासत में भेजने का कोई कानूनी औचित्य नहीं है। संवाद
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