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Kangra News: 12 साल बाद छिना दर्जा, फिर बना माध्यमिक विद्यालय
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जालग (कांगड़ा)। कभी क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की सुविधा देने के लिए हाई स्कूल का दर्जा पाने वाला उत्तरापुर विद्यालय अब फिर से माध्यमिक विद्यालय बन गया है। शिक्षा विभाग ने कम छात्र संख्या वाले सरकारी विद्यालयों के दर्जे में बदलाव संबंधी अधिसूचना जारी करते हुए राजकीय उच्च विद्यालय उत्तरापुर का दर्जा घटा दिया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
मुख्याध्यापक संजीव कुमार ने बताया कि वर्तमान में स्कूल में केवल पांच विद्यार्थी हैं। आठवीं कक्षा के चार और नौवीं का एक विद्यार्थी है। दसवीं कक्षा में कोई छात्र नहीं है। नौवीं के एकमात्र विद्यार्थी को राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जयसिंहपुर में स्थानांतरित किया जाएगा।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में विद्यालय में 10 विद्यार्थी थे। इनमें से एक छात्र दसवीं उत्तीर्ण कर विद्यालय छोड़ गया। चार विद्यार्थियों ने सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जयसिंहपुर में प्रवेश ले लिया। इसके बाद छात्र संख्या घटकर पांच रह गई। उत्तरापुर विद्यालय की स्थापना वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की घोषणा के बाद माध्यमिक विद्यालय के रूप में हुई थी। वर्ष 2014 में इसे उच्च स्कूल का दर्जा मिला।
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दो कमरों में चल रही थीं पांच कक्षाएं
उत्तरापुर उच्च स्कूल लंबे समय से केवल दो कमरों में संचालित हो रहा था। इन्हीं कमरों में छठी से दसवीं तक की पांचों कक्षाओं की पढ़ाई कराई जाती थी। सीमित आधारभूत सुविधाओं को भी छात्र संख्या घटने का एक कारण माना जा रहा है। एसएमसी प्रधान अरुण कुमारी ने कहा कि अभिभावकों का रुझान लगातार निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा है जिससे सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या कम होती जा रही है।
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सरकार को विद्यालय का दर्जा घटाने के बजाय उसके आधारभूत ढांचे को मजबूत करना चाहिए था। पर्याप्त भवन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो क्षेत्र के बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलती रहतीं। -राकेश कटोच, पंचायत प्रधान
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मुख्याध्यापक संजीव कुमार ने बताया कि वर्तमान में स्कूल में केवल पांच विद्यार्थी हैं। आठवीं कक्षा के चार और नौवीं का एक विद्यार्थी है। दसवीं कक्षा में कोई छात्र नहीं है। नौवीं के एकमात्र विद्यार्थी को राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जयसिंहपुर में स्थानांतरित किया जाएगा।
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नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में विद्यालय में 10 विद्यार्थी थे। इनमें से एक छात्र दसवीं उत्तीर्ण कर विद्यालय छोड़ गया। चार विद्यार्थियों ने सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जयसिंहपुर में प्रवेश ले लिया। इसके बाद छात्र संख्या घटकर पांच रह गई। उत्तरापुर विद्यालय की स्थापना वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की घोषणा के बाद माध्यमिक विद्यालय के रूप में हुई थी। वर्ष 2014 में इसे उच्च स्कूल का दर्जा मिला।
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दो कमरों में चल रही थीं पांच कक्षाएं
उत्तरापुर उच्च स्कूल लंबे समय से केवल दो कमरों में संचालित हो रहा था। इन्हीं कमरों में छठी से दसवीं तक की पांचों कक्षाओं की पढ़ाई कराई जाती थी। सीमित आधारभूत सुविधाओं को भी छात्र संख्या घटने का एक कारण माना जा रहा है। एसएमसी प्रधान अरुण कुमारी ने कहा कि अभिभावकों का रुझान लगातार निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा है जिससे सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या कम होती जा रही है।
सरकार को विद्यालय का दर्जा घटाने के बजाय उसके आधारभूत ढांचे को मजबूत करना चाहिए था। पर्याप्त भवन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो क्षेत्र के बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलती रहतीं। -राकेश कटोच, पंचायत प्रधान