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Kangra News: समझौते के बाद निचली अदालत की सजा रद्द
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 19 Mar 2026 05:16 PM IST
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चेक बाउंस मामले में आरोपी को दी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। चेक बाउंस मामले में निचली अदालत से दोषी करार दिए व्यक्ति को जिला एवं सत्र न्यायालय ने समझौते के बाद राहत दी है। निचली अदालत की सजा को आपसी समझौते के आधार पर रद्द कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह ने यह फैसला सुनाया है।
इससे पहले व्यक्ति को अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा की अदालत ने चेक बाउंस मामले में 8 माह की साधारण कैद और 4,11,276 रुपये जमा करवाने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को लेकर व्यक्ति ने जिला व सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
जानकारी के अनुसार चंबा जिले के एक व्यक्ति ने कांगड़ा में एक कंपनी से वाहन खरीदने के लिए ऋण लिया था। कुल 7,90,588 रुपये के ऋण में से 5,84,950 की राशि आरोपी ने चुका दी थी, जबकि 2,05,638 शेष रह गई थी। इसी बकाया राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने बैंक का चेक जारी किया जो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
इस पर कंपनी ने धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने आरोपी को 8 महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और 4,11,276 का जुर्माना भी लगाया था।
आरोपी ने इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी। अपील की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। आरोपी ने कुल 4,11,000 की राशि का भुगतान कर दिया, जबकि शेष 41,276 की राशि अदालत में जमा थी। सत्र न्यायालय ने माना कि दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझ चुका है और पूरा भुगतान हो चुका है। इसके आधार पर अदालत ने निचली अदालत का फैसला रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया और जमा राशि को शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी करने के आदेश दिए।
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धर्मशाला। चेक बाउंस मामले में निचली अदालत से दोषी करार दिए व्यक्ति को जिला एवं सत्र न्यायालय ने समझौते के बाद राहत दी है। निचली अदालत की सजा को आपसी समझौते के आधार पर रद्द कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश चिराग भानु सिंह ने यह फैसला सुनाया है।
इससे पहले व्यक्ति को अतिरिक्त न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा की अदालत ने चेक बाउंस मामले में 8 माह की साधारण कैद और 4,11,276 रुपये जमा करवाने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को लेकर व्यक्ति ने जिला व सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
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जानकारी के अनुसार चंबा जिले के एक व्यक्ति ने कांगड़ा में एक कंपनी से वाहन खरीदने के लिए ऋण लिया था। कुल 7,90,588 रुपये के ऋण में से 5,84,950 की राशि आरोपी ने चुका दी थी, जबकि 2,05,638 शेष रह गई थी। इसी बकाया राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने बैंक का चेक जारी किया जो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया।
इस पर कंपनी ने धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई। मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने आरोपी को 8 महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और 4,11,276 का जुर्माना भी लगाया था।
आरोपी ने इस फैसले को सत्र न्यायालय में चुनौती दी। अपील की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। आरोपी ने कुल 4,11,000 की राशि का भुगतान कर दिया, जबकि शेष 41,276 की राशि अदालत में जमा थी। सत्र न्यायालय ने माना कि दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझ चुका है और पूरा भुगतान हो चुका है। इसके आधार पर अदालत ने निचली अदालत का फैसला रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया और जमा राशि को शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी करने के आदेश दिए।